Russian Sanctions Act seeks to alter Moscow’s cost-benefit calculus, says German envoy Wieck
नई दिल्ली
भारत में जर्मनी के राजदूत जैस्पर वीक ने बुधवार को कहा कि रूसी तेल आयात करने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिकी कानून, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यूक्रेन संघर्ष के मामले में फैसले लेने की छूट देने के लिए है, न कि सभी आयातकों पर अपने आप प्रतिबंध लगाने के लिए। जर्मन राजदूत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष और अमेरिकी कांग्रेस के "लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026" पर बात करते हुए कहा कि व्यापक मकसद रूस की सैन्य आक्रामकता की कीमत बढ़ाना और युद्ध के लिए पैसे जुटाने की मॉस्को की क्षमता को सीमित करना होना चाहिए। जर्मन राजदूत ने ANI को बताया, "यह उन सभी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला नहीं है जो तेल आयात करते हैं, बल्कि यह राष्ट्रपति को अपनी सोच के अनुसार फैसले लेने का अधिकार देता है।"
उन्होंने कहा कि जर्मनी और भारत दोनों ही चाहते हैं कि यह संघर्ष "जितनी जल्दी हो सके" खत्म हो, साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन में संघर्ष को खत्म करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, "केवल एक व्यक्ति है जो इस युद्ध को कल ही खत्म कर सकता है, और वह हैं रूसी राष्ट्रपति पुतिन। और फिलहाल, वह तैयार नहीं हैं, इसलिए हमें उन्हें तैयार होने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।" जर्मन राजदूत ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को रूस के "लागत-लाभ के हिसाब-किताब" (cost-benefit calculus) को बदलने की जरूरत है, और ऐसा संघर्ष जारी रखने की आर्थिक लागत बढ़ाकर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "हमें लागत-लाभ के हिसाब-किताब को बदलना होगा। हमें इस सैन्य आक्रामकता की कीमत बढ़ानी होगी। और ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उन्हें इस युद्ध के लिए पैसे जुटाने या फंड करने के कम मौके दिए जाएं।" उन्होंने आगे कहा कि रूसी तेल खरीदने वाले देशों की संख्या को सीमित करने से मॉस्को पर अधिक वित्तीय दबाव पड़ सकता है। राजदूत ने कहा, "चूंकि यह युद्ध मुख्य रूप से रूसी तेल निर्यात से फंड किया जाता है, इसलिए जितने कम देश इस तेल का आयात करेंगे, रूस को उस युद्ध को जारी रखने में उतनी ही अधिक वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।"
यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा पिछले सप्ताह "लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026" पर हस्ताक्षर करके इसे कानून बनाने के बाद आई है, जिसके तहत रूस को निशाना बनाने वाले कानूनी प्रतिबंधों, टैरिफ और रोक का दायरा बढ़ाया गया है और ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को भी बढ़ाया गया है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीद और प्रतिबंधों से बचने से जुड़े खास मानदंडों को पूरा करते हैं। हालांकि, यह उपाय किसी खास देश पर अपने आप 100% टैरिफ नहीं लगाता है।
अमेरिका का नया कानून रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, रक्षा-संबंधी नेटवर्क और पश्चिमी प्रतिबंधों से बचकर ऊर्जा की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले जहाजों के तथाकथित "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) को भी निशाना बनाता है। यह ईरान प्रतिबंध कानून को पांच साल के लिए और बढ़ाता है।
कानून का एक अहम प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों, और रूसी तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर 100% तक टारगेटेड ड्यूटी लगाने की इजाजत देता है। यह कानून भारत और चीन के लिए खास तौर पर अहम है, जो रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं। यह उन देशों से होने वाले आयात पर संभावित टैरिफ के लिए कानूनी रास्ता बनाता है जो रूसी ऊर्जा की खास खरीद जारी रखते हैं। कानून राष्ट्रपति को खास शर्तों के तहत छूट देने का अधिकार भी देता है, जिसमें कांग्रेस को यह सर्टिफिकेशन देना शामिल है कि छूट राष्ट्रीय हित में है।