"हमलावरों को और हार का कड़वा स्वाद चखाएंगे": ईरानी सेना ने चेतावनी दी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 21-09-2026
"Will make aggressors taste bitter taste of more defeats": Iranian military issues warning

 

तेहरान [ईरान]

ईरान के सैन्य नेताओं ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर विदेशी हमलावरों ने देश को चुनौती दी, तो उन्हें "और हार" का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले ही अमेरिका और इज़राइल को झुकने पर मजबूर कर चुका है और क्षेत्र में रणनीतिक समुद्री व्यापार मार्गों पर सीधा नियंत्रण हासिल कर चुका है। 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध की शुरुआत की याद में मनाए जाने वाले सालाना 'पवित्र रक्षा सप्ताह' (Sacred Defence Week) के मौके पर, सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने एक संयुक्त बयान जारी किया (जिसे ISNA ने प्रकाशित किया)। इसमें सैन्य नेतृत्व ने बाहरी खतरों - खासकर अमेरिका और इज़राइल - के खिलाफ देश की सीमाओं और रणनीतिक हितों की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराया।
 
बयान में कहा गया, "सेना, IRGC, रक्षा मंत्रालय, फराज और बासिज के सभी इस्लामी योद्धा और देश के सीमा रक्षक, दुश्मन के खिलाफ राष्ट्रीय हितों, देश के अधिकारों और हमारे प्यारे ईरान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में पीछे नहीं हटेंगे। वे ईरानी राष्ट्र के हमलावरों और बुरा चाहने वालों - खासकर अमेरिकी, ज़ायोनी दुश्मनों और उनके सहयोगियों - को और हार का कड़वा स्वाद चखाएंगे।"
 
ISNA के अनुसार, संयुक्त बयान में देश की रक्षा क्षमताओं और पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिति पर जोर दिया गया। इसमें कहा गया कि ऐतिहासिक संघर्षों से मिले सबक ने राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय प्रतिरोध क्षमता को मजबूत किया है।
इसमें हाल के सैन्य अभियानों की ओर सीधे इशारा करते हुए दावा किया गया कि ईरान ने पिछले संघर्षों में अमेरिकी और इज़राइली दोनों सेनाओं को हराया है। बयान में आगे कहा गया, "मौजूदा हालात में, ईरान के इस्लामिक गणराज्य की सशस्त्र सेनाओं ने सर्वशक्तिमान ईश्वर, बहादुर लोगों के समर्थन, स्वदेशी ज्ञान और रक्षा उद्योगों व आधुनिक सैन्य तकनीकों में रणनीतिक आत्मनिर्भरता के दम पर सुरक्षा समीकरणों को इस्लामिक उम्माह (इस्लामी समुदाय) के पक्ष में बदल दिया है।"
 
बयान में कहा गया, "आठ साल की पवित्र रक्षा के बहुमूल्य सबक और अनुभवों ने 'मजबूत ईरान' की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को परिपक्व किया है।" इसमें यह भी कहा गया कि इन तरक्कियों ने 'अहंकारी अमेरिका' और 'अपराधी व बच्चों की हत्या करने वाले ज़ायोनी शासन' को 'बारह-दिवसीय युद्ध' जैसे हालिया टकरावों में 'घुटने टेकने और झुकने' पर मजबूर कर दिया। ISNA के अनुसार, बयान में साफ़ तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम समुद्री रास्ते पर ईरान की ऑपरेशनल पहुँच और मध्य पूर्व में विदेशी सुरक्षा हितों पर उसके सैन्य असर को उजागर किया गया।
 
बयान में कहा गया, "मौजूदा हालात में, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की सेनाओं ने सर्वशक्तिमान ईश्वर, बहादुर लोगों के समर्थन, स्वदेशी ज्ञान और रक्षा उद्योगों व आधुनिक सैन्य तकनीकों में रणनीतिक आत्मनिर्भरता के दम पर सुरक्षा समीकरणों को इस्लामिक उम्माह और ईरान की महान जनता के पक्ष में बदल दिया है। उन्होंने पश्चिम एशिया में अमेरिका और नकली ज़ायोनी शासन के सैन्य-सुरक्षा बुनियादी ढांचे और रणनीतिक हितों को भारी नुकसान पहुँचाया है। इसका साफ़ उदाहरण है - ईरानी व्यवस्था के ज़रिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन को अपने हाथ में लेना, अपराधी अमेरिका की पतनशील, हॉलीवुड-आधारित और आतंकवादी सेना के कठपुतली प्रभुत्व का ढहना, और बच्चों की हत्या करने वाली ज़ायोनी सेना की ज़िल्लत।"
 
इसके अलावा, सैन्य नेतृत्व ने ईरान की रक्षा तैयारियों पर ज़ोर दिया और आठ साल तक चले ईरान-इराक युद्ध की विरासत को याद किया। ISNA ने बयान का हवाला देते हुए कहा, "इस्लामिक क्रांति के शानदार इतिहास में 31 सितंबर एक महान गाथा की याद दिलाता है। यह वह पल था जब मज़बूत इरादों वाली ईरानी जनता ने अटूट विश्वास और एकता के दम पर, आठ साल की पवित्र रक्षा के दौरान बाथिस्ट दुश्मनों के सैन्य हमले के ख़िलाफ़ एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी थी।"
 
यह ताज़ा टकराव सऊदी अरब को निशाना बनाकर किए गए हूथी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद क्षेत्र में फिर से फैली अस्थिरता के बीच हुआ है। इसके बाद अमेरिका ने पश्चिम एशिया के कई देशों में मौजूद अमेरिकियों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है, जिसमें तेज़ी से हालात बिगड़ने, उड़ानों में रुकावट और अमेरिकी हितों पर हमलों की आशंका जताई गई है।