दिल्ली की जामा मस्जिद में बीमार हिंदू बच्ची की मदद केलिए उठे सैकड़ों हाथ

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-09-2026
Hundreds of hands reached out to help a sick Hindu girl at Delhi's Jama Masjid.
Hundreds of hands reached out to help a sick Hindu girl at Delhi's Jama Masjid.

 

मंसूरुद्दीन फ़रीदी / नई दिल्ली

दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के बाद का एक दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा में है। मस्जिद से बाहर निकल रहे लोगों के बीच एक मां अपनी बीमार बेटी के इलाज के लिए आर्थिक मदद की उम्मीद लेकर बैठी थी। कुछ युवकों ने बच्ची की बीमारी और इलाज की जरूरत के बारे में लोगों को बताया। इसके बाद कई नमाजियों और राहगीरों ने अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक मदद की।

इस पूरे मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में एक महिला अपनी छोटी बेटी के साथ दिखाई देती है। कुछ युवक लोगों से बच्ची के इलाज के लिए सहयोग की अपील करते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में बच्ची को हिंदू परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इस पहचान और वायरल वीडियो से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इसी तरह, सोशल मीडिया पर करीब नौ करोड़ रुपये की जरूरत और अब तक लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये जुटाए जाने का दावा भी किया जा रहा है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा सकी है। इसलिए इन्हें अभियान से जुड़े दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्ची स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी SMA से पीड़ित बताई गई है। परिवार की ओर से इसे SMA Type 1 बताया गया है। यह एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों की ताकत प्रभावित होती है। बीमारी की गंभीरता और उसके बढ़ने की गति मरीजों में अलग अलग हो सकती है।

SMA में SMN1 जीन से जुड़ी समस्या के कारण शरीर में जरूरी SMN प्रोटीन की कमी हो सकती है। इसका असर मोटर न्यूरॉन और मांसपेशियों की कार्यक्षमता पर पड़ता है।

परिवार के अनुसार, बच्ची की हालत ऐसी है कि उसे रोजमर्रा के सामान्य कामों के लिए भी मदद की जरूरत पड़ती है। मां का कहना है कि उनकी बेटी दूसरे बच्चों की तरह खेल नहीं पाती। बीमारी ने उसकी जिंदगी को काफी सीमित कर दिया है।

मां के लिए सबसे बड़ी चिंता इलाज का इंतजाम करना है। परिवार का दावा है कि डॉक्टरों ने महंगे उपचार की जरूरत बताई है और इसके लिए बड़ी रकम की आवश्यकता है।

इलाज की रकम को लेकर क्या दावा है

अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, बच्ची के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा या जीन थेरेपी की लागत बहुत अधिक है। परिवार की ओर से करीब नौ करोड़ रुपये की जरूरत बताई जा रही है। हालांकि, इस बच्ची के इलाज के लिए निर्धारित दवा, उसकी वास्तविक कीमत और कुल चिकित्सा खर्च की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

SMA के इलाज में अलग अलग प्रकार की दवाओं और उपचारों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें Zolgensma और Spinraza जैसी दवाएं शामिल हैं। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार Zolgensma एक जीन थेरेपी है, जिसे कुछ बाल मरीजों में SMA के उपचार के लिए मंजूरी दी गई है।

Spinraza यानी nusinersen भी SMA के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा है। FDA के अनुसार यह बच्चों और वयस्कों में SMA के इलाज के लिए स्वीकृत है।

इसलिए SMA जैसी दुर्लभ बीमारी के इलाज में खर्च काफी अधिक हो सकता है। लेकिन किसी खास मरीज के लिए नौ करोड़ रुपये की जरूरत है या नहीं, यह मरीज की मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर की सलाह, उपचार योजना और अस्पताल के अनुमान पर निर्भर करता है।

अभियान की शुरुआत कहां से हुई

सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के अनुसार, बच्ची की मदद के लिए अभियान की शुरुआत दिल्ली स्थित एम्स के बाहर हुई थी। यहां सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खलीफा की मुलाकात बच्ची और उसकी मां से होने की बात कही गई है।

दावे के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें बच्ची की बीमारी और परिवार की आर्थिक परेशानी के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने लोगों से मदद की अपील शुरू की।

शुरुआत में यह प्रयास सीमित स्तर पर था। राहगीरों को बच्ची की स्थिति बताई गई। लोगों से अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करने को कहा गया। इसके बाद अभियान से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर आने लगे।यहीं से यह मामला ज्यादा लोगों तक पहुंचने लगा।

जामा मस्जिद तक पहुंची मदद की अपील

इसके बाद शुक्रवार की नमाज के समय बच्ची की मदद के लिए जामा मस्जिद के बाहर भी लोगों से सहयोग की अपील की गई। वायरल वीडियो में कुछ युवक नमाजियों और राहगीरों को बच्ची के इलाज की जरूरत के बारे में बताते दिखाई देते हैं।

कई लोगों ने इस अपील पर आर्थिक मदद की। कुछ लोगों ने परिवार को हौसला दिया। कुछ ने बच्ची के लिए दुआ की। वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि युवाओं ने लोगों को बच्ची की बीमारी और इलाज की जरूरत समझाने की कोशिश की।

इस घटना की सबसे उल्लेखनीय बात यही है कि मदद मांगने वाले परिवार और सहयोग की अपील करने वाले युवाओं की धार्मिक पहचान अलग बताई जा रही है। लेकिन वीडियो में दिखाई देने वाला प्रयास बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक सहायता जुटाने पर केंद्रित है।

वायरल दावों को लेकर सावधानी जरूरी

इस मामले में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इनमें बच्ची की बीमारी, इलाज की लागत, जमा हुई रकम और अभियान से जुड़े लोगों के बारे में अलग अलग बातें सामने आ रही हैं।

ऐसे मामलों में वायरल वीडियो को अंतिम प्रमाण मानना उचित नहीं है। खासकर तब, जब किसी गंभीर बीमारी और बड़े आर्थिक लक्ष्य की बात हो। बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर की सलाह, अस्पताल का उपचार अनुमान और धनसंग्रह खाते की प्रमाणित जानकारी ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।

इस रिपोर्ट में नौ करोड़ रुपये की कुल जरूरत और साढ़े छह करोड़ रुपये जमा होने के दावे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।

इसी तरह, उपलब्ध वेब स्रोतों में पुणे के वाघोली की जामा मस्जिद से जुड़ी एक अलग घटना सामने आती है, जिसमें 14 महीने की गार्गी जाधव नामक बच्ची के SMA Type 1 उपचार के लिए स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने मदद की थी। वह घटना दिल्ली की वायरल घटना से अलग है। इसलिए दोनों मामलों को एक नहीं माना जाना चाहिए।

मां के लिए हर मदद की अहमियत

बच्ची की मां के लिए यह अभियान केवल पैसे जुटाने का जरिया नहीं है। उनके लिए यह अपनी बेटी के इलाज की उम्मीद है।एक मां के लिए सबसे मुश्किल स्थिति तब होती है जब इलाज सामने हो, लेकिन उसकी कीमत परिवार की पहुंच से बाहर हो। ऐसे समय में छोटी सहायता भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यही वजह है कि परिवार की अपील सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंच रही है।

जामा मस्जिद के बाहर सामने आया यह दृश्य भी इसी मानवीय पहल का हिस्सा बताया जा रहा है। यहां लोगों ने अपनी सामर्थ्य के मुताबिक मदद करने की कोशिश की।

बीमारी से ज्यादा बड़ी है इलाज की चुनौती

SMA जैसी दुर्लभ बीमारियों के मामले में केवल बीमारी से लड़ना ही चुनौती नहीं होता। इलाज की उपलब्धता और उसका खर्च भी परिवार के सामने बड़ी समस्या बन जाता है।

आधुनिक चिकित्सा में SMA के लिए उपचार उपलब्ध हैं। लेकिन किस मरीज के लिए कौन सा उपचार उपयुक्त है, यह विशेषज्ञ डॉक्टर तय करते हैं। उपचार की शुरुआत से पहले सही जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है।

दिल्ली की जामा मस्जिद से सामने आए इस वीडियो ने इसी वजह से लोगों का ध्यान खींचा है। एक तरफ गंभीर बीमारी से जूझती बच्ची है। दूसरी तरफ उसकी मां है, जो इलाज के लिए आर्थिक मदद मांग रही है। बीच में कुछ युवा हैं, जो लोगों तक उसकी जरूरत पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

यह कहानी फिलहाल वायरल वीडियो और परिवार से जुड़े दावों के आधार पर सामने आई है। अभियान की कुल रकम, चिकित्सा खर्च और अब तक जुटाई गई धनराशि की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। फिर भी जामा मस्जिद के बाहर मदद के लिए बढ़े हाथ इस बात को सामने लाते हैं कि किसी मुश्किल घड़ी में आर्थिक सहयोग, दुआ और हौसला किसी परिवार के लिए बड़ी ताकत बन सकते हैं।