कतर और अलजजीरा ने कमाई अरबों डालर की ‘बेइज्जती’

Story by  राकेश चौरासिया | Published by  [email protected] • 1 Months ago
अल जजीरा दफ्तर में जाकिर नाइक

राकेश चौरासिया / नई दिल्ली

आधा दर्जन से ज्यादा मुल्कों में आतंकवाद का आरोपी, वांछित और भगोड़ा जाकिर नाइक लगातार सुर्खियों में है. कथित इस्लामी उपदेशक नाइक पहले कतर में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप 2022 में मेहमाने खुशीशी के अंदाज में शिरकत करता दिखाई पड़ा. और अब उसे कतर के मीडिया आउटलेट अल जजीरा के दफ्तर में बुलाया गया. पहले, कतर ने आंखों से काजल चुराने की हरकत की.

हिंदुस्तान से रवादारी की खातिर उसने जाकिर नाइक से पल्ला झाड़ लिया. मगर सवाल यह है कि कतर और कतरी मीडिया अल जजीरा की जाकिर नाइक से ये जुगलबंदी ‘अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था’ को चुनौती देती दिखाई पड़ रही है. कतर के बाद अल जजीरा के दफ्तर में अपनी आग लगाऊ तकरीरों से आतंकियों की फौज तैयार करने वाले जाकिर की नमूदारी को सोशल मीडिया में जमकर ट्रोल किया जा रहा है. 

 

 

कौन है ये जाकिर नाइक

जाकिर नाइक मुंबई में पैदा हुआ था. उसके पिता मनोचिकित्सक और भाई डॉक्टर थे. वह ‘दवाह’ की गतिविधियों की वजह से 1990 के दशक में चर्चा में आया.

जाकिर नाइक भारत से फरार होने से पहले इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन नाम का संगठन और मीडिया आउटलेट चलाता था और वह खुद को इस्लामिक उपदेशक कहवाना पसंद करता है. 

नाइक पीस टीवी और पीस टीवी उर्दू नाम से दो टेलीविजन स्टेशन चलाता है. दोनों चैनल भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, कनाडा और ब्रिटेन में प्रतिबंधित हैं.

जाकिर नाइक पर मुख्य आरोप मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और मनी लॉन्ड्रिंग का है. 2016 के दौरान ढाका में जो बम विस्फोट हुए, उसमें 29 लोगों की मौत हो गई थी. विस्फोट के आरोपियों को धरपकड़ हुई, तो बांग्लादेश के अधिकारियों को उनसे पूछताछ में पता चला कि आरोपी पीस टीवी और सोशल मीडिया नेटवर्क के माध्यम से जाकिर नाइक के संपर्क में आए थे और उसके उपदेशों के असर में उन्होंने यह वारदात की.

इसके बाद 2019 में श्रीलंका में ईस्टर संडे विस्फोट हुए, जिसमें 250 लोगों की मौत हो गई. दहशतगर्दी की इस बड़ी वारदात के तार भी जाकिर नाइक से जुड़े. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे जाकिर नाइक की तकरीरों के असर में थे.

भारत में 2020 के दिल्ली दंगों में भी उसके हाथ होने का आरोप है. हाल ही में मंगलुरू में कुकर बम विस्फोट हुआ था. इसका आरोपी मोहम्मद शारिक इस बम को कहीं प्लांट करने जा रहा था कि अचानक विस्फोट हो गया, जिसमें वह खुद भी घायल हो गया. आरोपी मोहम्मद शरीक के मोबाइल से भी जाकिर नाइक के कई वीडियो मिले हैं. आरोपी शारिक भी जाकिर नाइक के भड़काऊ उपदेशों से प्रभावित था. ब्रिटेन और कनाडा में भी जाकिर नाइक अपने नफरती भाषणों के कारण प्रतिबंधित है.

भारत के यूएपीए ट्रिब्यूनल ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत जाकिर नाइक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित कर दिया है. 

इंजीलवादी जाकिर नाइक के बारे में भारत के गृह मंत्रालय ने जारी अपनी अधिसूचना में उल्लेख किया है कि यदि इस ‘गैरकानूनी संघ’ की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो वह अपनी विध्वंसक गतिविधियों को जारी रखेगा और अपने फरार कार्यकर्ताओं को सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने, राष्ट्र विरोधी भावनाओं का प्रचार करने और उग्रवाद का समर्थन करने के लिए पुनर्गठित करेगा.

मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा था कि जाकिर नाइक के भाषण और बयान भारत और विदेशों में एक विशेष धर्म के युवाओं को आतंकवादी कृत्य करने के लिए प्रेरित करने के लिए थे.

मंत्रालय ने कहा कि ‘‘नाइक के ये बयान सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करके लोगों के दिमाग को प्रदूषित करके देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को भी बाधित कर सकते हैं,

राष्ट्र विरोधी भावनाओं का प्रचार कर सकते हैं, उग्रवाद का समर्थन करके अलगाववाद को बढ़ा सकते हैं और कुछ लोग ऐसी गतिविधियाँ कर सकते हैं, जो देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है.’’

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जब जांच शुरू की, तो उससे ठीक पहले जाकिर नाइक 2016 में मलेशिया भाग गया था. जहां तुर्की-पाकिस्तान की जुंडली के हमदर्द रहे मरहूम नेता मोहम्मद महातिर की कोशिशों से जाकिर को शरण दी गई. हालांकि उस पर मलेशिया में उपदेश देने पर पाबंदी है.

शायद मलेशिया की सरकार को पूरी तरह अंदाजा हो गया है कि उसके बयानों से मलेशिया का माहौल भी खराब हो सकता है. उधर, भारत ने मलेशिया को उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा हुआ है.

जाकिर नाइक की ताजा सरगर्मियां

हाल ही में जाकिर नाइक के कुछ वीडियो सोशल मीडिया में दिखे, जिसमें वह फीफा वर्ल्ड कप में भाग लेने के लिए जाता दिख रहा है. इसकी भारत में तीव्र प्रतिक्रिया हुई. कतर पर सोशल मीडिया में इल्जाम लगाए गए कि कतर एक आतंकवादी को बढ़ावा दे रहा है और फीफा वर्ल्ड कप 2022 में तकरीर देने के लिए जाकिर नाइक को बुलाया गया है.

 

फिर, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाराजगी भरा बयान आया. पुरी ने कहा कि भारत इसे कतर के सामने उठाएगा. पुरी ने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि भारत इसे उठाएगा.’’

भारत ने यह भी संकेत दिए कि भारत फुटबॉल विश्व कप के उद्घाटन समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मौजूदगी के कार्यक्रम से हाथ खींच सकता है. इस तरह जाकिर नाइक पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद जब कतर में जारी फीफा विश्व कप विवादों में घिर गया, तो इस मसले पर दोहा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है.

कतर ने राजनयिक स्तर पर भारत को सूचित करते हुए जाकिर नाइक से पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि जाकिर नाइक को फुटबॉल विश्व कप के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया है. कतर का कहना है कि दूसरे देशों द्वारा इस संबंध में गलत जानकारी फैलाई गई है, ताकि भारत और कतर के रिश्ते खराब हों.

कतर की लीपापोती की कोशिशें हजम नहीं हो रही हैं, तो इसकी भी कई वजहें हैं. कतरी सरकार को बेहतर पता है कि जाकिर नाइक पर बेहद संगीन इल्जाम हैं.

उसने कई मुल्कों में तशद्दुद, इंतेहापसंदी और दहशतगर्दी के बीज बोए हैं. आधा दर्जन से ज्यादा मुल्कों में उसे बैन किया जा चुका है. वह अपने हमवतन हिंदुस्तान में भगोड़ा करार दिया जा चुका है. फिर भी उसे फीफा जैसे दुनिया के सबसे बड़े जश्न में शामिल होने के लिए वीजा दे दिया गया.

बात इतनी भी नहीं, इसके बाद भी जाकिर नाइक दोहा की ‘आंखों का तारा’बना हुआ है. कतर में उसकी सरगर्मियां कम नहीं हुई हैं. अब अल जजीरा ने अपने दफ्तर में उसकी मेहमाननवाजी की है.

फोटो सैशन हुए हैं. यह वांछित और भगोड़ा आतंकी अल जजीरा दफ्तर के सामने ढाई फीसद मुस्कराहट के साथ फोटो खिंचवाता है. अगर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के ‘अंदाजे-बयां’को इस मसाइल पर फिट किया जाए, तो सवाल यह बनता है कि कतरी सरकार किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है.

कतर की शुमार दौलतमंद मुल्कों में होती हो, लेकिन दुनिया में हिंदुस्तान का भी वकार और मर्तबा किसी से छुपा नहीं है. कतर ने अरबों डॉलर खर्च करके दुनिया में फीफा प्रोग्राम से बड़ा मुकाम हासिल करने की कोशिश की है,

मगर इस एक नादानी से उसकी साख बट्टे लगती दिखाई पड़ रही है. कतर जाकिर नाइक को अपने पल्लू में छिपाकर जो आंख-मिचौली खेल रहा है, वह सब तारीख में दर्ज हो रहा है. सनद रहे, माज़ी को हमेशा मुस्तक़बिल के सवालों से दो-चार होना पड़ा है.