Participation of over 100 countries in Khamenei's purported funeral; global leaders and religious figures included.
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई के कथित राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर देश और दुनिया में व्यापक हलचल देखी जा रही है। ईरानी सरकारी मीडिया IRIB और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार यह बहु-दिवसीय राज्य शोक अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि एक बड़े वैश्विक कूटनीतिक और राजनीतिक समारोह का रूप ले चुका है। इस आयोजन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
सात दिवसीय शोक कार्यक्रम और कई शहरों में आयोजन
यह अंतिम संस्कार समारोह शुक्रवार से तेहरान में शुरू होगा और अगले कई दिनों तक ईरान तथा इराक के प्रमुख धार्मिक शहरों में जारी रहेगा। योजना के अनुसार:
तेहरान में प्रारंभिक सार्वजनिक दर्शन और मुख्य समारोह
क़ुम की ओर धार्मिक जुलूस
इराक के नजफ़ और करबला में विशेष शिया धार्मिक आयोजन
अंत में मशहद में दफन प्रक्रिया
ईरानी अधिकारियों के अनुसार यह कार्यक्रम सात दिनों तक चलेगा और इसमें लाखों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
दुनिया भर से बड़े नेताओं की भागीदारी
इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर असाधारण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं।
प्रमुख देशों के नेता:
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी
ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान
जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कावेलाशविली
तुर्की के उपराष्ट्रपति जेवदेत यिलमाज
रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव
चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हे वेई
अफगानिस्तान (तालिबान) के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी
भारत की ओर से उप विदेश मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन
बांग्लादेश के संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद
कई देशों ने अपने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजे हैं, जिससे यह कार्यक्रम एक वैश्विक कूटनीतिक मंच बन गया है।
धार्मिक नेताओं की व्यापक भागीदारी
इस अंतिम संस्कार में केवल राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के प्रमुख धार्मिक प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।
प्रमुख धार्मिक प्रतिनिधि:
क़ुम और नजफ़ से आए वरिष्ठ शिया आयतुल्लाह और मरजा
विभिन्न देशों के सुन्नी इस्लामी विद्वान
ईसाई आर्मेनियाई और असीरियन चर्च के प्रतिनिधि
यहूदी समुदाय के मुख्य रब्बी
पारसी (जरथुस्त्री) धर्मगुरु मोबेद
अंतरधार्मिक संवाद संगठनों के प्रतिनिधि
इस तरह यह आयोजन एक बहुधार्मिक वैश्विक शोक समारोह का रूप ले चुका है, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि एक मंच पर दिखाई दे रहे हैं।
भारत से भी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी
भारत की ओर से भी एक प्रतिनिधिमंडल इस कार्यक्रम में शामिल हो रहा है। उप विदेश मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचे हैं। इसके अलावा पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और महबूबा मुफ्ती भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
सुरक्षा और राजनीतिक चेतावनी
ईरानी सैन्य कमांडरों ने अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई का “कड़ा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा। आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है। ईरानी नेतृत्व इस पूरे समारोह को राष्ट्रीय एकता और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति प्रदर्शन और कूटनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
1989 से भी बड़ा जनसमूह होने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार ईरान के इतिहास के सबसे बड़े जनसमूह वाले आयोजनों में से एक हो सकता है, जो 1989 में आयतुल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार से भी बड़ा बताया जा रहा है, जिसमें लगभग एक करोड़ लोग शामिल हुए थे। खामेनेई का यह कथित अंतिम संस्कार अब एक साधारण धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, कूटनीति और अंतरधार्मिक संवाद का एक बड़ा मंच बन गया है। 100 से अधिक देशों की भागीदारी, प्रमुख विश्व नेताओं की उपस्थिति और धार्मिक प्रतिनिधियों की व्यापक मौजूदगी ने इस आयोजन को आधुनिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समारोहों में से एक बना दिया है।