वॉशिंगटन/यरुशलम:
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने दावा किया है कि ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था गंभीर दबाव में है और उसकी संरचना कमजोर पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन अब पहले जैसा नहीं रहा और भविष्य में उसके पतन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सोमवार को आयोजित एक समारोह में, जो इजरायली खुफिया एजेंसी Mossad के प्रमुख David Barnea के विदाई कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था, नेतन्याहू ने क्षेत्रीय हालात और इजरायल की सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से बात की।
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि हाल के वर्षों में इजरायल को कई मोर्चों पर भारी कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान समर्थित समूहों और क्षेत्रीय नेटवर्कों ने इजरायल के खिलाफ लगातार गतिविधियां चलाई हैं। हालांकि उन्होंने दावा किया कि इजरायल की कार्रवाइयों ने ईरान की रणनीतिक क्षमता और प्रभाव को कमजोर किया है।
नेतन्याहू ने कहा, "हमने एक बड़ी कीमत चुकाई है, लेकिन दूसरी तरफ ईरानी शासन की संरचना में भी दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। यह व्यवस्था अब अपनी पुरानी स्थिति में लौटने वाली नहीं है। मेरा मानना है कि यह शासन अंततः ढह जाएगा।"
उन्होंने इजरायल के विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी ताकतें इजरायल के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश करेंगी, उन्हें उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
समारोह के दौरान नेतन्याहू ने मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया के कार्यकाल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया अभियानों में उल्लेखनीय सफलताएं हासिल हुई हैं। उनके अनुसार, यह अवधि मोसाद के इतिहास की सबसे प्रभावशाली अवधियों में से एक रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मोसाद में आपकी तीन दशकों की सेवा के लिए पूरा देश आपका आभारी है। विशेष रूप से पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं, जिन्होंने इजरायल की सुरक्षा को मजबूत किया।"
इस कार्यक्रम के साथ ही मोसाद में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू के सैन्य सचिव रहे मेजर जनरल Roman Gofman अब एजेंसी के नए प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में बढ़े सैन्य और राजनीतिक टकराव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है।
हालांकि ईरान की ओर से नेतन्याहू के दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन तेहरान पहले भी ऐसे बयानों को राजनीतिक प्रचार करार देता रहा है। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।