कुवैत सिटी
कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने देश की ओर आने वाले कई “शत्रुतापूर्ण” मिसाइल और ड्रोन हमलों को अपने वायु रक्षा तंत्र की मदद से सफलतापूर्वक रोक दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।
कुवैती सशस्त्र बलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि देश की वायु रक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय है और वह आने वाले मिसाइल तथा ड्रोन खतरों का मुकाबला कर रही है। हालांकि, सेना ने इन हमलों के पीछे किस देश या संगठन का हाथ है, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी।
सेना ने नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यदि किसी क्षेत्र में विस्फोटों की आवाज सुनाई देती है तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये आवाजें वायु रक्षा प्रणाली द्वारा शत्रुतापूर्ण हमलों को बीच रास्ते में नष्ट करने के दौरान उत्पन्न हो रही हैं।
इस बीच, पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। पड़ोसी देश बहरीन में भी एहतियात के तौर पर हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए। बहरीन के गृह मंत्रालय ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की घटनाएं सीमा पार सैन्य टकराव की आशंकाओं को और बढ़ा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। उसी घटनाक्रम के बाद कुवैत और बहरीन दोनों देशों ने अपनी रक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत कर दिया है।
इसी दौरान क्षेत्रीय तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में कई मानव रहित ड्रोन भेजे जाने की खबरें सामने आईं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने इन ड्रोन में से कम से कम चार को रास्ते में ही मार गिराया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये एकतरफा हमलावर ड्रोन या तो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों अथवा क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से भेजे गए थे।
सेंटकॉम ने कहा कि इन ड्रोन को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे किसी बड़े ढांचागत नुकसान की आशंका टल गई। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों की रक्षा के लिए आवश्यक थी।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक युद्धविराम की रूपरेखा मौजूद होने के बावजूद दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
कूटनीतिक स्तर पर संघर्ष समाप्त करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन हालिया मिसाइल और ड्रोन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र की स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी समय नया सैन्य टकराव व्यापक रूप ले सकता है।