तेल अवीव/गाजा।
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब गाजा पट्टी पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए ताजा मिसाइल हमलों के बाद इजरायली सरकार ने गाजा पट्टी की दो प्रमुख सीमा चौकियों—राफा और केरेम शालोम—को अनिश्चितकाल के लिए फिर से बंद कर दिया है। इस फैसले से पहले से ही गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे गाजा के लाखों निवासियों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।
इजरायल की ओर से रविवार देर रात जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सुरक्षा कारणों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। गाजा में नागरिक प्रशासन और आवाजाही की निगरानी करने वाली इजरायली एजेंसी ‘कोऑर्डिनेटर ऑफ गवर्नमेंट एक्टिविटीज इन द टेरिटरीज’ (COGAT) ने बताया कि ईरानी मिसाइल हमलों के बाद कई आपात सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं, जिनमें राफा और केरेम शालोम क्रॉसिंग को तत्काल प्रभाव से बंद करना भी शामिल है।
बयान में कहा गया, “ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमलों केa मद्देनजर सुरक्षा स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया गया है। इसी के तहत राफा और केरेम शालोम सीमा चौकियों को अगले आदेश तक बंद रखा जाएगा।”
राफा और केरेम शालोम गाजा पट्टी के लिए जीवनरेखा मानी जाती हैं। इन्हीं मार्गों से खाद्य सामग्री, दवाएं, ईंधन, चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक राहत सामग्री गाजा पहुंचती है। इन चौकियों के बंद होने से मानवीय सहायता की आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले के बाद इजरायली सेना ने गाजा पट्टी में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद लंबे समय तक गाजा की सीमाएं बंद रहीं, जिससे वहां खाद्य संकट, दवाओं की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पैदा हो गया। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कई बार चेतावनी दी है कि सीमाओं के बार-बार बंद होने से गाजा के नागरिकों की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
ताजा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब ईरान ने रविवार तड़के उत्तरी इजरायल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान की इस कार्रवाई को क्षेत्र में हाल ही में हुई सैन्य घटनाओं के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सीमा चौकियां लंबे समय तक बंद रहती हैं तो गाजा में पहले से मौजूद मानवीय संकट और गहरा सकता है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न राहत एजेंसियां लगातार इस बात पर जोर देती रही हैं कि संघर्ष की स्थिति में भी मानवीय सहायता के मार्ग खुले रहने चाहिए ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
फिलहाल गाजा के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीमा चौकियां कब दोबारा खोली जाएंगी और राहत सामग्री की आपूर्ति कब सामान्य हो पाएगी। वहीं, क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है।