नागपुर के बुजुर्ग बदल रहे मुस्लिम बच्चों का भविष्य

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 07-06-2026
Nagpur's Elders Are Changing the Future of Muslim Children
Nagpur's Elders Are Changing the Future of Muslim Children

 

गुलाम कादिर/ नागपुर (महाराष्ट्र)

नागपुर और आसपास के इलाकों में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है। पारा सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है। झुलसाने वाली इस गर्मी में जब आम लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, तब कुछ बुजुर्गों का हौसला देखने लायक है। नागपुर के कुछ मुस्लिम बुजुर्ग इस चिलचिलाती धूप में एक बेहद खास मिशन पर निकले हैं। वे लगातार गांवों और कस्बों का दौरा कर रहे हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य अपनी कौम के बच्चों को सही रास्ता दिखाना और उनका भविष्य संवारना है।

अभी मुसलमानों का प्रमुख त्योहार बकरीद बीते सिर्फ दो दिन ही हुए हैं। आमतौर पर त्योहार के बाद लोग थकान मिटाते हैं और मेहमाननवाजी में व्यस्त रहते हैं। लेकिन इन बुजुर्गों ने आराम को पीछे छोड़ दिया है। वे सीधे जमीन पर उतरकर मुस्लिम छात्र-छात्राओं की करियर काउंसलिंग कर रहे हैं। ये बुजुर्ग युवाओं को आईआईटी, जेईई और नीट जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वे इन बच्चों के लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था भी कर रहे हैं।

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गांवों तक पहुंची नागपुर सेवा टीम की गूंज

यह अक्सर देखा जाता है कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद बच्चे असमंजस में पड़ जाते हैं। उनका कोई निश्चित लक्ष्य नहीं होता। वे यह तय नहीं कर पाते कि कौन सा विषय चुनें और किस करियर विकल्प की तरफ आगे बढ़ें।

इस नाजुक मोड़ पर बच्चों को सही मार्गदर्शन और काउंसिलिंग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए 'नागपुर सेवा टीम' दिन-रात काम कर रही है। जैसे ही बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट आते हैं, यह टीम पूरी तरह एक्टिव हो जाती है। टीम के सदस्य अलग-अलग इलाकों में जाकर गाइडेंस सेंटर तैयार करते हैं।

अब इस मुहिम का बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखने लगा है। नागपुर के आसपास के देहाती इलाकों से बच्चों और उनके माता-पिता के फोन लगातार आ रहे हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए शनिवार 30मई 2026को टीम ने नागपुर के पास स्थित बोखारा और चक्की खाप जैसे ग्रामीण इलाकों का दौरा किया।

वहां पहुंचकर टीम ने जरूरतमंद और गरीब बच्चों की काउंसलिंग की। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) से रिटायर्ड अधिकारी गुलाम कादिर इस पूरी मुहिम में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वे खुद तपती गर्मी में बच्चों के बीच बैठते हैं और उनकी उलझनों को दूर करते हैं।

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होनहार छात्र-छात्राओं का सम्मान और हौसला अफजाई

इस नेक मुहिम को और मजबूती देने के लिए रविवार 31 मई 2026 को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अलनूर एकेडमी नागपुर और शाहीन एकेडमी बीदर के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य सम्मान समारोह रखा गया। इस समारोह में उन होनहार छात्र-छात्राओं का इस्तकबाल किया गया जिन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 75प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल किए हैं।

समारोह के दौरान प्रतिभावान बच्चों को मोमेंटो और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद बुजुर्गों ने बच्चों की पीठ थपथपाई। उन्होंने बच्चों को उनकी मनपसंद फील्ड में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाना और उनका आत्मविश्वास बढ़ाना था। बुजुर्ग चाहते हैं कि ग्रामीण और पिछड़े वर्ग के बच्चे भी बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करें।

बीदर की अनुभवी फैकल्टी नागपुर में देगी मुफ्त कोचिंग

गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए अलनूर एकेडमी और शाहीन एकेडमी ने एक बड़ा समझौता किया है। नागपुर में आगामी 8जून से जेईई (JEE), नीट (NEET) और सीए (CA) जैसे बड़े और प्रतिष्ठित कोर्सेज के लिए स्पेशल कोचिंग क्लासेस शुरू होने जा रही हैं।

इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इन बच्चों को शिक्षा देने के लिए कर्नाटक के बीदर से बेहद अनुभवी और तजुर्बेकार फैकल्टी को नागपुर बुलाया गया है। यह उन छात्र-छात्राओं के लिए एक सुनहरा मौका है जो बेहद प्रतिभाशाली हैं लेकिन आर्थिक तंगी या गरीबी के कारण महंगी कोचिंग फीस का खर्च नहीं उठा सकते।

नागपुर के स्थानीय लोग बुजुर्गों की इस चिंता, दूरदर्शिता और कोशिश की जमकर सराहना कर रहे हैं। हर कोई दिल से दुआ कर रहा है कि अलनूर एकेडमी के जिम्मेदार लोगों की यह समाज सुधारक मेहनत रंग लाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नागपुर और उसके आसपास के गांवों के बच्चे इस बेहतरीन मौके का पूरा फायदा उठाएंगे।

वे भविष्य में पढ़-लिखकर अच्छे प्रशासनिक और तकनीकी पदों पर पहुंचेंगे। इससे उनके परिवार, समाज और पूरे देश का नाम रोशन होगा। बुजुर्गों की यह समर्पित टोली आज के इस दौर में नई नस्ल के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है।