तेहरान
एक नया कूटनीतिक विवाद सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कुवैत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने फारस की खाड़ी में एक ईरानी नाव पर हमला किया और चार ईरानी नागरिकों को हिरासत में ले लिया। अराघची ने इस कार्रवाई को “गैरकानूनी” बताते हुए तुरंत रिहाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि ईरान जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में अराघची ने कुवैत की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कदम क्षेत्र में तनाव और मतभेद पैदा करने की कोशिश जैसा लगता है। उनके मुताबिक, ईरानी नाव पर हमला उस इलाके के पास हुआ, जिसका इस्तेमाल हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए किया था।
अराघची ने अपने बयान में कहा, “कुवैत ने फारस की खाड़ी में एक ईरानी नाव पर अवैध हमला किया और हमारे चार नागरिकों को हिरासत में लिया है। हम अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई की मांग करते हैं और जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।”
यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया पहले से ही भारी तनाव के दौर से गुजर रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच हाल के संघर्ष के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि हालिया जंग के दौरान कुवैत की जमीन का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए किया गया। सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हमलों के लिए कुवैत स्थित ठिकानों का सहारा लिया था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।
ईरान की ओर से पहले भी यह मांग उठती रही है कि खाड़ी देशों को अपने यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की भूमिका पर पुनर्विचार करना चाहिए। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कुवैत को सलाह दी है कि अगर वह भविष्य में किसी जवाबी कार्रवाई से बचना चाहता है, तो उसे अपने यहां से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम करनी चाहिए।
हालांकि, कुवैत की ओर से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो नाव पर हमले के आरोपों की पुष्टि हुई है और न ही चार ईरानी नागरिकों की हिरासत को लेकर कोई बयान जारी किया गया है।
इसी बीच क्षेत्रीय राजनीति में एक और घटनाक्रम ने हलचल बढ़ा दी है। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था। हालांकि यूएई ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
दूसरी ओर, यमन ने इस तनावपूर्ण माहौल में खुलकर ईरान का समर्थन किया है। यमन के उप विदेश मंत्री ने अपने ईरानी समकक्ष को लिखे पत्र में ईरान के प्रति “पूर्ण एकजुटता” जताई है। पत्र में चेतावनी दी गई कि यदि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया गंभीर संकट में घिर सकती है।
यमन ने इस दौरान इस्लामी देशों से भी अपील की कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य आक्रामकता का विरोध करें। साथ ही ईरानी जनता की एकजुटता और धैर्य की भी सराहना की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत और ईरान के बीच यह नया विवाद खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकता है। पहले से तनाव झेल रहे पश्चिम एशिया में यदि इस मुद्दे पर टकराव बढ़ता है, तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल निगाहें कुवैत की प्रतिक्रिया और आने वाले कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं। क्योंकि इस पूरे मामले ने खाड़ी क्षेत्र में एक नई बहस और चिंता को जन्म दे दिया है।