नई दिल्ली।
भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया। यह प्रक्रिया वर्ष 1992 से लगातार जारी है और दोनों देशों के बीच भरोसा कायम रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण औपचारिक कदम मानी जाती है। यह आदान-प्रदान ऐसे समय में हुआ है, जब पिछले वर्ष मई में चार दिनों तक चले सैन्य टकराव के बाद भारत–पाकिस्तान संबंधों में तनाव बना हुआ है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह सूची ‘परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की रोकथाम’ से जुड़े समझौते के प्रावधानों के तहत साझा की गई। नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक माध्यमों से एक साथ यह आदान-प्रदान किया गया। संबंधित समझौते पर 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षर हुए थे और यह 27 जनवरी 1991 से लागू हुआ। इसके तहत हर साल एक जनवरी को दोनों देश एक-दूसरे को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी देते हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का लगातार 35वां आदान-प्रदान है। पहली बार यह प्रक्रिया एक जनवरी 1992 को शुरू हुई थी। मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के बीच परमाणु सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और निरंतर चली आ रही व्यवस्था बताया।
इसी के साथ दोनों देशों ने एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद कैदियों की सूची भी साझा की। भारत ने पाकिस्तान से अपील की है कि वह अपनी सजा पूरी कर चुके 167 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई और स्वदेश वापसी में तेजी लाए। इसके अलावा, भारत ने उन 35 कैदियों और मछुआरों को तत्काल राजनयिक पहुंच देने का भी अनुरोध किया है, जिनके भारतीय होने का विश्वास है।
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि भारत ने अपनी हिरासत में मौजूद 391 पाकिस्तानी नागरिक कैदियों और 33 पाकिस्तानी मछुआरों का विवरण पाकिस्तान के साथ साझा किया है। वहीं पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में मौजूद 58 भारतीय नागरिक कैदियों और 199 भारतीय मछुआरों की सूची भारत को सौंपी है।
मंत्रालय ने पाकिस्तान से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि सभी भारतीय और भारतीय माने जाने वाले कैदियों व मछुआरों की रिहाई और स्वदेश वापसी तक उनकी सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण का पूरा ध्यान रखा जाए। मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार के निरंतर प्रयासों के चलते वर्ष 2014 से अब तक पाकिस्तान से 2,661 भारतीय मछुआरों और 71 भारतीय नागरिक कैदियों को स्वदेश वापस लाया जा चुका है।
गौरतलब है कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के चलते दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ी थी। ऐसे माहौल में परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का यह वार्षिक आदान-प्रदान संवाद और स्थिरता बनाए रखने की एक अहम औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा है।






.png)