UNHRC में पाकिस्तान में बाल विवाह पर चिंता

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 28-09-2026
HRFP President raises alarm over child, forced marriages in Pakistan at UN rights council
HRFP President raises alarm over child, forced marriages in Pakistan at UN rights council

 

जिनेवा [स्विट्जरलैंड]
 
सोमवार को जारी HRFP की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान, 'ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान' (HRFP) के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने पाकिस्तान में बाल विवाह और जबरन विवाह पर चिंता जताई और बाल विवाह कानूनों को और मज़बूती से लागू करने की मांग की। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अपने संबोधन में वाल्टर ने हाल की उन विधायी प्रक्रियाओं का ज़िक्र किया जिनके तहत लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है, साथ ही 'पंजाब बाल विवाह रोकथाम अधिनियम, 2026' का भी उल्लेख किया।
 
वाल्टर ने कहा, "पाकिस्तान ने कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।" "लेकिन अब इन कानूनों की परीक्षा हो रही है, क्योंकि धार्मिक दलों ने इन्हें इस आधार पर चुनौती दी है कि ये पवित्र कुरान और सुन्नत के खिलाफ हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इन कानूनों को लगातार लागू किया जाता है और क्या अदालतें और सरकारी संस्थान हर बच्चे की सुरक्षा करते हैं।"
 
विज्ञप्ति के अनुसार, वाल्टर ने 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी से जुड़ी कानूनी अनिश्चितता पर चिंता जताई, जिसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जहाँ बाल विवाह से जुड़े कानूनी सुरक्षा उपाय व्यक्तिगत या धार्मिक कानूनों की व्याख्याओं के साथ टकराव की स्थिति में आ जाते हैं। उन्होंने हाल के न्यायिक घटनाक्रमों पर प्रकाश डाला जिनमें अदालतों ने अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए हैं, खासकर लड़की की उम्र तय करने से जुड़े मामलों में, जहाँ उम्र के आधिकारिक दस्तावेज़ों और NADRA रिकॉर्ड ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने ऐसे मामलों पर भी चर्चा की जिनमें जजों ने शरिया सिद्धांतों और पारंपरिक इस्लामी कानूनी सोच के आधार पर यौवन (puberty) को परिभाषित किया है।
 
"जिस चीज़ का दस्तावेज़ीकरण नहीं है, उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता" - वाल्टर ने धार्मिक-अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई, जिनमें अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह के आरोप शामिल हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि हर आरोप की उचित प्रक्रिया के ज़रिए जांच होनी चाहिए और बच्चे का सर्वोत्तम हित, सुरक्षा और मौलिक अधिकार सबसे ऊपर होने चाहिए।
 
HRFP की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूनिसेफ का कहना है कि पाकिस्तान में दुनिया में बाल-वधू (कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों) की सबसे बड़ी आबादी में से एक है, जहाँ लाखों महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र तक पहुँचने से पहले ही हो गई है।
वाल्टर ने तर्क दिया कि मीडिया में आने वाले या अदालतों तक पहुँचने वाले मामलों की संख्या को समस्या के वास्तविक पैमाने के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। “कानून तो पहले से ही मौजूद थे; बस उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया। अब चुनौती उन्हें लागू करने की है।”
 
वॉल्टर ने मांग की कि पाकिस्तान में बाल विवाह से जुड़े कानूनों को संबंधित अदालती कार्यवाही में और मज़बूती से लागू किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे शादी के रजिस्ट्रेशन से पहले CNIC, B-फॉर्म और NADRA रिकॉर्ड के ज़रिए उम्र की अनिवार्य जांच शुरू करें; हर साल देश भर में कानून लागू करने से जुड़े आंकड़े जारी करें, जिनमें शिकायतें, FIR, मुक़दमे और सज़ा के मामले शामिल हों; और संबंधित पर्सनल और पारिवारिक कानूनों में तालमेल बिठाएं ताकि ज़बरदस्ती शादी का शिकार हुए बच्चों को असरदार कानूनी उपाय और सुरक्षा मिल सके।
 
उन्होंने UN मानवाधिकार परिषद और उसके सदस्य देशों से भी आग्रह किया कि वे पाकिस्तान की मानवाधिकार समीक्षा प्रक्रियाओं के दौरान इन मुद्दों को उठाएं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के सामने एक खास सवाल रखने को कहा: “आप अपनी अदालतों में ‘यौवन’ (puberty) और ‘अठारह साल की उम्र’ के बीच के टकराव को कैसे सुलझाएंगे?” HRFP ने GSP+ समेत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और व्यापार से जुड़ी समीक्षा प्रणालियों के ज़रिए बाल विवाह रोकने वाले कानूनों के अमल की बेहतर निगरानी की भी वकालत की। इसके लिए उन्होंने मापने योग्य पैमानों का सुझाव दिया, जैसे कि रजिस्ट्रेशन से रोकी गई शादियां, शुरू किए गए मुक़दमे और सज़ा दिलाने में मिली कामयाबी।
 
अपनी बात खत्म करते हुए वॉल्टर ने कहा, “पाकिस्तान के लिखित कानूनों को अब अदालतों, संबंधित विभागों और इस तरह के मंचों पर बचाव करने वालों की ज़रूरत है।” उन्होंने बच्चों और कमज़ोर समुदायों के अधिकारों के उल्लंघन को रिकॉर्ड करने और उनकी असरदार सुरक्षा की वकालत करने के लिए HRFP के संकल्प को दोहराया और कहा, “ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (HRFP) उल्लंघन के मामलों को रिकॉर्ड करता रहेगा। हम आपसे भी सवाल पूछते रहने का आग्रह करते हैं।”
 
HRFP की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (GHRD) के एक साइड इवेंट के दौरान स्पेशल रैपोर्टियर ऐ किहारा-हंट, वर्किंग ग्रुप की सदस्य हैना लू, UN टीम कोऑर्डिनेटर एलेजांद्रा मार्टिनेज और अन्य लोगों ने भी अपनी बात रखी।