बलूचिस्तान [पाकिस्तान]
'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान के तुरबत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर बलूच यूनिवर्सिटी के एक छात्र को उठा लिया है और उसे किसी अज्ञात जगह पर भेज दिया है। इस घटना से इस क्षेत्र में 'ज़बरन गायब किए जाने' (enforced disappearances) की घटनाओं को लेकर नई चिंताएँ पैदा हो गई हैं। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के मुताबिक, छात्र की पहचान मुमताज़ बलूच के तौर पर हुई है। वह बलूचिस्तान यूनिवर्सिटी के बलूची विभाग में पाँचवें सेमेस्टर का छात्र था। उसके परिवार का दावा है कि उसे ईद की तीसरी रात को अप्सर के कोलवाही बाज़ार से हिरासत में लिया गया था। तब से लेकर अब तक उसका कोई अता-पता नहीं है; अधिकारियों ने न तो उसे हिरासत में लिए जाने का कोई कारण बताया है और न ही उसकी हालत के बारे में कोई जानकारी दी है।
जानकारी न मिलने से परिवार ने गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की है और इस स्थिति को बेहद परेशान करने वाला और अन्यायपूर्ण बताया है। इस मामले को 'वॉइस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स' (VBMP) ने उठाया है। संगठन ने सरकारी अधिकारियों से मुमताज़ की तत्काल और सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है। यह संगठन लंबे समय से बलूचिस्तान में 'ज़बरन गायब किए जाने' के मामलों को दस्तावेज़ों के रूप में दर्ज करता आ रहा है और कथित मानवाधिकार हनन के मामलों को लगातार उजागर करता रहता है।
इस बीच, क्वेटा में VBMP का विरोध प्रदर्शन शिविर लगातार जारी है। आज इस विरोध प्रदर्शन का 6,115वाँ दिन है और यह ऐसी घटनाओं के खिलाफ लगातार जारी संघर्ष का प्रतीक बन गया है। लापता लोगों के परिवार, कार्यकर्ता और समर्थक इस शिविर में एकजुटता दिखाने और जवाबदेही की मांग करने के लिए इकट्ठा होते हैं। VBMP के अधिकारियों के अनुसार, ये लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन इस समस्या की 'प्रणालीगत प्रकृति' (systemic nature) को उजागर करते हैं, जैसा कि 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने भी बताया है।
VBMP के सूचना सचिव गुलाम फारूक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पीड़ित परिवारों के लिए दस्तावेज़ी सबूतों के साथ आगे आना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक परिवार सक्रिय रूप से इसमें हिस्सा नहीं लेंगे, तब तक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों ही मंचों पर 'ज़बरन गायब किए जाने' के मामलों को औपचारिक रूप से दर्ज कराना मुश्किल होगा। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों से भी अपील की है कि वे दस्तावेज़ीकरण के प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करें और पीड़ित परिवारों की आवाज़ को बुलंद करें।