वॉशिंगटन/इस्लामाबाद
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ युद्धविराम (सीजफायर) की अवधि बढ़ाई जा रही है, ताकि तेहरान की ओर से एक संयुक्त प्रस्ताव का इंतजार किया जा सके।
हालांकि, इस फैसले के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास और टकराव की स्थिति बनी हुई है। दो सप्ताह का यह युद्धविराम बुधवार को समाप्त होने वाला था, लेकिन अंतिम समय में बातचीत की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं। व्हाइट हाउस ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस्लामाबाद यात्रा को भी फिलहाल रोक दिया है, क्योंकि ईरान ने आगे की वार्ता में शामिल होने को लेकर हिचक दिखाई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि अमेरिका अभी भी ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि समझौता नहीं होता है, तो हालात फिर से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। इससे पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि समयसीमा तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो “बड़े पैमाने पर बमबारी” हो सकती है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उसके पास “मैदान में नए विकल्प” हैं, जिन्हें अभी उजागर नहीं किया गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ कमांडर ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध फिर शुरू हुआ, तो पूरे मध्य-पूर्व के तेल उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय देश अमेरिका को अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने देंगे, तो उन्हें तेल उत्पादन को अलविदा कहना पड़ सकता है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। ईरान ने इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण मजबूत कर रखा है, जिसके कारण वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो फरवरी के अंत की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
ईरान ने संकेत दिया है कि वह तब तक वार्ता में शामिल नहीं होगा जब तक अमेरिका उसकी नाकेबंदी खत्म नहीं करता। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि यदि यह शर्त पूरी होती है, तो बातचीत का अगला दौर संभव हो सकता है।
पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य अधिकारियों ने देर रात तक दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की।
फिलहाल, स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक तरफ युद्धविराम बढ़ाया गया है, तो दूसरी ओर दोनों देशों की कड़ी बयानबाजी और सैन्य तैयारियां यह संकेत दे रही हैं कि अगर बातचीत विफल होती है, तो क्षेत्र में बड़ा संघर्ष भड़क सकता है।