बीएनपी सांसदों ने ली शपथ, सुधार परिषद पर रखा स्पष्ट रुख

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-02-2026
BNP MPs take oath, clear stand on reform council
BNP MPs take oath, clear stand on reform council

 

ढाका

13वें राष्ट्रीय संसद चुनाव के पहले चरण में निर्वाचित सांसदों ने मंगलवार को शपथ ग्रहण कर लिया। शपथ समारोह सुबह 11:45 बजे बांग्लादेश राष्ट्रीय संसद सचिवालय के शपथ कक्ष में आयोजित हुआ, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने नव निर्वाचित सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

चुनाव आयोग के अनुसार 12 फरवरी को हुए चुनाव में 300 में से 299 सीटों पर मतदान हुआ था। आयोग ने 297 सीटों के अनौपचारिक नतीजे घोषित किए, जिनमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 209 सीटों पर जीत दर्ज की। बीएनपी के सहयोगी दलों को 3 सीटें मिलीं। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतीं, जबकि उसके नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के अन्य सहयोगियों को 9 सीटें प्राप्त हुईं। इनमें एनसीपी को 6 और बांग्लादेश खिलाफत मजलिस को 2 सीटें मिलीं।

संवैधानिक सुधार परिषद पर असमंजस

शपथ ग्रहण के बाद बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए संवैधानिक सुधार परिषद के मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान संविधान में संवैधानिक सुधार परिषद का कोई प्रावधान शामिल नहीं है। यदि जनमत संग्रह के आधार पर ऐसी परिषद का गठन किया जाता है, तो पहले इसे संविधान में विधिवत जोड़ा जाना आवश्यक होगा।

उन्होंने बताया कि शपथ का प्रारूप संविधान की तीसरी अनुसूची में निर्धारित है और फिलहाल सांसद उसी के अनुसार शपथ ले रहे हैं। जब तक सुधार परिषद से संबंधित प्रावधान संविधान की अनुसूची में शामिल नहीं हो जाता और राष्ट्रीय सभा द्वारा संवैधानिक रूप से स्वीकृत नहीं हो जाता, तब तक उसके सदस्यों की शपथ का कोई कानूनी आधार नहीं बनेगा।

‘संविधान सर्वोपरि’—बीएनपी

सलाहुद्दीन अहमद ने दोहराया कि बीएनपी हमेशा संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करती आई है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

हालांकि सभी निर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्य के रूप में शपथ ले ली है, लेकिन तकनीकी और संवैधानिक विसंगतियों के चलते वे फिलहाल सुधार परिषद का हिस्सा बनने को तैयार नहीं हैं। बीएनपी का मानना है कि जब तक स्पष्ट और वैध कानूनी ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक इस प्रक्रिया में भाग लेना उचित नहीं होगा।