बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के प्रमुख डॉ. अल्लाह नजर बलोच ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तान की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि किसी भी राष्ट्र या समुदाय की स्वतंत्रता की आकांक्षाओं को बल प्रयोग और दमन के जरिए हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि पीओजेके में बढ़ता विरोध और असंतोष इस बात का प्रमाण है कि लोग अपने राजनीतिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. बलोच ने कहा कि कश्मीरियों का आंदोलन उनके मूल अधिकारों, आत्मनिर्णय और राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग को दर्शाता है। उनका आरोप है कि पाकिस्तान सरकार लंबे समय से असहमति की आवाजों को दबाने के लिए दमनकारी उपायों का सहारा लेती रही है, लेकिन इसके बावजूद जनता की लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कमजोर नहीं हुई है।
उन्होंने पाकिस्तान द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले “आज़ाद कश्मीर” के दावे पर भी सवाल उठाए। डॉ. बलोच के अनुसार, यह क्षेत्र केवल नाम मात्र का “आज़ाद” है, जबकि वास्तविक नियंत्रण इस्लामाबाद के हाथों में है। उनका कहना था कि पीओजेके से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय वहां की जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के बजाय पाकिस्तान की संघीय नौकरशाही और केंद्रीय संस्थाओं द्वारा लिए जाते हैं।
BLF प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की संघीय व्यवस्था का इस्तेमाल छोटे प्रांतों और राष्ट्रीयताओं पर पंजाब के प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए किया जाता है। उनके अनुसार, कश्मीर में प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ बल प्रयोग इस बात का संकेत है कि राज्य उन क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है, जहां लोग अधिक राजनीतिक अधिकार और स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।
डॉ. अल्लाह नजर बलोच ने कहा कि किसी भी राष्ट्र को अनिश्चित काल तक जबरन नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाहरी नियंत्रण और राजनीतिक वर्चस्व के खिलाफ प्रतिरोध करना उत्पीड़ित समुदायों का वैध अधिकार है। उनके मुताबिक, आत्मनिर्णय, संप्रभुता और स्वशासन की मांग करने वाले आंदोलनों को केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें राजनीतिक अधिकारों के संघर्ष के रूप में समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कश्मीरियों के अलावा पश्तूनों और सिंधियों के आंदोलनों के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की। डॉ. बलोच का कहना था कि इन समुदायों की राजनीतिक आकांक्षाओं और अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने दुनिया का ध्यान उन क्षेत्रों की ओर आकर्षित करने की अपील की, जहां लोग अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
BLF नेता ने अंत में कहा कि विभिन्न उत्पीड़ित समुदायों और राष्ट्रीयताओं को एक-दूसरे के संघर्षों का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने बलूच जनता को कश्मीरियों, पश्तूनों और सिंधियों का स्वाभाविक सहयोगी बताते हुए कहा कि ये सभी समुदाय राजनीतिक अधिकारों, सम्मान और आत्मनिर्णय की साझा लड़ाई लड़ रहे हैं।