वॉशिंगटन
अमेरिका ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत ईरानी बंदरगाहों और तटों पर लगाई गई सैन्य नाकाबंदी हटा ली है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने गुरुवार को जारी एक बयान में इसकी पुष्टि की।सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना अब ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के आवागमन में कोई बाधा नहीं डालेगी और सभी सैन्य नाकाबंदी समाप्त कर दी गई हैं।
यह कदम 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेशमर्गा द्वारा इस्लामाबाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद उठाया गया है। समझौते की प्रमुख शर्तों में से एक ईरानी बंदरगाहों और तटरेखा पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी को हटाना था, जिसे हस्ताक्षर के 24 घंटे के भीतर लागू कर दिया गया।
अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाई गई नाकाबंदी हटाने पर टिकी है। ईरान ने 28 फरवरी को इस महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पर प्रतिबंध लगाया था। उसी दिन अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच सैन्य अभियान शुरू किए थे।
रिपोर्टों के अनुसार, नाकाबंदी को मजबूत करने के लिए ईरान ने 167 किलोमीटर लंबे होर्मुज जलडमरूमध्य के विभिन्न हिस्सों में पानी के नीचे बारूदी सुरंगें भी बिछाई हैं। फिलहाल यह नाकाबंदी जारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार बहाल करना इस्लामाबाद समझौते की प्रमुख शर्तों में शामिल है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक नाकाबंदी हटाने या बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस ने उम्मीद जताई है कि ईरान जल्द ही इस दिशा में कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद लगातार दो रातों से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर कोई हमला नहीं हुआ है।
वैंस ने कहा, “अब तक ईरान अपने वादों का पालन करता दिख रहा है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले दो दिनों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 1.2 करोड़ बैरल तेल का परिवहन हुआ। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विश्लेषण कंपनी केपलर के अनुसार, बीते दो दिनों में तीन तेल टैंकर इस मार्ग से गुजरे, जिनमें कुल लगभग 60 लाख बैरल तेल था।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।