बिना महरम 43 महिलाओं की हज यात्रा: महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 23-04-2026
Hajj Pilgrimage of 43 Women Without a Mahram: A Historic Initiative for Women's Empowerment
Hajj Pilgrimage of 43 Women Without a Mahram: A Historic Initiative for Women's Empowerment

 

आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली 
 
दिल्ली से एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जहां कुल 43 महिलाएं बिना पुरुष साथी (महरम) के हज यात्रा के लिए रवाना हुईं। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है, बल्कि इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।
 
इन 43 महिलाओं में विभिन्न राज्यों की महिलाएं शामिल हैं। इनमें 12 महिलाएं दिल्ली से, 21 उत्तर प्रदेश से, तीन बिहार से, चार जम्मू-कश्मीर से तथा दो-दो महिलाएं मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से हैं। सभी महिलाएं दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 से सऊदी एयरलाइंस की सातवीं हज उड़ान के माध्यम से पवित्र शहर मदीना के लिए रवाना हुईं।
 
एयरपोर्ट पर दिल्ली स्टेट हज कमेटी की अध्यक्ष कौसर जहां, कार्यकारी अधिकारी अशफाक अहमद आरफी, उप कार्यकारी अधिकारी मोहसिन अली सहित अन्य अधिकारियों ने हज यात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने महिलाओं को फूलों से सम्मानित किया और उनके सुरक्षित एवं सफल यात्रा की शुभकामनाएं दीं।
 
इस अवसर पर कौसर जहां ने कहा कि यह पहल समाज में बदलाव का संकेत है और यह दिखाती है कि अब महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा की गई यह व्यवस्था उन महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें पहले बिना महरम हज यात्रा करने में कठिनाई होती थी। अब यह सुविधा उन्हें स्वतंत्र रूप से अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करने का अवसर प्रदान कर रही है।
 
उन्होंने आगे कहा कि बिना महरम के हज यात्रा पर जाना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की बढ़ती स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। यह कदम महिलाओं को यह संदेश देता है कि वे अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हैं और उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर मिल रहे हैं।
 
हज यात्रा की उड़ानें 18 अप्रैल से शुरू हुई थीं। अब तक कुल 2,721 यात्री हज के लिए मदीना रवाना हो चुके हैं। इनमें 1,423 पुरुष और 1,298 महिलाएं शामिल हैं। यह संख्या इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में लोग इस पवित्र यात्रा में भाग ले रहे हैं और धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है।
 
यह घटना न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह भारतीय समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और स्वतंत्रता को भी दर्शाती है। बिना पुरुष साथी के इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का हज यात्रा पर जाना आने वाले समय में अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करेगा कि वे अपने अधिकारों और अवसरों का उपयोग आत्मविश्वास के साथ करें।