मधुकर पांडेय, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुसलमानों और योगी सरकार का रिश्ता हमेशा बहस का विषय रहा है। चुनावी मंचों से लेकर सोशल मीडिया तक अक्सर यह धारणा दिखाई देती है कि राज्य की मौजूदा सरकार के दौर में मुस्लिम समाज खुद को सहज महसूस नहीं करता। कई मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी ने इस दूरी को और बढ़ाया है। मगर बीते दिनों राजधानी लखनऊ के लोकभवन में जो दृश्य सामने आया, उसने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब 500 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटे तो मंच से एक ऐसी बात कही जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा शुरू कर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी योग्य युवा को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। वह चाहे किसी भी समाज या धर्म से हो। उन्होंने मंच से मौजूद मुस्लिम युवतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज यहां कई मुस्लिम बेटियां भी नियुक्ति पत्र लेने आई हैं।
इस कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो में कुछ मुस्लिम युवतियां भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता की खुलकर तारीफ करती दिखाई दे रही हैं। यही वजह है कि यह कार्यक्रम अब सिर्फ एक सरकारी नियुक्ति समारोह नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।
लोकभवन में आयोजित इस कार्यक्रम में सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग और स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लिए चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। प्रदेश के अलग अलग जिलों से आए युवा अपने परिवारों के साथ समारोह में पहुंचे थे। कई युवाओं के चेहरे पर लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता की चमक साफ दिखाई दे रही थी।
इन 500 चयनित अभ्यर्थियों में पीलीभीत के वकार हुसैन अंसारी और लखनऊ की अना अली जैसे मुस्लिम युवा भी शामिल थे। जब इन युवाओं ने मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र लिया तो वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। बाद में मीडिया से बातचीत में कुछ मुस्लिम छात्राओं ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उन्हें किसी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक मुस्लिम छात्रा कहती दिखाई दे रही है कि योगी सरकार के दौर में भर्ती प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी हुई है। उसने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों को अब अवसर मिल रहे हैं। इसी तरह एक अन्य वीडियो में एक मुस्लिम युवती मुख्यमंत्री से नियुक्ति पत्र लेने के बाद मुस्कराते हुए नजर आती है। इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सरकारी नौकरियों को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। पिछली सरकारों के समय भी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और सिफारिश के आरोप लगते रहे। ऐसे माहौल में यदि अलग अलग समुदायों के युवा खुले मंच से प्रक्रिया की तारीफ करते हैं तो उसका असर व्यापक होता है।
कार्यक्रम में मौजूद कई अभ्यर्थियों ने सरकार की भर्ती नीति की सराहना की। झांसी की वंदना कुशवाहा और मयंक कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र लेना उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अब ज्यादा अवसर मिल रहे हैं और वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
लखनऊ की आयुषी त्रिपाठी ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा दिन है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रही और किसी तरह की सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ी। आयुषी ने कहा कि अगर छात्र मेहनत करें तो उन्हें सफलता जरूर मिल सकती है।
शाहजहांपुर की सुनेहा मिश्रा ने भी महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि इस बार बड़ी संख्या में महिलाओं का चयन हुआ है। यह दिखाता है कि लड़कियों को बराबरी का अवसर मिल रहा है। सुनेहा ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिलेगी, वह उसे पूरी ईमानदारी से निभाएंगी।
अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी सरल और पारदर्शी रही। उन्होंने मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का जिक्र करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगी है। कम शुल्क और बिना किसी दबाव के पूरी प्रक्रिया पूरी होना युवाओं के लिए राहत की बात है।
समारोह में जिन युवाओं को मुख्यमंत्री ने स्वयं नियुक्ति पत्र सौंपे उनमें सुल्तानपुर के राम कुमार चौरसिया, झांसी की वंदना कुशवाहा, आजमगढ़ के देवव्रत यादव और विवेक सिंह, लखनऊ की आयुषी त्रिपाठी, मऊ के सौरभ कुमार गोंड, शाहजहांपुर की सुनेहा मिश्रा, वाराणसी के राम कुमार गुप्ता और गोरखपुर की पूर्णिमा सिंह शामिल रहे।
इसी तरह स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लिए चयनित अभ्यर्थियों में पीलीभीत के वकार हुसैन अंसारी, सोनभद्र की प्रांशु सिंह, हमीरपुर के सुधीर यादव, झांसी की तनु प्रजापति, शाहजहांपुर के अमित कुमार, प्रयागराज की बबीता, अयोध्या के सुधीर कुमार शुक्ला, लखनऊ की अना अली, गोरखपुर के सर्वजीत सिंह कोहली और बलिया की श्वेता को मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिला।
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से यह मानता रहा है कि सरकारी व्यवस्था में उनके साथ बराबरी का व्यवहार नहीं होता। यही कारण है कि जब मुस्लिम युवाओं के चयन और उनकी सकारात्मक प्रतिक्रियाओं के वीडियो सामने आए तो उन्होंने लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक यह भी कहते हैं कि किसी एक कार्यक्रम से पूरी तस्वीर तय नहीं होती। राज्य में रोजगार, शिक्षा और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर बहस आगे भी जारी रहेगी।
इसके बावजूद यह भी सच है कि सरकारी नौकरी पाने वाले युवाओं के लिए धर्म से ज्यादा महत्वपूर्ण उनकी मेहनत और चयन की प्रक्रिया होती है। लोकभवन के इस कार्यक्रम ने कम से कम इतना जरूर दिखाया कि सरकारी मंच पर मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी और उनकी खुली प्रतिक्रिया अब चर्चा का हिस्सा बन चुकी है।
राजनीति अपनी जगह है। धारणाएं भी अपनी जगह हैं। लेकिन नौकरी का नियुक्ति पत्र हाथ में आने के बाद कई युवाओं की आंखों में जो भरोसा दिखाई दिया, उसने इस बहस को नया आयाम जरूर दे दिया है।