मुहम्मद ओवैस/ मुंबई
मीरा रोड में 'वॉक फॉर पीस' का एहतेमाम किया गया। समाज से नफ़रत को खत्म करने और अमन व भाईचारे का पैग़ाम देने के लिए मशहूर स्कॉलर और समाजी कार्यकर्ताओं ने मिलकर पीस रैली का आयोजन किया। जिसमें मुख्तलिफ़ मज़ाहिब की मज़हबी शख्सियात ने शिरकत की।
इस रैली में मुंबई की कई मज़हबी शख्सियात जैसे बॉम्बे कैथोलिक सभा के अध्यक्ष डोल्फ़ी डिसूज़ा, फ़ादर माइकल, फ़ादर गिल्बर्ट, इस्कॉन मिशन के तपोवन हरीक, जीवन दास, मौलाना फ़याज़ बाक़री, म्यूनिसिपल कॉरपोरेटर एडवोकेट सना देशमुख, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मीरा-भायंदर अध्यक्ष संदीप राणे, वंचित बहुजन आघाड़ी के इकबाल महाडिक, एनसीपी मीरा-भायंदर के ग़ुलाम नबी फ़ारूक़ी, पूर्व म्यूनिसिपल कॉरपोरेटर मैरीलीन डिसूज़ा, जमात-ए-इस्लामी मीरा रोड के अध्यक्ष डॉक्टर तारिक़ शाह और दीगर तंज़ीमों के ज़िम्मेदार शरीक थे।
यह रैली मीरा रोड के सूर्या शॉपिंग सेंटर, सृष्टि कॉम्प्लेक्स से शुरू होकर पूनम क्लस्टर हाउसिंग सोसाइटी, सेंट ज़ेवियर्स, सिंगापुर प्लाज़ा से होते हुए मीरा रोड रेलवे स्टेशन के सामने शहीद कौस्तुभ राणे की यादगार पर खत्म हुई।
लोगों ने 'भाईचारा ज़िंदाबाद', 'हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई-भाई', 'क़ौमी एकता ज़िंदाबाद' और 'हम सब एक हैं' जैसे नारे लगाए।
रैली के आयोजक सादिक बाषा ने हमें बताया कि "यह रैली 'मीरा भायंदर फॉर पीस' के बैनर तले आयोजित की गई है, जिसमें शहर के सभी सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक संगठन और सभी तरह के धर्मों के धर्मगुरु व कार्यकर्ता मौजूद हैं।"
उन्होंने आगे बताया कि, "शहर में अमन-ओ-अमान और फ़िरक़ावाराना हमआहंगी के फ़रोग़ के लिए ये एक बड़ी शहरी पहल का आगाज़ है। हालिया बरसों में बिरादरियों के दरम्यान एतेमाद को ठेस पहुंची है। शहर में कई सारे नफरती संगठनों के लोगों ने नफरत फैलाने की और मुख्तलिफ धर्म व समाजों के लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश की है। पूरे शहर में कई तरह के वाक्यात भी हुए, तरह-तरह से शहर का माहौल खराब करने की कोशिश की गई। इन्हीं सब चीजों को मद्देनजर रखते हुए इस वॉक का आयोजन किया गया है।"
वॉक फॉर पीस के एक अन्य आयोजक समीर वागले ने बताया कि, "इसका मकसद एक मजबूत और अमन पसंद शहर बनाना है, जहां हर शहरी एक दूसरे की इज्जत करे और सभी धर्म के लोग आपस में मोहब्बत और भाईचारे से पेश आएं, ना कि नफरत फैलाने वालों के चंगुल में फंसें।"
रैली में आए हुए ईसाई समुदाय के धर्मगुरु फादर गिल्बर्ट ने अपना तजुर्बा बताते हुए कहा कि, "मैं इस रैली का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूं, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग शांति के लिए एक साथ मार्च कर रहे हैं। मेरा मानना है कि शांति आज की सबसे बड़ी जरूरत है—ना सिर्फ हिंदुस्तान में, बल्कि पूरी दुनिया में। एक ऐसी शांति जहां हम भाईचारा, प्यार, दोस्ती और सद्भावना के पैग़ाम को आम करें।”
वहीं एक हिंदू धर्मगुरु ने कहा कि, "सब को मुहब्बत और इज्ज़त के साथ जीने का हक़ है। किसी को ये नहीं कहा जा सकता कि ये खाएं और ये ना खाएं, या फिर ये त्यौहार ऐसे मनाएं। बल्कि हर किसी को हक़ है कि वह पूरे डिसिप्लिन के साथ सबका खयाल रखते हुए हर त्यौहार मिलकर मनाए और सब तरफ़ मुहब्बत बांटे।" उन्होंने ये भी कहा कि "ये रैली अमन और शांति की तरफ़ एक अच्छा क़दम है।"
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रैली में बड़ी तादाद में शहर के सभी धर्मों के लोग, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता, बच्चे, बुज़ुर्ग, युवा, छात्र, महिलाएं वगैरह शामिल रहे। सबने अमन, क़ौमी एकता और भाईचारे पर तरह-तरह की नज़्में और नगमे गाए। कुछ लोगों के हाथ में फूलों के गुलदस्ते दिखाई दिए, तो कई लोग हाथों में बैनर और पोस्टर्स थामे हुए थे जिन पर अलग-अलग भाईचारे के नारे लिखे हुए थे। आखिर में मीरा रोड रेल्वे स्टेशन पर आयोजकों के छोटे से संबोधन और शुक्रिया के साथ 'वॉक फॉर पीस' रैली पुरी हुई।