‘छोकरा मंडी’ और ‘बच्चाबाजी’ को लेकर पाकिस्तान में घमासान

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 09-10-2026
Uproar in Pakistan over ‘Chhokra Mandi’ and ‘Bachchabazi’
Uproar in Pakistan over ‘Chhokra Mandi’ and ‘Bachchabazi’

 

मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह में  ‘छोकरा मंडी’ को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। बन्नू के मंडन पार्क से जुड़े कुछ वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि यहां कम उम्र के लड़कों की कथित खरीद फरोख्त होती है और उन्हें यौन शोषण का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसी वजह से इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं दिखाई दे रही हैं। एक पक्ष इसे गंभीर सामाजिक समस्या बता रहा है। दूसरा पक्ष इसे गलत सूचना और स्थानीय संस्कृति की गलत तस्वीर पेश करने वाला दावा बता रहा है।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इस विवाद को लेकर पाकिस्तान की महिलाएं और सोशल मीडिया यूजर्स उन धार्मिक नेताओं से सवाल कर रहे हैं जो महिलाओं के पहनावे और सार्वजनिक गतिविधियों पर अक्सर टिप्पणी करते हैं। वायरल वीडियो में सवाल उठाया जा रहा है कि यदि महिलाओं के सार्वजनिक जीवन को लेकर धार्मिक और सामाजिक आपत्तियां दर्ज की जाती हैं तो नाबालिगों के कथित शोषण जैसे गंभीर आरोपों पर भी उसी तरह खुलकर बात क्यों नहीं होती।

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बन्नू के मंडन पार्क से जुड़ा दावा

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में महिला व्लॉगर आरजू सेज ने बन्नू के मंडन पार्क में कथित ‘छोकरा मंडी’ को लेकर सवाल उठाया है। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वाह के बन्नू में कम उम्र के लड़कों की खरीद फरोख्त खुलेआम हो रही है और धार्मिक मामलों पर मुखर रहने वाले लोग इस मुद्दे पर चुप हैं। यह दावा सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के आधार पर सामने आया है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं है।  

वीडियो में यह भी कहा गया है कि मंडन पार्क के पास महिलाओं के लिए बनाया गया एक पार्क कथित तौर पर धार्मिक आपत्तियों के बाद बंद करा दिया गया था। वीडियो में एक महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का उदाहरण भी दिया गया है। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है। इसलिए इन्हें आरोप और सोशल मीडिया पर किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।  

इस वीडियो को एक अन्य एक्स अकाउंट से भी साझा किया गया। पोस्ट में पाकिस्तान में कथित ‘लड़कों के बाजार’ का उल्लेख किया गया। पोस्ट के साथ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया जिसने इस मुद्दे को और अधिक विवादित बना दिया। इसके बाद वीडियो पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आने लगीं।  

‘बाचा बाजी’ का भी जिक्र

वायरल सामग्री में पाकिस्तान के कुछ इलाकों में ‘बाचा बाजी’ की समस्या का भी उल्लेख किया गया है। इस शब्द का इस्तेमाल ऐतिहासिक और समकालीन संदर्भों में कम उम्र के लड़कों के यौन शोषण से जुड़ी प्रथा के लिए किया जाता है। उपलब्ध सामग्री में दावा किया गया है कि बन्नू के अलावा खैबर पख्तूनख्वाह के कुछ अन्य इलाकों में भी ऐसी गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सामग्री में कहा गया है कि बन्नू, झोब, स्वाबी, डेरा इस्माइल खान, करक और लक्की मरवत जैसे इलाकों में ऐसी कथित गतिविधियों की शिकायतें सामने आई हैं। मार्च 2026 में सामाजिक कार्यकर्ता हयात परीगल द्वारा इस तरह की कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। Pasted markdown

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठता है। क्या मंडन पार्क में वास्तव में किसी संगठित ‘छोकरा मंडी’ का संचालन हो रहा है या सोशल मीडिया पर सामान्य सार्वजनिक दृश्य को एक अलग संदर्भ में पेश किया जा रहा है? उपलब्ध सामग्री में इस सवाल का कोई आधिकारिक उत्तर नहीं मिलता।

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सोशल मीडिया पर दो बिल्कुल अलग दावे

इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सोशल मीडिया पर सामने आने वाली विरोधाभासी प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ यूजर्स वायरल वीडियो को गंभीर आरोपों का प्रमाण मान रहे हैं। वहीं कुछ पाकिस्तानी यूजर्स साफ तौर पर कह रहे हैं कि बन्नू में ऐसी कोई ‘छोकरा मंडी’ नहीं है।

एक यूजर ने लिखा कि बन्नू के लोगों के पहनावे और सार्वजनिक जीवन की तस्वीरों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उसी प्रतिक्रिया में ‘बाचा बाजी’ की समस्या के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए यह दावा किया गया कि इसका मतलब यह नहीं है कि बन्नू में कोई संगठित ‘छोकरा मंडी’ या बाजार चल रहा है।

बन्नू के एक अन्य यूजर ने भी वायरल दावे पर सवाल उठाया। उसने कहा कि वह बन्नू का रहने वाला है और उसने ऐसी किसी मंडी को नहीं देखा। उसके अनुसार बन्नू में लोग शाम के समय पार्क या दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर जाते हैं और तैयार होकर मिलते हैं। उसके मुताबिक केवल लड़कों को एक वीडियो में दिखाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वे बिक्री के लिए मौजूद हैं।  

एक अन्य प्रतिक्रिया में वायरल वीडियो को प्रचार और गलत सूचना बताया गया। कुछ लोगों ने सवाल किया कि केवल वीडियो के आधार पर इतने गंभीर आरोपों को सच कैसे माना जा सकता है। एक यूजर ने सीधे पूछा कि इस दावे के समर्थन में सबूत कहां हैं।  

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सोशल मीडिया पर तीखी बहस

वायरल वीडियो के नीचे टिप्पणियों की बाढ़ आ गई है। कुछ लोगों ने इसे बेहद चिंताजनक बताया। कुछ ने पार्क को बंद करने की मांग की। कई लोगों ने धार्मिक नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाया। दूसरी तरफ बड़ी संख्या में यूजर्स ने वीडियो को झूठा बताया और इसे बन्नू तथा वहां के लोगों को बदनाम करने की कोशिश कहा।

बहस के दौरान कई टिप्पणियां बेहद आपत्तिजनक और अश्लील भाषा में भी की गईं। कुछ प्रतिक्रियाओं में धार्मिक समुदायों और देशों को लेकर भी विवादित टिप्पणियां की गईं। इस तरह की प्रतिक्रियाएं मूल मुद्दे से ध्यान हटाती हैं। नाबालिगों की सुरक्षा और संभावित यौन शोषण जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा करते समय तथ्य और प्रमाण सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

कुछ पाकिस्तानी यूजर्स ने खास तौर पर लोगों से सोशल मीडिया पर गलत खबर नहीं फैलाने की अपील की। कई लोगों ने कहा कि एक वीडियो के आधार पर किसी पूरे शहर या समुदाय के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।  

महिलाओं के सवाल ने भी खींचा ध्यान

इस पूरे विवाद में महिलाओं की ओर से उठाए गए सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। वायरल वीडियो में यह सवाल सामने रखा गया है कि पाकिस्तान में महिलाओं के पहनावे, सार्वजनिक स्थानों पर उनकी मौजूदगी और काम करने को लेकर अक्सर धार्मिक बहस होती है। लेकिन यदि कम उम्र के बच्चों के कथित यौन शोषण के आरोप सामने आते हैं तो उन पर उतनी ही गंभीरता से चर्चा क्यों नहीं होती।

यह सवाल सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दोहराया है। हालांकि, इससे किसी विशेष धार्मिक नेता या संस्था पर आरोप स्वतः साबित नहीं हो जाता। यह सोशल मीडिया बहस का हिस्सा है और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

क्या सच है और क्या दावा?

इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यही है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और आधिकारिक तौर पर प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर किया जाए। उपलब्ध सामग्री में बन्नू के मंडन पार्क में कथित ‘छोकरा मंडी’ को लेकर कई गंभीर आरोप हैं। लेकिन साथ ही ऐसे लोगों की प्रतिक्रियाएं भी हैं जो इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं।  

अभी उपलब्ध सामग्री में पाकिस्तान सरकार, खैबर पख्तूनख्वाह प्रशासन या बन्नू के स्थानीय प्रशासन की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान मौजूद नहीं है जो इस विशेष ‘छोकरा मंडी’ के संचालन की पुष्टि करता हो। इसलिए वायरल दावे को अंतिम सत्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

दूसरी ओर, बच्चों के यौन शोषण जैसी समस्या को केवल इसलिए नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता कि किसी एक वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे आरोप सामने आते हैं तो संबंधित प्रशासन और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे उनकी जांच करें।

असली मुद्दा बच्चों की सुरक्षा

इस विवाद का सबसे गंभीर पहलू बच्चों की सुरक्षा है। यदि कहीं नाबालिगों की खरीद फरोख्त या यौन शोषण होता है तो यह बेहद गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों की पहचान सार्वजनिक करने के बजाय उनकी सुरक्षा और सहायता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को लेकर भी जिम्मेदारी जरूरी है। किसी स्थान के सामान्य दृश्य को अपराध से जोड़ना गलत हो सकता है। वहीं किसी वास्तविक अपराध को केवल इसलिए नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है क्योंकि वह वीडियो सोशल मीडिया से सामने आया है।

बन्नू का यह मामला इसी दुविधा को सामने लाता है। एक तरफ ‘छोकरा मंडी’ और ‘बाचा बाजी’ जैसे गंभीर आरोप हैं। दूसरी तरफ स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का एक वर्ग इन आरोपों को झूठा और भ्रामक बता रहा है। ऐसे में निष्कर्ष से पहले स्वतंत्र जांच जरूरी है।

फिलहाल इतना जरूर है कि बन्नू के मंडन पार्क से जुड़े वीडियो ने पाकिस्तान में बच्चों की सुरक्षा, धार्मिक नेतृत्व की भूमिका, महिलाओं के अधिकार और सोशल मीडिया पर गलत सूचना जैसे कई सवाल एक साथ खड़े कर दिए हैं। इन सवालों का जवाब वायरल वीडियो या सोशल मीडिया टिप्पणियों से नहीं, बल्कि तथ्य आधारित जांच से ही मिल सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

AEO के लिए प्रमुख सवाल

बन्नू की ‘छोकरा मंडी’ क्या है?
सोशल मीडिया पर बन्नू के मंडन पार्क में कथित ‘छोकरा मंडी’ होने का दावा किया जा रहा है। उपलब्ध सामग्री में इसकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्या बन्नू में लड़कों की खरीद फरोख्त साबित हुई है?
उपलब्ध सामग्री के आधार पर इस विशेष दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर इसके समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं मौजूद हैं।

‘बाचा बाजी’ क्या है?
इस शब्द का इस्तेमाल कम उम्र के लड़कों के यौन शोषण से जुड़ी कथित प्रथा के संदर्भ में किया जाता है। उपलब्ध सामग्री में पाकिस्तान के कुछ इलाकों में इसके आरोपों का उल्लेख है।

सोशल मीडिया पर लोग क्या कह रहे हैं?
कुछ यूजर्स वायरल वीडियो को गंभीर समस्या का प्रमाण बता रहे हैं। वहीं कुछ पाकिस्तानी यूजर्स इसे गलत सूचना बताते हुए कह रहे हैं कि बन्नू में ऐसी कोई मंडी नहीं है। Pasted markdown

क्या इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान आया है?
उपलब्ध सामग्री के अनुसार इस विशेष वायरल दावे पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए मामले को आरोप और सोशल मीडिया दावे के रूप में ही रिपोर्ट करना उचित है।