खाने का निवाला छोड़कर दौड़े शाकिब, सैकड़ों मरीजों की जान बचाई

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 11-10-2026
"Fulfilling one's duty is true worship": Lineman Shakib abandoned his meal to save the lives of hundreds of patients.

 

आतिफ अहमद

धुएं के बड़े-बड़े गुबार, आग की भड़कती लपटें और कुछ ही दूरी पर इलाज के लिए बिस्तर पर पड़े सैकड़ों मरीज़। वाशिम ज़िले के कारंजा लाड में उपज़िला अस्पताल के बिल्कुल करीब मौजूद बिजली के डीपी में अचानक आग लग गई। इस वाकये से पूरे इलाके में एक पल के लिए हड़कंप मच गया। हर गुज़रते पल के साथ आग और भी भयानक रूप ले रही थी और किसी भी वक्त बड़ा धमाका होने का डर सता रहा था।

आखिर क्या हुआ था

नूतन कॉलोनी इलाके में तिरंगा चौक के पास मौजूद उपज़िला अस्पताल से सटी हुई एक बिजली की डीपी थी। अचानक उसमें से चिंगारियां निकलने लगीं और कुछ ही सेकंड में वहां आग भड़क उठी। चूंकि यह हादसा अस्पताल के बिल्कुल करीब हुआ था, इसलिए मरीज़ों, उनके तीमारदारों और डॉक्टरों के दिलों में खौफ बैठ गया।

'वन सेकंड, वन कॉल – न्यू लाइफ' के उसूल पर काम करने वाली 'सैस' (सर्वधर्म आपत्कालीन संस्था) के कंट्रोल रूम को इस हादसे की खबर मिली। एक आदर्श उस्ताद उमेश महिकर ने आग देखते ही बिना कोई देर किए संस्था के प्रमुख श्याम सवाई को फोन किया। हालात की नज़ाकत को समझते हुए श्याम सवाई ने फौरन अपनी गाड़ी घटनास्थल की तरफ मोड़ दी।

खाने का निवाला छोड़कर दौड़े शाकिब

मुश्किल वक्त में अपने फर्ज़ को कैसे निभाया जाता है, इसकी एक शानदार मिसाल महावितरण के लाइनमैन शाकिब गनी शेख ने पेश की। शाम का वक्त था, इसलिए शाकिब अपने घर पर इत्मीनान से खाना खाने बैठे थे। वह मुंह में पहला निवाला डालने ही वाले थे कि उनके मोबाइल पर श्याम सवाई का फोन आ गया। अस्पताल के पास आग लगने की खबर मिलते ही और यह जानते ही कि कई बेकसूर मरीज़ों की जान खतरे में है, शाकिब ने अपने हाथ में लिया हुआ निवाला वहीं छोड़ दिया। अपनी जान की परवाह किए बिना शाकिब सीधे आग वाली जगह पर पहुंच गए।

वहां पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले पूरे इलाके की बिजली की सप्लाई काट दी। उनकी इस फुर्ती की वजह से बिजली का एक बहुत बड़ा धमाका होने से बच गया और अस्पताल में भर्ती मरीज़ों को एक नई ज़िंदगी मिल गई। इस वाकये के बारे में बात करते हुए शाकिब ने अपने जज़्बात बयां किए। उन्होंने कहा, "मैं शाम को खाना खाने बैठा था, तभी श्याम सवाई का फोन आया और पता चला कि उपज़िला अस्पताल के पास डीपी में आग लग गई है। मरीज़ों की जान खतरे में है, यह सुनते ही मैं वहां पहुंच गया और सबसे पहले बिजली सप्लाई बंद की। उसके बाद मैंने श्याम सवाई और उनकी टीम की बचाव के काम में पूरी मदद की।"

वह आगे कहते हैं, "अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाना और लोगों की मदद के लिए दौड़ पड़ना ही सच्ची इबादत है। मेरा मज़हब भी मुझे यही सिखाता है कि अपना फर्ज़ और अपनी ज़िम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभानी चाहिए। मुश्किल वक्त में बिना किसी भेदभाव के लोगों के काम आना चाहिए। पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करके लोगों की जान बचाने में ही मुझे सच्चा सुकून मिलता है।"

समाज सुधार का जीता-जागता केंद्र

कारंजा शहर में आज भाईचारे और हिफाज़त का जो माहौल दिखाई देता है, उसके पीछे श्याम सवाई का बहुत बड़ा हाथ है। महात्मा गांधी के उसूलों पर चलने वाले सवाई ने शहर में 'सैस' के ज़रिए मदद का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। चाहे कोई एक्सीडेंट हो, आग लगी हो या कोई भी आफत हो, सवाई और उनकी सभी धर्मों के लोगों से बनी टीम हमेशा मदद के लिए दौड़ पड़ती है। देश में कहीं भी नफरत का माहौल हो, लेकिन कारंजा में सवाई द्वारा बनाए गए इस आपसी तालमेल को देखकर यकीन हो जाता है कि भाईचारा आज भी ज़िंदा है। आग के इस तांडव से एक बड़े हादसे को कैसे रोका गया, इस बारे में बताते हुए श्याम सवाई ने अपने सभी साथियों का शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने कहा, "उमेश महिकर का फोन आते ही मैं अस्पताल की तरफ दौड़ा। आग बहुत भयानक रूप ले चुकी थी। तब मैंने फौरन लाइनमैन शाकिब को फोन किया। शाकिब खाने की थाली छोड़कर आ गया और उसने तुरंत लाइन बंद कर दी, वरना सैकड़ों मरीज़ों की जान खतरे में पड़ जाती।" उन्होंने आगे बताया, "उसके बाद हमने फायर ब्रिगेड को बुलाया। हमारे सैस के साथी, रोगी कल्याण समिति के संतोष घोंगड़े, अस्पताल के मिथुन ठाकुर और बाकी साथियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मदद की। सबकी इसी एकजुटता की वजह से आज कारंजा में एक बहुत बड़ा हादसा टल गया।"

कंधे से कंधा मिलाकर किया बचाव का काम

बचाव के इस काम में हर कोई अपने-अपने तरीके से मदद का हाथ बढ़ा रहा था। आग की शिद्दत को भांपते हुए रोगी कल्याण समिति के सदस्य संतोष घोंगड़े ने नगर परिषद के फायर ब्रिगेड अफसर शुभम झोपाले से संपर्क किया। अस्पताल के टेक्निकल असिस्टेंट मिथुन ठाकुर और श्याम सवाई ने अस्पताल के फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करके आग की शिद्दत को शुरुआत में ही काबू में कर लिया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की गाड़ी वहां पहुंच गई और जवानों ने बड़ी बहादुरी से आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इस पूरी जद्दोजहद में समाजी कार्यकर्ता शाम घोड़ेस्वार, कपिल महाजन, सावन कोल्हे और वैभव रोडे ने भी अपनी जान की परवाह किए बिना काफी अहम मदद की।

कारंजा लाड के इस छोटे से शहर ने पूरे देश को एक बहुत बड़ा सबक सिखाया है। नफरत की सियासत से इंसानियत और मुहब्बत की ताक़त कई गुना बड़ी होती है, यही बात कारंजा के इन नौजवानों ने अपने काम से एक बार फिर साबित कर दी है।