नासिक TCS केस: आरोपियों पर कार्रवाई, लोगों ने दिखाया सौहार्द

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 25-04-2026
Nashik TCS Case: Action Taken Against Accused; People Demonstrate Harmony, AI photo
Nashik TCS Case: Action Taken Against Accused; People Demonstrate Harmony, AI photo

 

आवाज़ द वायस / पुणे ब्यूरो

नासिक में मौजूद 'टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़' (TCS) के बीपीओ यूनिट का मामला इस वक्त पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कंपनी में काम करने वाले कुछ मुस्लिम नौजवानों पर यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और धर्मांतरण के लिए ज़बरदस्ती करने जैसे संगीन मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने भी इस मामलेपर फौरन एक्शन लेते हुए गहराई से जांच शुरू कर दी है।

लेकिन इस घटना की आड़ में कुछ शरारती तत्व समाज में डर और अविश्वास का माहौल न पैदा कर सकें, इसके लिए सभी धर्मों को मानने वाले नासिक के लोग आगे आ रहे हैं और आपसी भाईचारा और एकता बनाए रखने के लिए एक शानदार पहल कर रहे हैं।

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नफरत के खिलाफ नासिक के लोगों की पहल

समाज में संविधान को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए नासिक के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अजमल खान 'संविधान प्रेमी नासिककर' नाम की एक मुहिम चलाते हैं। इस पूरे मामले पर वह कहते हैं, "एक नामी आईटी कंपनी में मुस्लिम नौजवान लड़के-लड़कियों पर लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है। उसमें से सच बाहर आएगा ही। लेकिन इसे बहाना बनाकर इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ जानबूझकर जो झूठा प्रचार किया जा रहा है, वह गलत है। हमें डर है कि इससे दो समाजों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा और दूरियां बढ़ेंगी। आखिर में इससे राज्य और देश का ही नुकसान होगा।"

नासिक में सामाजिक कामों में हमेशा आगे रहने वाले अजमल खान आगे कहते हैं, "इस मौके पर मैं मुस्लिम नौजवानों से भी एहतियात बरतने की अपील करता हूँ। ऐसी घटनाओं से आईटी जैसे क्षेत्रों में जाने के उनके सपनों को झटका लगता है। इसलिए, आज के दौर में इस बात का खास ख्याल रखने की ज़रूरत है कि हमारे बर्ताव और चाल-चलन से मज़हब की बदनामी न हो और कानून की धज्जियां न उड़ें।"

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संविधान और भाईचारे की मज़बूत आवाज़

संविधान की कदरों को समाज में बसाने का काम करने वाली संस्था 'संविधान प्रेमी नासिककर' के सदस्य और नासिक ज़िला अदालत के वकील, एडवोकेट वायचाले का इस पूरे मामले पर दिया गया बयान भी हौसला बढ़ाने वाला है।

वह कहते हैं, "हमारा देश संविधान पर चलता है। संविधान सभी नागरिकों और सभी धर्मों को बराबर के अधिकार देता है। नासिक की इस घटना से हम दहल गए हैं। पुलिस की तफ्तीश जारी है और उससे सच्चाई सामने आ ही जाएगी। हमारी मांग है कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए। लेकिन इस घटना का बहाना लेकर किसी खास समाज को निशाना बनाने का घटिया काम कुछ स्वार्थी और शरारती लोग कर रहे हैं।"

वहीं, नासिक के मुकुंद दीक्षित ने भी बहुत ही संतुलित बात कही। उन्होंने अपना यकीन ज़ाहिर करते हुए कहा, "हम हिंदू-मुस्लिम इस शहर में बहुत ही प्यार और भाईचारे से रहते हैं। ऐसी निजी घटनाओं की वजह से समाज में अविश्वास और डर का माहौल पैदा करने की कई लोग कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे।

बल्कि, इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, हम उस पर सख्त कार्रवाई की मांग ज़रूर करेंगे। लेकिन हम सभी धर्मों के लोग ऐसे मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ देकर इस बात का पूरा ख्याल रखेंगे कि देश की एकता और अमन भंग न हो।"

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इस्लाम में ज़बरदस्ती और अनैतिकता हराम: मौलाना अशरफी

'गुलशन-ए-गरीब नवाज़' मस्जिद और मदरसे के खतीब व इमाम, मौलाना मोहम्मद तौफीक अशरफी ने इस पर इस्लाम का नज़रिया सामने रखा।

उन्होंने कहा, "नासिक मामले में मुस्लिम नौजवानों पर लगे आरोप कितने सच्चे हैं, यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन एक इमाम और कुरान-हदीस का जानकार होने के नाते मैं एक बात साफ करना चाहता हूँ। मैं यह बताना चाहता हूँ कि ऐसे कामों के बारे में इस्लाम में आखिर क्या हुक्म है।"

"पहली अहम बात, किसी के भी साथ नाजायज़ रिश्ते बनाना इस्लाम में सख्त हराम माना गया है। कुरान और हदीस में कई जगहों पर इसे एक बहुत बड़ा गुनाह कहा गया है। इस्लाम में इसके लिए बहुत ही सख्त सज़ा का कानून है। इससे एक बात साफ हो जाती है कि इस्लाम में औरतों की आबरू से खेलने की सख्त मनाही है," मौलाना अशरफी ने साफ किया।

वह आगे बताते हैं, "दूसरी अहम बात, किसी भी दूसरे मज़हब का मज़ाक उड़ाना या किसी को भी ज़बरदस्ती इस्लाम कबूल करने पर मजबूर करना किसी भी हाल में जायज़ नहीं है। अल्लाह ताला ने कुरान में बिल्कुल साफ फरमाया है, 'लकुम दीनुकुम वलियदीन' (तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन/धर्म, हमारे लिए हमारा दीन/धर्म)। हमें सिर्फ अपने मज़हब का ईमानदारी से पालन करने का हुक्म है। दूसरों के मज़हबी मामलों में दखलंदाज़ी करने की इस्लाम बिल्कुल भी इजाज़त नहीं देता।"

आखिर में उन्होंने एक पुरज़ोर अपील की। "मैं अपने सभी देशवासियों से एक गुज़ारिश करता हूँ। अगर कोई मुस्लिम शख्स ऐसा बेहद गिरा हुआ काम करता है, तो उसे हरगिज़ इस्लाम की तालीम न समझें। इस्लाम एक बेहद पाक और साफ मज़हब है। वह हमें हर बुरी चीज़ से रोकता है और सिर्फ भलाई का हुक्म देता है। किसी एक इंसान के गलत काम की वजह से पूरे इस्लाम के बारे में कोई गलत नज़रिया न बनाएं।"

इस पूरे मामले में नासिक के लोगों और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कानून का सम्मान करने वाली और साथ ही समाज में मज़हबी सौहार्द बनाए रखने के लिए जो ज़िम्मेदारी भरी भूमिका निभाई है, वह यकीनन काबिले-तारीफ है। पुलिस की तफ्तीश और कानूनी कार्रवाई के बाद इस घटना का सच तो सामने आ ही जाएगा, लेकिन इस मौके पर नासिक के लोगों का यह रवैया सभी के लिए एक बेहतरीन मिसाल है।

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आखिर क्या है नासिक का 'टीसीएस' (TCS) मामला?

नासिक में 'टीसीएस' के बीपीओ यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न और धार्मिक ज़बरदस्ती के मामले की जांच अब चौथे हफ्ते में पहुंच गई है। इस मामले में अब तक कुल नौ शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें यौन शोषण, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना और नमाज़ पढ़ने के लिए दबाव डालने जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद दानिश शेख समेत आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें से सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। निदा खान को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और सेशंस कोर्ट ने उसकी अंतरिम ज़मानत की अर्ज़ी भी खारिज कर दी है।

एटीएस और पुलिस इन सभी से कड़ी पूछताछ कर रही है। बचाव पक्ष के वकील बाबा सैयद ने दावा किया है कि एफआईआर में ज़बरदस्ती धर्मांतरण का कोई ज़िक्र नहीं है, बल्कि सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की शिकायत है। इस मामले में अभी तक अदालत में कोई चार्जशीट दायर नहीं की गई है।

इस घटना का असर कंपनी के टॉप मैनेजमेंट पर भी पड़ा है। टीसीएस ने सभी आठ आरोपियों को नौकरी से सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा, मामले की जांच के लिए स्वतंत्र निदेशकों की अगुवाई में एक खास निगरानी समिति भी बनाई गई है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मामले में 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए पुलिस को गहरी जांच के आदेश दिए हैं।

फिलहाल इस मामले की कई राष्ट्रीय संस्थाओं की तरफ से समांतर जांच भी चल रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने महाराष्ट्र पुलिस और टीसीएस से सारी जानकारी मांगी है। दूसरी तरफ, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की एक 'फैक्ट-फाइंडिंग' कमेटी ने खुद नासिक जाकर शिकायतकर्ताओं और पुलिस से सीधे मुलाकात भी की है।