From poverty to becoming the king of music: Arijit Singh's simplicity wins hearts
अर्सला खान/नई दिल्ली
सुरों की दुनिया में कुछ आवाजें सिर्फ सुनी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। Arijit Singh की आवाज भी ऐसी ही है। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ एक सफल गायक की नहीं है। यह उस कलाकार की कहानी है जो सादगी और संघर्ष से निकलकर शिखर तक पहुंचा।
पश्चिम बंगाल के जियागंज का छोटा सा कस्बा। वहीं से अरिजीत की शुरुआत हुई। घर में ज्यादा साधन नहीं थे। लेकिन संगीत था। मां गाती थीं। नानी शास्त्रीय संगीत से जुड़ी थीं। यही उनका पहला स्कूल था। बचपन में ही उन्होंने समझ लिया था कि सुर ही उनका रास्ता हैं। उन्होंने तबला सीखा। हारमोनियम सीखा। और सबसे जरूरी, धैर्य सीखा।
उनका बचपन चमकदार नहीं था। वह आम बच्चों जैसा ही था। लेकिन एक फर्क था। उनके भीतर एक बेचैनी थी कुछ करने की। स्कूल के छोटे-छोटे मंचों से लेकर लोकल कार्यक्रमों तक, वे हर जगह गाते रहे। फिर आया साल 2005। एक रियलिटी शो में उन्होंने हिस्सा लिया। यह पहला बड़ा मौका था। लेकिन जीत नहीं मिली। कई लोगों के लिए यह अंत होता। अरिजीत के लिए यह शुरुआत थी।
मुंबई पहुंचना आसान नहीं था। संघर्ष लंबा था। कई बार ऐसा लगा कि रास्ता खत्म हो गया। छोटे-छोटे काम किए। स्टूडियो में घंटों मेहनत की। कई गाने रिकॉर्ड हुए, लेकिन रिलीज नहीं हुए। यह वह दौर था जहां उम्मीद और हकीकत के बीच दूरी बहुत बड़ी थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
फिर एक दिन उनकी आवाज ने लोगों का दिल छू लिया। और उसके बाद उनकी पहचान बनती चली गई। आज अरिजीत सिंह देश के सबसे बड़े सिंगर्स में गिने जाते हैं। उनकी कमाई करोड़ों में है। बड़े-बड़े कॉन्सर्ट्स में उनका नाम सबसे ऊपर होता है। लेकिन यह कहानी सिर्फ पैसे और शोहरत की नहीं है।
असल कहानी उनकी सादगी की है। सोशल मीडिया पर अक्सर उनके वीडियो वायरल होते रहते हैं। कभी वे साधारण चप्पल पहनकर स्कूटी चलाते नजर आते हैं। कभी लोकल दुकानों पर आराम से बैठे दिखते हैं। बिना सिक्योरिटी। बिना दिखावे। इन वीडियोज को लोग सिर्फ इसलिए पसंद नहीं करते कि वे स्टार हैं, बल्कि इसलिए कि वे आम इंसान जैसे दिखते हैं।
एक तरफ करोड़ों की कमाई। दूसरी तरफ वही सादा जीवन। यही बात उन्हें खास बनाती है। जहां ज्यादातर सितारे चमक दिखाते हैं, अरिजीत चुपचाप अपने काम में लगे रहते हैं। उन्हें भीड़ से दूर रहना पसंद है। उन्हें शोर नहीं, संगीत चाहिए।
उनकी कहानी उस हर इंसान को हिम्मत देती है जो छोटे शहर से बड़े सपने देखता है। यह बताती है कि गरीबी या साधारण शुरुआत कमजोरी नहीं होती। अगर जुनून और मेहनत साथ हो, तो वही शुरुआत ताकत बन जाती है।
आज जब उनकी आवाज किसी गाने में सुनाई देती है, तो उसमें सिर्फ संगीत नहीं होता। उसमें एक सफर होता है। संघर्ष का। सादगी का। और उस यकीन का कि असली पहचान इंसानियत से बनती है, सिर्फ शोहरत से नहीं।