आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली
केरल के कोच्चि शहर में एक अद्भुत सांस्कृतिक संगम देखने को मिलता है एक ओर प्राचीन यहूदी आराधनालयों का इतिहास और दूसरी ओर अज़ान की मधुर ध्वनि। इन्हीं दो संस्कृतियों के मिलन का सजीव प्रमाण एक छोटी-सी दुकान है, जो आज भी एक मुस्लिम शिष्य द्वारा अपने यहूदी गुरु को दिए गए वचन और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को संजोए हुए है।

हाल ही में एक अमेरिकी लेखिका, आइजा मेरोक द्वारा साझा किए गए वीडियो के बाद यह दुकान सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। स्थानीय यहूदी आबादी के बड़े पैमाने पर पलायन के बावजूद यह दुकान दशकों से निरंतर खुली है। मेरोक द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति थाहा इब्राहिम की दुकान दिखाई गई है। इब्राहिम कोच्चि के ऐतिहासिक यहूदी कस्बे में एक पुरानी यहूदी कढ़ाई की दुकान चलाते हैं। यह दुकान मूल रूप से एक यहूदी महिला की थी, जिन्होंने बचपन से इब्राहिम का मार्गदर्शन किया और अंततः अपना व्यवसाय उन्हें सौंप दिया।
यह दुकान कोच्चि के मट्टनचेरी इलाके में स्थित यहूदी बस्ती में है। यह बस्ती कभी कोचीन यहूदी समुदाय का प्रमुख निवास स्थान थी। यह समुदाय सदियों से केरल में रह रहा था। लेकिन 20वीं शताब्दी के मध्य के बाद समुदाय के अधिकांश लोग विदेशों में बस गए, जिसके कारण कई घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हो गए। इसके बावजूद, यह कढ़ाई की दुकान सहित कुछ स्थान आज भी संचालित हैं।

इस दुकान की मालकिन सारा कोहेन (1925–2019) थीं। वे यहूदी बस्ती में स्थायी रूप से रहने वाली अंतिम यहूदियों में से एक थीं। विभिन्न साक्षात्कारों और रिपोर्टों के अनुसार, जब अन्य लोग कोच्चि छोड़कर चले गए, तब भी उन्होंने वहीं रहने का निर्णय लिया। उनकी दुकान में हाथ से कढ़ाई किए गए वस्त्र और स्मृति-चिह्न बेचे जाते थे, जिससे यह दुकान पूरे इलाके में प्रसिद्ध हो गई।
This Muslim man is keeping Judaism alive in India. And he is one of the most incredible people I have ever met.
— aijamayrock (@aijamayrock) February 19, 2026
This is Thaha Ibrahim - a devout Muslim.
When Thaha was a child, he was a street vendor outside of an embroidery store in Jew Town, India. The store owner was a… pic.twitter.com/UKvM5AXNUS
थाहा इब्राहिम बचपन में कोहेन की दुकान के पास सड़क किनारे सामान बेचा करते थे। बाद में कोहेन ने उन्हें अपनी दुकान में काम पर रख लिया और कढ़ाई सहित रोजमर्रा के व्यापारिक कार्यों का प्रशिक्षण दिया। धीरे-धीरे इब्राहिम पूरी तरह से इस व्यवसाय से जुड़ गए। उन्होंने ग्राहक सेवा, उत्पादन और रखरखाव जैसे कार्यों में कोहेन की मदद की। यह संबंध कई दशकों तक चला।
जब कोहेन का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, तब उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद भी दुकान को चालू रखने का निर्णय लिया। 2019 से पहले उन्होंने इब्राहिम से दुकान की देखभाल और संचालन जारी रखने का अनुरोध किया। इब्राहिम ने उन्हें वचन दिया। कोहेन के निधन के बाद इब्राहिम और उनके परिवार ने दुकान और उसके समस्त सामान की जिम्मेदारी संभाल ली।

आज भी यह दुकान उसी नाम और स्वरूप में खुली है। यहूदी परंपरा के अनुसार सब्त के दिन, यानी शनिवार को दुकान बंद रहती है, और शुक्रवार की शाम को मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। दुकान में सारा कोहेन की तस्वीरें, कढ़ाई के पुराने पैटर्न और उनकी निजी वस्तुएं प्रदर्शित हैं। इब्राहिम ने स्पष्ट किया है कि वे स्वयं मुस्लिम हैं और उनका उद्देश्य केवल दुकान को चलाना तथा परंपराओं को बनाए रखना है बिना धर्म परिवर्तन किए।
इतिहासकार नाथन काट्ज़ और शाल्वा वेल के शोध, साथ ही कोच्चि यहूदी संग्रहालय और केरल पर्यटन विभाग के अभिलेखों के अनुसार, यहूदी समुदाय दो हज़ार वर्षों से भी अधिक समय से केरल में हिंदू, ईसाई और मुस्लिम समुदायों के साथ निवास करता आ रहा है। यद्यपि इस उपस्थिति का सबसे प्राचीन प्रमाण मध्ययुगीन ताम्रपत्रों में मिलता है, किंतु स्थानीय परंपराएं और शोध मालाबार तट के प्राचीन व्यापारिक नेटवर्क के समय से ही यहूदियों की उपस्थिति की ओर संकेत करते हैं।
— aijamayrock (@aijamayrock) February 19, 2026
ऐतिहासिक अध्ययनों और सरकारी धरोहर संस्थानों के अनुसार, 1948 के बाद बड़े पैमाने पर हुए पलायन के कारण 20वीं शताब्दी में केरल की यहूदी आबादी में तीव्र गिरावट आई। फिर भी, कोच्चि के यहूदी नगर में स्थित आराधनालय, कब्रिस्तान और पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठान आज भी इस समृद्ध इतिहास के साक्षी हैं। स्थानीय इतिहासकार सारा कोहेन की कढ़ाई की दुकान को एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानते हैं, जो दर्शाती है कि बड़े जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के बावजूद सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संरचनाएं कैसे जीवित रह सकती हैं।