भारत-जर्मनी संबंध: कूटनीति, व्यापार, रक्षा, संस्कृति, फिल्म और मनोरंजन में गहन साझेदारी

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 12-01-2026
India-Germany relations: A deep partnership in diplomacy, trade, defense, culture, film and entertainment
India-Germany relations: A deep partnership in diplomacy, trade, defense, culture, film and entertainment

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने आज सबर्मती रिवरफ्रंट (अहमदाबाद) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया, जहाँ दोनों नेताओं ने पतंग उड़ाते हुए भारत-जर्मनी के 25 वर्षों से मजबूत होते रहे राजनयिक और सांस्कृतिक रिश्तों का जश्न मनाया। इस रंगीन आयोजन ने न केवल सांस्कृतिक सेतु को प्रस्तुत किया बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी की व्यापक तस्वीर को भी दर्शाया।

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पतंग महोत्सव में पीएम मोदी ने विशेष रूप से एक पतंग उड़ाई जिस पर “भारत — वसुधैव कुटुंबकम्” संदेश अंकित था, जो भारत की वैश्विक मानव-भाईचारे की परंपरा को दर्शाता है। स्थानीय नागरिकों और अन्तरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने रंग-बिरंगे पतंगों और राष्ट्रीय झंडों के साथ समारोह को गरिमामय बनाया।

द्विपक्षीय आर्थिक एवं व्यापार संबंध

भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक साझेदारी आज और भी व्यापक रूप ले चुकी है। FY 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $51.23 बिलियन तक पहुँच गया है, जिससे जर्मनी भारत का यूरोपीय संघ में सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है और यह भारत का वैश्विक स्तर पर नौवां सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक भी है, जहाँ 2000+ जर्मन कंपनियां भारत में संचालन कर रही हैं।

पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों का व्यापार $30 बिलियन के स्तर को पार कर चुका था। इसके अतिरिक्त, जर्मनी ने भारत को प्रशिक्षित पेशेवरों के लिए वार्षिक वीजा को 20,000 से बढ़ा कर लगभग 90,000 करने का निर्णय लिया है, जिससे तकनीकी और व्यावसायिक आदान-प्रदान को और प्रोत्साहन मिलेगा।

दोनों सरकारों ने यह भी साझा लक्ष्य रखा है कि आने वाले वर्षों में व्यापार मात्रा को दोगुना करने की दिशा में कदम उठाए जाएं, जिससे व्यापारिक सहयोग और निवेश और अधिक विस्तृत होगा।

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रणनीतिक रक्षा सहयोग — पनडुब्बी समझौता

दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी अधिक गहरा होता जा रहा है। पिछले प्रयासों के तहत भारत-जर्मनी मिलकर एक रक्षा परियोजना पर काम कर रहे हैं जिसमें पनडुब्बी निर्माण और तकनीक साझेदारी शामिल है – जो लगभग ₹43,000 करोड़ के समझौते के करीब बताया जा रहा है, और यह रक्षा सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

संस्कृति, शिक्षा और शोध में सहयोग

भारत और जर्मनी की साझेदारी सिर्फ आर्थिक और रक्षा तक सीमित नहीं है — दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शैक्षणिक सहयोग और शोध परियोजनाएँ भी मजबूत हो रही हैं। बाडेन-वुर्टेमबर्ग और महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों के बीच 100+ शैक्षणिक परियोजनाएँ, इंजीनियरिंग, तकनीक और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आदान-प्रदान इस रिश्ते को और विस्तृत कर रहे हैं।

जर्मनी में लगभग 50,000 भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो वहां पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी संख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि भारतीय डायस्पोरा की संख्या 3 लाख से अधिक हो चुकी है, जो शिक्षा, तकनीक और सामाजिक संपर्क का बड़ा प्रमाण है।

फिल्म, मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रभाव

भारत की फिल्म और मनोरंजन क्षेत्र भी विश्व भर में अपनी पहचान बना रही है। भारतीय फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार सराहा जा रहा है – “कांतारा: ए लीजेंड – चैप्टर 1” और “तन्वी द ग्रेट” जैसी फिल्मों को ऑस्कर 2026 की बेस्ट पिक्चर कैटेगरी की प्रारंभिक सूची में जगह मिली है, जिसे भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

बॉलीवुड और भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रम जर्मनी में भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जहां विभिन्न जश्न और भारत सप्ताह जैसे आयोजन हो रहे हैं, जिसमें भारतीय संस्कृति, संगीत, नृत्य और चलचित्र को उत्साहपूर्वक प्रस्तुत किया जाता है।

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भविष्य के आयाम और रणनीतिक महत्व

भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और 2025 में इसका GDP लगभग $4.3 ट्रिलियन तक पहुँचने का अनुमान है, जिससे वह विकासशील देशों की सूची में शीर्ष पर है। अगले कुछ वर्षों में भारत को जर्मनी से आगे निकलकर दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान भी जताया जा रहा है।

भारत-जर्मनी साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी नवाचार, व्यापार प्रतिस्पर्धा और वैश्विक स्थिरता जैसे क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में निरंतर विस्तार कर रही है। दोनों देशों के बीच यह मुलाकात और सांस्कृतिक-आर्थिक मेलजोल दुनिया के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण संदेश देता है कि साझेदारी का आधार विश्वास, परस्पर सम्मान और साझा विकास लक्ष्य है।

आज की यह संगठित यात्रा और सांस्कृतिक विरासत से भरी बातचीत न केवल भारत और जर्मनी के बीच रिश्तों की दृढ़ता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक मंच पर सहयोग, समृद्धि और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक नया स्वरूप भी प्रस्तुत करती है — जो आने वाले दशक में दोनों देशों के लिए और अधिक व्यापक उपलब्धियां ला सकती है।