धोनी की फिल्म से बदली तकदीर, अब भारत के लिए चुनौती बने उस्मान तारिक

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 14-02-2026
Dhoni's film changed his fortunes, now Usman Tariq has become a challenge for India.
Dhoni's film changed his fortunes, now Usman Tariq has become a challenge for India.

 

मलिक असगर हाशमी / नई दिल्ली

टी20विश्व कप जैसे बड़े मंच पर भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हमेशा से सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भावनाओं, इतिहास और प्रतिष्ठा की टक्कर रही है। 15फरवरी को कोलंबो में होने वाले मुकाबले से पहले चर्चा का केंद्र सिर्फ दोनों टीमों की रणनीति नहीं, बल्कि पाकिस्तान के रहस्यमयी ऑफ स्पिनर उस्मान तारिक बन गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं और इसमें प्रेरणा का स्रोत रही बॉलीवुड फिल्म एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी, जो भारतीय क्रिकेट के महान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर आधारित है।

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इस समय चल रहे ICC Men's T20 World Cup में उस्मान तारिक पाकिस्तान के लिए तुरुप का इक्का साबित हो रहे हैं। अमेरिका के खिलाफ अपने डेब्यू टी20मैच में हैट्रिक लेकर उन्होंने न सिर्फ मैच का रुख बदला बल्कि पूरी क्रिकेट बिरादरी को चौंका दिया। तीन सप्ताह पहले तक शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वह पाकिस्तान की अंतिम टीम में जगह बना पाएंगे, लेकिन आज वह विरोधी टीमों के विश्लेषकों के लिए पहेली बने हुए हैं।

उस्मान की पृष्ठभूमि संघर्षों से भरी रही है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के नौशेरा इलाके में जन्मे उस्मान साधारण परिवार से आते हैं। बचपन से क्रिकेट का जुनून था, लेकिन घर की आर्थिक जिम्मेदारियों ने उन्हें जल्दी बड़ा बना दिया।

पेशावर में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट खेलते हुए उन्होंने सपने जरूर देखे, मगर हालात ऐसे थे कि उन्हें लगने लगा क्रिकेट उनके बस की बात नहीं। परिवार का पेट भरना प्राथमिकता थी, इसलिए उन्होंने रोज़गार की तलाश में पहले अफगानिस्तान और फिर इस्लामाबाद का रुख किया। राजधानी के एक होटल में सब्ज़ियां काटने से लेकर दिहाड़ी मजदूरी तक, उन्होंने हर काम किया।

आखिरकार बेहतर कमाई की उम्मीद में वह संयुक्त अरब अमीरात चले गए। वहां मजदूरी से उन्हें ठीक-ठाक आमदनी होने लगी और परिवार की हालत सुधरने लगी। क्रिकेट उनसे दूर हो चुका था। लेकिन इसी दौरान एक दिन उन्होंने एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी देखी। फिल्म का वह दृश्य, जिसमें धोनी रेलवे प्लेटफॉर्म पर बैठकर जीवन की असमंजस भरी घड़ी में एक और मौका लेने का फैसला करते हैं, उस्मान के दिल को छू गया। उन्हें लगा कि यदि धोनी अपने संघर्षों के बीच वापसी कर सकते हैं तो वह क्यों नहीं। यही वह क्षण था जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

उस्मान ने फैसला किया कि वह क्रिकेट को एक आखिरी मौका देंगे। वह पाकिस्तान लौटे, घरेलू क्रिकेट में मेहनत की और धीरे-धीरे चयनकर्ताओं की नजरों में आए। पिछले वर्ष नवंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। 28 वर्ष की उम्र में डेब्यू,देर आए दुरुस्त आए उन पर सटीक बैठता है।

अब सवाल है कि उस्मान तारिक को इतना खास क्या बनाता है? उनकी गेंदबाजी शैली पारंपरिक नहीं है। उनका रनअप छोटा है, वह क्रीज तक हल्के जिगजैग अंदाज में आते हैं और गेंद छोड़ने से ठीक पहले एक क्षण के लिए ठहरते हैं। यही ‘पॉज़’ बल्लेबाजों को असहज कर देता है। उन्हें समझ नहीं आता कि गेंद कब और किस कोण से आएगी। इसके साथ ही उनकी बांह की बनावट भी चर्चा में है। उन पर आरोप लगे कि उनकी कोहनी 15डिग्री की सीमा से अधिक मुड़ती है।

पाकिस्तान सुपर लीग के दौरान उनकी दो बार रिपोर्टिंग हुई, लेकिन दोनों बार उन्हें क्लियर कर दिया गया। उस्मान का कहना है कि उनकी बांह की संरचना प्राकृतिक है-जन्मजात स्थिति, जिसे आम बोलचाल में ‘डबल जॉइंटेड’ कहा जाता है। क्रिकेट इतिहास में ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं। श्रीलंका के महान ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन को भी इसी तरह के संदेहों का सामना करना पड़ा था। 1999में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की जांच के बाद उन्हें वैध करार दिया गया, हालांकि उस समय अंपायर डैरेल हेयर के साथ उनका विवाद काफी चर्चित रहा।

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शोएब अख्तर का मामला अलग था। उनकी ‘नूडल आर्म’ कहलाई जाने वाली लचीली बांह और तेज गति ने कई बार सवाल खड़े किए। अंततः 15डिग्री नियम लागू हुआ और उनका करियर नई रफ्तार से आगे बढ़ा। उस दौर में बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया की भूमिका भी चर्चाओं में रही।

आज उस्मान के मामले में भी बहस जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय का अधिकार सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अधिकृत परीक्षण केंद्र को है। भारत के अनुभवी ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि मैदान पर अंपायर 15 डिग्री की सीमा को आंखों से नहीं माप सकते।

उनके अनुसार, जब तक वैज्ञानिक परीक्षण कुछ और न कहे, किसी गेंदबाज पर ‘ग्रे एरिया’ का आरोप लगाना अनुचित है। अश्विन ने उस्मान के रनअप में ठहराव को भी वैध बताया, क्योंकि यह उनका नियमित एक्शन है, न कि कोई अचानक अपनाई गई चाल।

भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला हमेशा रणनीतिक शतरंज की तरह होता है। भारत के बल्लेबाज उस्मान के ‘पॉज़’ और उनकी उंगलियों की पकड़ को पढ़ने की कोशिश करेंगे, जबकि पाकिस्तान को उम्मीद होगी कि यह रहस्य भारतीय बल्लेबाजी क्रम को उलझा देगा।

अमेरिका के खिलाफ चार ओवर में 3/27 का प्रदर्शन बता चुका है कि दबाव के क्षणों में भी वह संयम नहीं खोते। मैच के बाद उन्होंने कहा था, “मैं अपने एक्शन को लेकर दबाव में नहीं हूं, दबाव भारत पर होगा।” यह बयान आने वाले मुकाबले की तीव्रता का संकेत देता है।

कोलंबो की पिचें अक्सर स्पिनरों को मदद देती रही हैं, और ऐसे में उस्मान की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। उनके लिए यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि अपने संघर्षों की कहानी को और मजबूत करने का अवसर है। नौशेरा की तंग गलियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक की यह यात्रा दिखाती है कि सपने भले ही ठहर जाएं, लेकिन सही प्रेरणा उन्हें फिर जगा सकती है।

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उस्मान तारिक की कहानी यह भी बताती है कि क्रिकेट सिर्फ तकनीक का खेल नहीं, बल्कि विश्वास और साहस का नाम है। एक फिल्म से मिली प्रेरणा ने उन्हें मजदूरी की जिंदगी से निकालकर विश्व कप के मंच तक पहुंचा दिया। अब देखना यह है कि भारत के खिलाफ हाई-वोल्टेज मुकाबले में उनका जादू चलता है या भारतीय बल्लेबाज इस पहेली को सुलझा लेते हैं। लेकिन इतना तय है कि उस्मान तारिक ने क्रिकेट जगत को एक नई चर्चा दे दी है-संघर्ष, विश्वास और वापसी की चर्चा।