काजीरंगा में एलिवेटेड एनिमल कॉरिडोर: भारत में वन्यजीव सुरक्षा और संरक्षण का नया अध्याय

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-01-2026
Elevated Animal Corridor in Kaziranga: A New Chapter in Wildlife Protection and Conservation in India
Elevated Animal Corridor in Kaziranga: A New Chapter in Wildlife Protection and Conservation in India

 

रूपक गोस्वामी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक महत्वाकांक्षी एलिवेटेड एनिमल कॉरिडोर की आधारशिला रखेंगे। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-715 (पूर्व में एनएच-37) पर तेज़ रफ्तार यातायात के कारण वन्यजीवों की मौत और मानव–वन्यजीव संघर्ष की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान मानी जा रही है। काजीरंगा जैसे संवेदनशील और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र में यह पहल भारत की वन्यजीव-संवेदनशील अवसंरचना के एक नए चरण का संकेत देती है।

हर वर्ष मानसून के दौरान ब्रह्मपुत्र के बाढ़ के पानी से काजीरंगा का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाता है। ऐसे में गैंडे, हाथी, हिरण और मांसाहारी जीव स्वाभाविक रूप से ऊंचाई की तलाश में पूर्वी असम के कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों की ओर बढ़ते हैं। इसी मौसमी पलायन के दौरान राजमार्ग वन्यजीवों के लिए जानलेवा बाधा बन जाता है। गति सीमा, चेतावनी संकेत और अन्य उपायों के बावजूद वाहन–टक्कर से जानवरों की मौतें होती रही हैं। प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर इस चुनौती से निपटने की भारत की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी कोशिश है, जो विकास और पारिस्थितिकी निरंतरता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।
 
राष्ट्रीय राजमार्ग-715 पर 34.5 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड हिस्से को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि सड़क के नीचे पूरा भूभाग खुला रहे और वन्यजीव बिना किसी रुकावट के प्राकृतिक मार्गों से गुजर सकें। पारंपरिक अंडरपास या कल्वर्ट्स के विपरीत, यह संरचना जानवरों को संकरे रास्तों में सीमित नहीं करती, बल्कि पूरे परिदृश्य को जोड़कर रखती है। निर्माण पूरा होने पर यह दुनिया के सबसे लंबे सतत वन्यजीव-अनुकूल एलिवेटेड रोडवे में शामिल होगा, जिसे विशेष रूप से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है, जहां एक-सींग वाले गैंडे, हाथी और बाघों की वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण आबादी पाई जाती है।
 
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पहले ही कालियाबोर–नुमालीगढ़ खंड के चौड़ीकरण और सुधार को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत काजीरंगा क्षेत्र में व्यापक वन्यजीव-संवेदनशील उपायों के साथ चार लेन का कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन मोड में क्रियान्वित होने वाली इस योजना की कुल लंबाई 85.675 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 6,957 करोड़ रुपये है। इसे भारत की सबसे पर्यावरण-संवेदनशील राजमार्ग उन्नयन परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
 
 
कालियाबोर–नुमालीगढ़ खंड असम की राजधानी गुवाहाटी को पूर्वी असम से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। वर्तमान में यह अधिकांशतः दो लेन का राजमार्ग है, जो नागांव जिले के जाखलाबंधा और गोलाघाट के बोकाखाट जैसे घनी आबादी वाले कस्बों से होकर गुजरता है। काजीरंगा के भीतर या उसकी दक्षिणी सीमा से सटे इस हिस्से में सीमित राइट ऑफ वे, खराब सड़क ज्यामिति और बढ़ते यातायात ने वर्षों से सुरक्षा और पारिस्थितिकीय जोखिम बढ़ाए हैं।
 
परियोजना के केंद्र में एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ-साथ मौजूदा सड़क के 30.22 किलोमीटर हिस्से का एट-ग्रेड चौड़ीकरण और 21 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड बाइपास भी शामिल हैं। जाखलाबंधा और बोकाखाट के बाइपास से कस्बों में भीड़ कम होगी और सड़क सुरक्षा में सुधार आएगा। संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि काजीरंगा का यह कॉरिडोर लंबाई, बाढ़-प्रेरित पशु आवागमन और बहु-प्रजातीय उपयोग के लिहाज से पेंच टाइगर रिज़र्व या राजाजी टाइगर रिज़र्व के एलिवेटेड कॉरिडोर से कहीं आगे है और यह राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक स्थापित करेगा।
 
 
संपर्क और आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके पूरा होने से गुवाहाटी, काजीरंगा और नुमालीगढ़ के बीच सीधा संपर्क सुदृढ़ होगा, जिससे पर्यटन, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। यह एनएच-127, एनएच-129 और राज्य राजमार्ग-35 से जुड़ते हुए तेजपुर, लियाबाड़ी और जोरहाट हवाई अड्डों तथा नागांव, जाखलाबंधा और विश्वनाथ चरियाली रेलवे स्टेशनों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा। साथ ही, मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों, कार्बी आंगलोंग जैसे जनजातीय जिलों और देउपहार, काकोचांग जलप्रपात, बाबा थान और महा मृत्युंजय मंदिर जैसे पर्यटन व धार्मिक स्थलों को भी लाभ मिलेगा।
 
सरकारी आकलन के अनुसार, इस परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से लगभग 15.42 लाख और अप्रत्यक्ष रूप से 19.19 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजन होगा। यातायात घनत्व के वित्त वर्ष 2025 तक लगभग 13,800 यात्री कार इकाइयों तक पहुंचने का अनुमान है।
 
काजीरंगा में एलिवेटेड एनिमल कॉरिडोर केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं, बल्कि भारत में वन्यजीव-संवेदनशील विकास की दिशा में एक राष्ट्रीय परीक्षण है। जैसे-जैसे देश जैव विविधता से भरपूर क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, काजीरंगा मॉडल की सफलता भविष्य की परियोजनाओं की दिशा तय कर सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा आधारशिला रखे जाने के साथ ही यह योजना कागज़ से ज़मीन पर उतरने की ओर बढ़ेगी, जिस पर देश और दुनिया की नज़रें टिकी रहेंगी।