फरहान इसराइली / जयपुर
हरियाणा और राजस्थान की मुस्लिम आबादी में दहेज का प्रचलन अब नासूर की तरह फैल गया है। लाखों और करोड़ों खर्च की होड़ ने शादियों को बोझ और दिखावे का प्रतीक बना दिया है। इस सामाजिक समस्या से परेशान होकर हाल ही में हरियाणा के मेवात क्षेत्र में दहेज के खिलाफ महापंचायत करनी पड़ी। वहीं राजस्थान के जयपुर में एक बड़ा उद्योगपति अपनी पोती का निकाह मस्जिद में सादगी के साथ कर आम लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।
यह उद्योगपति हैं अब्दुल लतीफ, जिनकी कंपनी अब्दुल रज्जाक एंड कंपनी (आर्को) इलेक्ट्रिक मोटर, पंखे और कूलर जैसे उत्पाद बनाती है। उनकी सोच केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है। वे समाज सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनकी पहल से यह स्पष्ट होता है कि शादियों में सादगी और मर्यादा को प्राथमिकता दी जा सकती है।

जयपुर के सिंधी कैंप स्थित होटल आर्को पैलेस की मस्जिद में 25 मार्च 2026 को दोपहर दो बजे यह सादगीपूर्ण निकाह सम्पन्न हुआ। इसमें मौजूद लोग केवल करीबी रिश्तेदार और मित्र थे। ऐमन मंसूरी और मोहम्मद जीशान ने अपनी ज़िंदगी की नई शुरुआत की। समारोह का माहौल बेहद शांत और गरिमापूर्ण था। कोई भव्य सजावट नहीं थी। कोई भारी भीड़ नहीं थी। केवल काज़ी की मौजूदगी और इजाब-कुबूल के अल्फाज ही इस आयोजन की शान बने। यही सादगी इस निकाह को खास बनाती है।
अब्दुल लतीफ आरको का नाम केवल उद्योगपति के रूप में ही नहीं बल्कि समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने आर्को एंटरप्राइजेज और आर्को इंडस्ट्रीज के माध्यम से कारोबार का विस्तार किया है। सिंधी कैंप में स्थित उनके होटल आर्को पैलेस में 125कमरे और कई दुकाने हैं। यह होटल न केवल व्यापार का केंद्र है बल्कि सामाजिक गतिविधियों का भी प्रमुख स्थल बन चुका है।
साल 2001 में मंसूरी पंचायत के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने सामूहिक विवाह समारोहों की शुरुआत की। इस पहल के माध्यम से अब तक करीब 3,000जोड़ों का निकाह सादगीपूर्ण तरीके से कराया जा चुका है। कोविड के बाद उन्होंने होटल आर्को पैलेस को जरूरतमंद परिवारों के लिए सादगीपूर्ण विवाह स्थल के रूप में उपलब्ध कराया। यहां न्यूनतम खर्च में निकाह की पूरी व्यवस्था की जाती है।
मंसूरी पंचायत के माध्यम से अब्दुल लतीफ लोगों को जीवनसाथी खोजने में मदद करते हैं। साथ ही पारिवारिक विवादों का समाधान भी करते हैं। हर महीने लगभग 20-25 मामलों का निपटारा होता है। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान भी उल्लेखनीय है। अब तक 6,000से अधिक मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जा चुका है। वे बच्चों की तालीम और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
यह पहल पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद स.अ. की उस सीख को अमल में लाने की कोशिश थी जिसमें निकाह को सरल और आसान बनाने पर जोर दिया गया है। उनका पैगाम था, “निकाह आसान करो और ज़िना मुश्किल।” इस संदेश को अब्दुल लतीफ ने केवल कहा नहीं बल्कि दिखाकर भी साबित किया।
इस समाज सुधार के कदम को राजस्थान मुस्लिम तैली महापंचायत और मंसूरी पंचायत संस्था, राजस्थान का समर्थन मिला। संगठनों ने इसे समाज में बदलाव की दिशा में अहम कदम बताया। यह निकाह केवल एक समारोह नहीं था बल्कि एक सोच की शुरुआत थी। इस सोच में बेटियों की शादी बोझ नहीं बल्कि सादगी और सम्मान के साथ निभाई जाने वाली जिम्मेदारी बन जाती है।
अगर यह संदेश समाज में फैलता है, तो आने वाले समय में शादियां दिखावे और फिजूलखर्ची से नहीं बल्कि सादगी और मर्यादा से पहचानी जाएंगी। हर घर में निकाह आसान होगा और हर बेटी की शादी समय पर और सहज तरीके से हो सकेगी।
अब्दुल लतीफ आरको का मानना है कि शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची समाज पर अनावश्यक बोझ डालती है। उनका कहना है कि अगर इस खर्च को कम किया जाए तो वही संसाधन बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। उनका यह दृष्टिकोण समाज के लिए एक साफ संदेश देता है कि शादी सादगी से भी हो सकती है और उतनी ही सम्मानजनक हो सकती है।
यह सादगीपूर्ण निकाह समारोह एक उदाहरण है कि कैसे परंपरा और मर्यादा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाई जा सकती है। उद्योगपति अब्दुल लतीफ की पहल यह दिखाती है कि समाज में बदलाव छोटे कदमों से शुरू होता है। उन्होंने साबित किया कि शादियों में खर्च कम करने से समाज को लाभ होता है और संसाधनों का सही इस्तेमाल भी संभव है।
आज राजस्थान में यह पहल चर्चा का विषय बन चुकी है। मीडिया, स्थानीय समुदाय और युवा इसे एक प्रेरणा मान रहे हैं। अब्बुल लतीफ की इस पहल ने यह संदेश दिया कि समाज सुधार और व्यक्तिगत जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकती है।
शादियों में दिखावा और बड़े खर्च की दौड़ ने कई परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। ऐसे समय में इस तरह का सादगीपूर्ण निकाह समाज को नई दिशा दे रहा है। यह संदेश फैलता है कि हर बेटी का हक है कि उसकी शादी सम्मान और सादगी के साथ हो।
निकाह समारोह में भाग लेने वाले लोग भी इस आयोजन से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यह देखने में छोटा लेकिन समाज के लिए बड़ा संदेश है। इस तरह की पहल से समाज में बदलाव की लहर शुरू हो सकती है।सादगीपूर्ण निकाह सिर्फ धन की बचत नहीं है। यह एक सामाजिक चेतना का प्रतीक है। यह दिखाता है कि शादी केवल एक उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। अब्दुल लतीफ की इस पहल ने यह साफ संदेश दिया कि शिक्षा और समाज सुधार को प्राथमिकता दी जा सकती है।
समाज में इस सोच को अपनाने से बेटियों की शादी बोझ नहीं बल्कि सम्मानजनक जिम्मेदारी बन जाएगी। यह उदाहरण अन्य उद्योगपतियों और आम लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है। शादियों में सादगी लाकर समाज को एक नई दिशा दी जा सकती है।
अब्दुल लतीफ आरको की इस पहल ने यह दिखाया कि समाज सुधार व्यक्तिगत प्रयास से संभव है। उन्होंने साबित किया कि परंपरा और सादगी को साथ लेकर नई मिसाल कायम की जा सकती है। यह सिर्फ एक निकाह नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक है।
समाज में इस तरह की सोच फैलाने से आने वाले वर्षों में शादियों में खर्च कम होगा। संसाधनों का सही उपयोग होगा। बेटियों की शिक्षा और उनके उज्जवल भविष्य के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।अंत में यह कहा जा सकता है कि अब्दुल लतीफ आरको ने जो मिसाल पेश की है, वह सिर्फ राजस्थान के लिए नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणादायक है। सादगीपूर्ण निकाह समाज में नई सोच और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने का एक कदम है।