महिला आरक्षण बिल का स्वागत, कराटे खिलाड़ी हर्षा साहू ने जताया आभार

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 11-04-2026
Welcoming the Women's Reservation Bill, Karate Player Harsha Sahu Expresses Gratitude
Welcoming the Women's Reservation Bill, Karate Player Harsha Sahu Expresses Gratitude

 

रायपुर

अंतरराष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी हर्षा साहू ने महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए इसे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देगी और उन्हें नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगी।

एएनआई से बातचीत में हर्षा साहू ने कहा कि महिलाएं पहले से ही सक्षम हैं, लेकिन इस विधेयक के माध्यम से उन्हें संसद और राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं न केवल राजनीति में आगे आएंगी, बल्कि देश की नीतियों को बनाने में भी सक्रिय योगदान देंगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार संसद की सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, जिसमें कम से कम 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।

इस प्रस्ताव के तहत 2023 के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन और परिसीमन आयोग विधेयक लाने की तैयारी भी की जा रही है। परिसीमन की प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी, जिससे सीटों का पुनर्वितरण संभव हो सके।

सरकार पहले ही महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन के लिए प्रारूप संशोधन विधेयक को मंजूरी दे चुकी है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनावों में इसे लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। इस कानून के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी विशेष कोटा शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने लेखों और वक्तव्यों में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए शासन में उनकी भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक भारतीय राजनीति में लैंगिक संतुलन स्थापित करने और महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।