एशियन गेम्स गोल्ड पर वीर चोत्रानी की नजर, ओलंपिक इतिहास रचने का मौका

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 21-08-2026
Veer Chotrani eyes Asian Games gold; a chance to make Olympic history.
Veer Chotrani eyes Asian Games gold; a chance to make Olympic history.

 

नई दिल्ली

भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी वीर चोत्रानी की नजर अब जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के स्वर्ण पदक पर है। उनके लिए यह सिर्फ एक महाद्वीपीय खिताब जीतने का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इतिहास रचने का भी मौका है। अगर चोत्रानी एशियन गेम्स में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीतते हैं, तो वह 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी बन सकते हैं।

स्क्वैश पहली बार 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शामिल होने जा रहा है। एशियन गेम्स के पुरुष और महिला एकल वर्ग के चैंपियन को लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफिकेशन मिलने की व्यवस्था है। ऐसे में दुनिया की 38वीं रैंकिंग पर मौजूद 24 वर्षीय चोत्रानी के लिए आगामी एशियन गेम्स बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं।

चोत्रानी ने कहा कि स्क्वैश को आखिरकार ओलंपिक खेल का दर्जा मिलना इस खेल से जुड़े खिलाड़ियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स में जीतने वाला खिलाड़ी सीधे ओलंपिक के लिए चुना जाएगा और अब यह देखने में ज्यादा समय नहीं है कि भारतीय स्क्वैश का पहला ओलंपियन कौन बनता है। उन्होंने कहा कि वह इस संभावना को लेकर बेहद उत्साहित हैं और अगले कुछ महीनों में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के जीतने की उम्मीद करते हैं।

दो महीने से कर रहे हैं तैयारी

मुंबई में जन्मे चोत्रानी पिछले करीब दो महीनों से एशियन गेम्स की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने तैयारी के दौरान अमेरिका में प्रशिक्षण लिया और अब यूरोप में ट्रेनिंग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऑफ सीजन में फिटनेस, तकनीक और खेल के दूसरे पहलुओं पर काम करना बेहद जरूरी है, ताकि एशियन गेम्स के साथ-साथ पूरे सत्र में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।

एशियन गेम्स में स्क्वैश प्रतियोगिताएं 23 सितंबर से 2 अक्टूबर तक नागोया के किनजो-फुटो एरिना में आयोजित होंगी। प्रतियोगिता में पुरुष और महिला एकल, पुरुष और महिला टीम स्पर्धा तथा मिश्रित युगल शामिल हैं।

भारतीय स्क्वैश के अच्छे दौर में होने का दावा

चोत्रानी का मानना है कि भारतीय स्क्वैश इस समय बेहद मजबूत दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि पीएसए टूर पर भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है और जूनियर स्तर पर भी देश को बड़ी सफलताएं मिल रही हैं।

उन्होंने विशेष रूप से अनाहत सिंह की विश्व जूनियर चैंपियनशिप में ऐतिहासिक जीत का उल्लेख किया। उनके मुताबिक अनाहत की सफलता भारतीय स्क्वैश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा भारतीय लड़कों की टीम का विश्व जूनियर प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतना भी खेल की बढ़ती ताकत का संकेत है।

चोत्रानी ने बताया कि भारतीय पुरुष वर्ग के चार खिलाड़ी पिछले कई महीनों से लगातार विश्व रैंकिंग में शीर्ष 50 के अंदर बने हुए हैं। वहीं अनाहत शीर्ष 20 में जगह बना चुकी हैं। उनका कहना है कि भारत अब विश्व स्क्वैश में किसी भी प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

अनाहत से नई पीढ़ी को प्रेरणा

चोत्रानी के मुताबिक अनाहत सिंह की विश्व जूनियर खिताबी सफलता ने देश के युवाओं को स्क्वैश की ओर आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अनाहत बेहद मेहनती और समर्पित खिलाड़ी हैं और उनके साथ समय बिताने वाले साथी खिलाड़ी भी उनकी मेहनत से प्रेरित होते हैं।

अब चोत्रानी की कोशिश अपनी दो महीने की कड़ी तैयारी को एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन में बदलने की होगी। एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक उन्हें न सिर्फ चैंपियन बनाएगा, बल्कि भारतीय स्क्वैश के इतिहास में पहला ओलंपियन बनने का रास्ता भी खोल सकता है।