जसपाल राणा को याद कर भावुक हुईं मनु भाकर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 13-06-2026
Manu Bhaker gets emotional remembering Jaspal Rana.
Manu Bhaker gets emotional remembering Jaspal Rana.

 

नई दिल्ली/देहरादून

 भारत की दो बार की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने अपने गुरु और कोच जसपाल राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें सिर्फ कोच नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक, मित्र और प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि राणा का जाना उनके लिए ऐसा व्यक्तिगत नुकसान है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

भारत के महान निशानेबाजों में शामिल जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मई के अंतिम सप्ताह में सीने में तकलीफ महसूस होने के बाद उनकी एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रक्रिया की गई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

देहरादून में जसपाल राणा के पार्थिव शरीर के पहुंचने के बाद मनु भाकर ने भावुक होकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि अभी भी उन्हें इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है।

मनु ने कहा, "मैं अब भी यकीन नहीं कर पा रही हूं। यह खबर मेरे लिए बेहद अविश्वसनीय है। मैं इसे स्वीकार करने की कोशिश कर रही हूं। वह सिर्फ मेरे कोच, मेंटर या गाइड नहीं थे, बल्कि ऐसे दोस्त थे जो मुझे अधिकांश लोगों से बेहतर समझते थे।"

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में कई पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। वह विश्व जूनियर चैंपियन, ओलंपियन और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित खिलाड़ी रहे। सक्रिय खेल जीवन के बाद उन्होंने कोचिंग के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

मनु भाकर के करियर में जसपाल राणा की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने मनु को कठिन दौर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और आत्मविश्वास वापस दिलाया। दोनों के बीच का रिश्ता सिर्फ खिलाड़ी और कोच तक सीमित नहीं था, बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित था।

मनु ने याद करते हुए कहा, "कई बार वह बहुत सख्त होते थे और कई बार सिर्फ मेरी बातें सुनते थे। वह हमेशा मुझसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन चाहते थे, भले ही उस समय मैं उनकी बातों का महत्व न समझ पाती। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो एहसास होता है कि उनकी हर सीख का एक उद्देश्य था।"

उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने दोबारा जसपाल राणा के साथ काम करना शुरू किया तो ऐसा लगा जैसे वह अपने घर लौट आई हों। "उन्हें हमेशा पता होता था कि मैं आत्मविश्वास से भरी हूं, घबराई हुई हूं या मुझे मानसिक सहारे की जरूरत है। वह हर परिस्थिति में मुझसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने का तरीका ढूंढ़ लेते थे।"

राणा के मार्गदर्शन में मनु भाकर ने अपना आत्मविश्वास दोबारा हासिल किया और शानदार वापसी करते हुए पेरिस ओलंपिक 2024 में एक ही ओलंपिक खेलों में दो पदक जीतने वाली स्वतंत्र भारत की पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।

मनु ने कहा, "मेरे हर पदक, हर सफलता और पोडियम पर बिताए हर पल में उनकी याद हमेशा रहेगी। उन उपलब्धियों में उनका भी उतना ही योगदान है, क्योंकि उन्होंने मेरे करियर के सबसे कठिन समय में भी मुझ पर विश्वास करना नहीं छोड़ा।"

उन्होंने भावुक स्वर में कहा, "उन्होंने मुझे संघर्ष करना, विनम्र बने रहना और कभी हार न मानना सिखाया। उनकी सीख और उनके मूल्य जीवनभर मेरे साथ रहेंगे। अनुशासन और समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी विरासत है, जिसे उन्होंने मुझे हर दिन सिखाया।"

जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ियों की सफलताएं और उनकी सीख आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करती रहेंगी।