नई दिल्ली से आई एक गर्व और ऐतिहासिक खबर में बताया गया है कि भारतीय लैक्रोस टीमों ने राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति C P Radhakrishnan से भेंट की। इस अवसर पर भारतीय पुरुष टीम के कप्तान और ऐतिहासिक गोल्ड जीतने वाले अनुदीप रेड्डी और महिला टीम की कप्तान सुनीता मौजूद थीं। इसके साथ ही, लैक्रोस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी सौरभ और इमरान लारी भी इस दल में शामिल थे।
भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने हाल ही में एशियाई लैक्रोस गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। यह भारत के लिए पहली बार था जब लैक्रोस में गोल्ड मैडल हासिल हुआ। इस दोहरी सफलता ने भारतीय लैक्रोस को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक उभरती शक्ति के रूप में स्थापित किया।
उपराष्ट्रपति ने दोनों टीमों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की और उनके समर्पण को सम्मानित किया। उन्होंने टीमों को बधाई दी और आगे की सफलता के लिए शुभकामनाएँ भी दी। उन्होंने भरोसा जताया कि ये टीमें अपनी जीत की लय बनाए रखकर अक्टूबर 2026 में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले एशिया-पैसिफिक कॉन्टिनेंटल ओलंपिक क्वालिफायर में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगी।
टीम कप्तानों और लैक्रोस एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत में खेल की संरचना और विकास मजबूत हो रहा है। इस ऐतिहासिक दोहरी स्वर्ण जीत ने न केवल देश में गर्व का माहौल बनाया है बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का भी काम किया है।
भारतीय लैक्रोस को अब तेजी से बढ़ते हुए देखा जा रहा है। इस खेल में अनुशासन, अनुकूलन और टीमवर्क का महत्व है। एशियाई स्तर पर यह सफलता खेल के लिए सही समय पर आई है। 2028 में लॉस एंजेलेस ओलंपिक में लैक्रोस के छह खिलाड़ियों के फॉर्मेट में वापसी के मद्देनजर, इस दोहरी स्वर्ण सफलता से भारत की महाद्वीपीय स्थिति और संभावनाएँ मजबूत हुई हैं।
इस जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने की क्षमता रखते हैं। भविष्य में भारत के लिए लैक्रोस में और भी उपलब्धियाँ हासिल करना अब संभव दिख रहा है। युवा खिलाड़ी इस सफलता से प्रेरित होकर इस खेल में और मेहनत करेंगे और देश को गर्व महसूस कराएंगे।
भारत की लैक्रोस टीमों की यह सफलता खेल जगत में एक नई शुरुआत और गौरव का प्रतीक बन गई है।