सुर और सरहदों का संगम: जब भारतीय नन्हे उस्तादों ने जीता अरब का दिल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-04-2026
A Confluence of Melodies and Borders: When Young Indian Maestros Won the Heart of the Arab World
A Confluence of Melodies and Borders: When Young Indian Maestros Won the Heart of the Arab World

 

गुलाम कादिर

दुनिया के नक्शे पर जब जंग की आहटें सुनाई देती हैं तो हर तरफ खौफ और सन्नाटा पसर जाता है। पिछले दिनों जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की समाप्ति को लेकर 21घंटे तक मैराथन बैठक चल रही थी और खाड़ी के देशों में तनाव चरम पर था, तब सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। यह वीडियो किसी मिसाइल या सैन्य ताकत का नहीं था, बल्कि संगीत के उन सुरों का था जो सीधे रूह को छू रहे थे। दुबई के 'मलहार सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स' के 14भारतीय बच्चों ने जब भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का राष्ट्रगान बजाया, तो तनाव भरे माहौल में अचानक शांति और सुकून की लहर दौड़ गई।

ffff

यह खबर सिर्फ एक वीडियो के वायरल होने की नहीं है। यह कहानी उस अहसास की है जिसे 'घर से दूर एक घर' कहा जाता है। 6से 13साल के इन नन्हे संगीतकारों ने सफेद लिबास पहनकर और गले में यूएई के झंडे के रंगों वाला स्कार्फ डालकर जब सितार की तारों को छेड़ा, तो सरहदें धुंधली पड़ गईं।

सितार, तबला, बांसुरी और हारमोनियम की जुगलबंदी ने यूएई के राष्ट्रगान को एक ऐसा नया आयाम दिया कि सुनने वाले दंग रह गए। इंस्टाग्राम से शुरू हुआ यह सफर व्हाट्सएप के जरिए भारत और यूएई के हजारों घरों तक पहुंच गया।

ff

एक होर्डिंग जिसने बदल दी सोच

इस पूरी कोशिश के पीछे 'मलहार' संगीत केंद्र के संस्थापक जोगिराज सिकिदार की एक गहरी सोच थी। जोगिराज पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से यूएई में रह रहे हैं। वे बताते हैं कि जब चारों तरफ युद्ध की चर्चा थी और ईरानी मिसाइलों व ड्रोन हमलों के डर से लोग सहमे हुए थे, तब वे एक दिन हाईवे पर गाड़ी चला रहे थे। सड़क किनारे लगे एक होर्डिंग पर उनकी नजर पड़ी जिस पर लिखा था, 'यूएई में, हर कोई अमीराती है'।

यह एक जुमला भर नहीं था। जोगिराज कहते हैं कि उस एक लाइन ने उनके दिल को गहराई से छू लिया। उन्हें महसूस हुआ कि यह देश हमें अपनी संतान की तरह सुरक्षा दे रहा है। उन्होंने सोचा कि क्यों न संगीत के जरिए इस देश के प्रति अपना प्यार जाहिर किया जाए। उन्होंने तुरंत अपने छात्रों को इकट्ठा किया। समय बहुत कम था और चुनौती बड़ी थी। बच्चों को भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुरों में अरब की उस गौरवशाली धुन को ढालना था।

dd

सितार और तबले पर गूंजी 'ईशी बिलादी' की धुन

यूएई के स्कूलों में रोज राष्ट्रगान 'ईशी बिलादी' बजाया जाता है, लेकिन इसे भारतीय वाद्ययंत्रों पर सुनना एक जादुई अनुभव था। वीडियो में दिखता है कि कैसे नन्हे हाथ लंबी गर्दन वाले सितार पर थिरक रहे हैं। तबले की थाप धुन को गति दे रही है और बांसुरी के ऊंचे सुर उसे एक धागे में पिरो रहे हैं। जलतरंग, सरोद और पखावज जैसे पारंपरिक साजों का इस्तेमाल इस फ्यूजन को और भी समृद्ध बना देता है।

इन बच्चों में 13साल के अर्चित कृष्णन भी शामिल थे जिन्होंने तबला बजाया। अर्चित बताते हैं कि जब वे रियाज कर रहे थे, तो उन्हें एक अजीब सी शांति महसूस हुई। उस वक्त बमबारी के डर से बच्चे घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे थे और पढ़ाई भी ऑनलाइन चल रही थी।

अर्चित का कहना है कि संगीत ने उन्हें मुश्किल वक्त में हौसला दिया। वहीं 12साल की पावकी कुरुप ने सितार संभाला। वे कहती हैं कि सितार की गूंज ने उन्हें 'मजबूत और बहादुर' महसूस कराया। उनके लिए यह धुन सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि उस देश के लिए सम्मान था जो उनकी हिफाजत कर रहा है।

ddd

भारत और यूएई के रिश्तों की नई इबारत

इस वीडियो की सादगी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। कोई तामझाम नहीं, कोई दिखावा नहीं। सिर्फ सफेद बैकग्राउंड और बच्चों के चेहरे पर दिखती मासूमियत। दुबई की शिक्षा संस्था 'केएचडीए' (KHDA) ने इसे अपने सोशल मीडिया पर साझा किया। देखते ही देखते भारतीय दूतावास ने भी इसे 'दोस्ती का दिल छू लेने वाला नजारा' बताकर ट्वीट किया।

खास बात यह है कि इस वीडियो को उन भारतीय परिवारों ने सबसे ज्यादा शेयर किया जिनके रिश्तेदार खाड़ी देशों में रहते हैं। भारत में बैठे माता-पिता को जब यह वीडियो मिला, तो उन्हें न केवल अपने बच्चों की कला पर गर्व हुआ, बल्कि एक संतोष भी मिला कि उनके अपने वहां सुरक्षित और खुश हैं। संगीत ने उस वक्त एक सेतु का काम किया जब कूटनीति और युद्ध की बातें डरा रही थीं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by MalhaarUAE (@malhaaruae)

शांति का पैगाम और बचपन की उम्मीद

9साल की सियोना सेनगुप्ता की बातें सुनकर अहसास होता है कि युद्ध का बच्चों के मन पर क्या असर पड़ता है। सियोना कहती हैं कि बमबारी की खबरों की वजह से वे बाहर नहीं जा पा रही थीं। लेकिन जब उन्होंने इस धुन को बजाया, तो उन्हें 'आजादी' का अहसास हुआ। यह बयान बताता है कि कला कैसे डर पर विजय पाती है।

जोगिराज सिकिदार का यह प्रयोग सफल रहा। उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वह दुनिया की किसी भी धुन को अपने भीतर समा सकता है। हारमोनियम की धौंकनी से निकलने वाली हवा और सितार के खिंचते तारों ने वह काम कर दिया जो घंटों की लंबी बैठकें नहीं कर पाईं, लोगों के दिलों से डर निकालकर वहां प्यार भर दिया।

dd

आज जब यह वीडियो दुनिया भर में देखा जा रहा है, तो यह केवल 14 बच्चों की उपलब्धि नहीं रह गई है। यह एक संदेश है कि संकट के समय में कला और एकता ही सबसे बड़े हथियार होते हैं। यूएई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद ने जब घरों पर झंडा फहराने का आह्वान किया, तो इन भारतीय बच्चों ने अपने संगीत के जरिए उस झंडे को और भी ऊंचा कर दिया। यह वाकई 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना का एक जीवंत उदाहरण है, जहां एक घर (भारत) का संगीत दूसरे घर (यूएई) की शान में बज रहा है।