पिता चलाते हैं जीप, बेटा नुरुल हक़ बगैर कोचिंग बन गए डीएसपी

Story by  मोहम्मद अकरम | Published by  onikamaheshwari • 25 d ago
Father drives jeep, son Nurul Haq became DSP without going for coaching
Father drives jeep, son Nurul Haq became DSP without going for coaching

 

मोहम्मद अकरम / नई दिल्ली

किसी भी काम में सफलता पाने से पहले खुद पर विश्वास होना जरूरी है, इससे लक्ष्य को पूरा करने के दौरान आने वाली कठिनाइयां अपने आप खत्म हो जाती है. बिहार के पूर्वी चम्पारण जिला के रक्सौल अनुमंडल के अंतर्गत आदापुर थाना के बिशनपुरा गांव के रहने वाले नुरुल हक ने बगैर किसी कोचिंग संस्था गए बिहार लोक सेवा आयोग में पूरे बिहार में पुलिस उपाधीक्षक (Deputy Superintendent of Police) में दूसरा स्थान हासिल किया है जबकि इबीसी कैटेगरी में पूरे बिहार में अव्वल स्थान हासिल किया है.
 
इससे पहले भी वह बगैर किसी कोचिंग में गए प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल किया है. नुरुल हक विवाहित है और उनका एक लड़का है. उनके पिता ऐनुल हक रेलवे विभाग में जीप चालक है. तीन भाई में सबसे बड़े नुरुल हक शहर से सुदूर गांव में रहने पढ़ाई करने वालों के लिए मिसाल बन गए हैं.
 

शुरुआती शिक्षा देहरादून, हैदराबाद से इंटर पास

नुरुल हक ने आवाज द वॉइस से बात करते हुए बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के ओक ग्रोव स्कूल में हासिल की और उसके बाद इंटर हैदाराबाद से पास करने के बाद कोलकाता से बीटेक करके जॉब किया. उसके बाद बतौर मरीन इंजीनियर छ साल नौकरी की. कोरोना काल से ही सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी.
 
पहले राजस्व पदाधिकारी, अब बनेंगे डीएसपी

2018 में शादी करने के बाद एक रोज ख्याल आया कि क्यों न बीपीएससी और यूपीएससी की तैयारी किया जाएं, इसके बाद वह इसमें पूरी तरह से लग गया. अपनी पहली कोशिश में जिसका रिजल्ट अक्टूबर में आया था उसमें नुरुल हक ने बीपीएससी में 399 रैंक आया और बतौर राजस्व पदाधिकारी के तौर पर चयनित हुआ था. इस बार BPSC 68th में पूरे राज्य भर में 15वां रैंक हासिल किया और डीएसपी के लिए चयनित हुए हैं. 
 
निरंतर प्रयास का नतीजा है

नुरुल हक कहते हैं कि आज मेरा जो परिणाम सामने हैं उसका मुख्य कारण निरंतर प्रयास है. मेरे पिता ही मेरे आइडियल हैं जिन्होंने हमें हर स्तर पर सहारा दिया.  बीटेक इंजीनियरिंग के बाद अचानक बीपीएससी की तैयारी का ख्याल कैसे आया? इस बारे में नुरुल हक ने कहा कि आप जब घर से शहर की तरफ निकलते हैं, बदलती दुनिया को सामने से देखते हैं तो कुछ अलग करने का ख्याल आ जाता है. 
 
 
पिता ऐनुल हक रेलवे में जीप चालक है

पिता ऐनुल हक रेलवे में जीप चालक और इस समय वह दानापुर में पोस्टेड हैं उन्होंने मामूली तनख्वाह पर अपने तीनों लड़कों को उच्च शिक्षा दिलाया है. नुरुल हक के मुताबिक उनके छोटे भाई स्पोर्टस कोटा से हैदराबाद में नेशनल सतह पर क्रिकेट के खिलाड़ी हैं, सबसे छोटे भाई मरीन इलेक्ट्रिक इंजीनियर है.
 
प्रेरणादायक मेरे पिता ही है

वह आगे कहते हैं कि इस मैदान में मैं इसलिए आया हूं ताकि देश और समाज की सेवा कर सकूं. आप पैसे तो कमा लेंगे लेकिन लोगों से जुड़ कर काम करूंगा. नुरुल हक ने कहा, मेरे प्रेरणादायक मेरे पिता ही है जिन्होंने हब भाईयों को पढ़ाने के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया. 
 
छात्र पुख्ता इरादा करें और प्रतिदिन अखबार को पढ़े

नुरुल हक ने कहा कि अगर कोई भी छात्र बीपीएससी क्रैक करते देश की सेवा करना चाहता है तो वह पुख्ता इरादा करें और प्रतिदिन अखबार को पढ़े. एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के आठवीं, नौवीं, दसवीं और ग्यारहवीं क्लास को अच्छे से पढ़े. उसके प्रश्नों को हल करें, खुद को ज्यादा स्मार्ट बनने के बजाय खामोशी से अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें, सभी विषय के लिए एक सोच बनाए, हमेशा सकारात्मक सोच रखें इससे रिजल्ट अच्छे होंगे.