मोदी-ताकाइची वार्ता: भारत, जापान और फिलीपींस के बीच नए त्रिपक्षीय संवाद पर सहमति

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 03-07-2026
Modi-Takaichi Talks: Agreement on a new trilateral dialogue between India, Japan, and the Philippines.
Modi-Takaichi Talks: Agreement on a new trilateral dialogue between India, Japan, and the Philippines.

 

नई दिल्ली

भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए क्वाड (Quad) ढांचे के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। साथ ही, फिलीपींस के साथ एक नए त्रिपक्षीय नीति संवाद की शुरुआत की तैयारी करने का भी निर्णय लिया गया है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान के बीच बढ़ता द्विपक्षीय सहयोग क्वाड के व्यापक उद्देश्यों को मजबूत करेगा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने क्वाड के चार प्रमुख स्तंभों—समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि (विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में), उभरती एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत—के तहत व्यावहारिक सहयोग को और गहरा करने का संकल्प लिया।

दोनों नेताओं ने आसियान (ASEAN) की केंद्रीय भूमिका और एकता के प्रति अपना अटूट समर्थन दोहराया। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए 'आसियान आउटलुक ऑन इंडो-पैसिफिक' का भी समर्थन किया। इसके साथ ही, क्षेत्रीय स्थिरता को और मजबूत करने के उद्देश्य से भारत, जापान और फिलीपींस के बीच पहली त्रिपक्षीय ‘1.5 ट्रैक’ नीति वार्ता आयोजित करने की तैयारियां शुरू करने पर सहमति बनी।

संयुक्त बयान में आधुनिक प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों का भी उल्लेख किया गया। दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दिशा में दोनों देश वैश्विक वित्तीय तंत्र और बहुपक्षीय पहलों का उपयोग करेंगे, ताकि किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम की जा सके।

भारत और जापान ने एशिया में मजबूत और विविध आपूर्ति अवसंरचना विकसित करने के लिए विश्व बैंक समूह की 'रेजिलिएंट एंड इंक्लूसिव सप्लाई-चेन एन्हांसमेंट पार्टनरशिप' तथा एशियाई विकास बैंक की 'क्रिटिकल मिनरल्स-टू-मैन्युफैक्चरिंग फाइनेंसिंग पार्टनरशिप फैसिलिटी' जैसी पहलों का लाभ उठाने पर भी सहमति व्यक्त की।

ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया। नेताओं ने समुद्री ऊर्जा परिवहन मूल्य श्रृंखला में संयुक्त निवेश और सहयोग की संभावनाओं की तलाश करने पर सहमति जताई। उन्होंने जापान की 'पार्टनरशिप ऑन वाइड एनर्जी एंड रिसोर्सेज रेजिलिएंस', दक्षिण एशिया में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पहलों और क्वाड की 'इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी' पहल की सराहना की। साथ ही, ऊर्जा लचीलापन (एनर्जी रेजिलिएंस) पर संयुक्त बयान को औपचारिक रूप से अपनाने का स्वागत किया।

दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम अनुभवों के आदान-प्रदान पर भी सहमति जताई। इस अवसर पर जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भारत की अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की पूर्ण सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया।

गौरतलब है कि जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न आयामों की समीक्षा की और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।