हरजिंदर
आजकल होर्मुज स्ट्रेट चर्चा में है। यह चर्चा आजकल पश्चिम एशिया में चल रही जंग को लेकर है। लेकिन पूरे इतिहास में इस जगह का भारत से काफी जुड़ाव रहा है। जिसे हम स्पाइस रूट कहते हैं उसका रास्ता होर्मुज से ही गुजरता था। सदियों से अरबी व्यापारी इसी रास्ते से भारतीय मसाले, शक्कर और गुड़ पूरी दुनिया खासकर यूरोप में ले जाते रहे हैं।
मध्यकाल में जब पुर्तगाल ने जब यह तय किया उसे इस मसालों वाले देश पहंुचना है तो उनके नाविक सेनापति ने भी एक सीमा के बाद यही रास्ता अपनाया। इस नाविक का नाम था ओफोंसो डी अल्बरेक, जिनकी गिनती उस दौर के सबसे महान सेनापतियों में होती है।
वे 16वीं सदी की शुरुआत में पुर्तगाल से 16 जहाजों के बेड़े, हथियारों और सैनिकों के साथ निकले। महीनों तक एक लंबी समुद्री यात्रा करते हुए लाल सागर होते हुए वे सोकोतरा नाम के द्वीप पर पहंुचे। अरब सागर का यह सोकोतरा इस समय समय यमन का हिस्सा है। उनके साथ चार-पांच सौ सैनिक थे और स्थानीय शासकों के साथ थोड़ी-बहुत जंग के बाद उन्होंने इस पर कब्जा जमा लिया। हालांकि यह शुरू से ही तय था कि उन्हें यहां रहना नहीं है।

ओफोंसों चाहते तो यहां से सीधे भारत पहंुच सकते थे। लेकिन सोकोतरा में कुछ दिन बिताने के बाद उन्होंने तय किया कि वे उस रास्ते से भारत पहंुचेंगे जिस रास्ते से अरब के व्यापारी मसालों के लिए वहां जाते हैं। और उनके जहाज जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ गए।
ब्रेकिंग 🚨: भारत के लिए LPG लेकर आ रहे पाँच अतिरिक्त जहाज़ फिलहाल Strait of Hormuz से गुजर रहे हैं और इनके अगले हफ्ते तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है।
— Ritika (@Im_Ritikaa) March 29, 2026
इन जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए Indian Navy ने Strait of Hormuz के पास अपनी दो विशेष task… pic.twitter.com/frUNmSq5ji
होर्मुज स्ट्रेट में एक छोटा सी द्वीप है जिसका नाम है होर्मुज। ईरान के लगभग सटे हुए इस द्वीप का कुल क्षेत्रफल है 42 वर्ग किलोमीटर। ओफोंसो ने इसी द्वीप को अपना अगला ठिकाना बनाने की सोची।होर्मुज में उस समय सईफ अद्दीन का शासन था जिसकी उम्र महज 16 साल थी। शासन को उनके वजीर कोगे अतर चलाते थे।
ओफोंसों 25 सितंबर 1507 को जब होर्मुज के तट पर पहंुचे तो उन्हें पुर्तगाल से निकले हुए एक साल हो चुका था। तट पर उनसे मुकाबले के लिए होर्मुज की सेना खड़ी थी।हालांकि ओफोंसो की सेना के मुकाबले होर्मुज की सेना बहुत बड़ी थी। लेकिन वह आधुनिक पुर्तगाली तोपों और बंदूकों का सामना करने के लिए तैयार नहीं थी। थोड़ी से लड़ाई के बाद ही होर्मुज के वजीर ने आत्मसमर्पण का फैसला किया। होर्मुज पर भी ओफोंसो का कब्जा हो गया।
लेकिन ओफोंसो का लक्ष्य होर्मुज पर कब्जा नहीं था। वह भारत जाना चाहता था। कहा जाता है कि वहीं होर्मुज के तट पर ही उसे एक गुजराती जहाज मिला जिससे बाद में भारत पहंुचने में उसे मदद मिली।
💥 NEW BREAKING :
— Global Report Now (@GlobalReportNow) March 24, 2026
Marine traffic data shows, Many of ships are starting to pass through Strait of Hormuz again.
Iran has reportedly approved all GCC, European, and foreign ships for passage at a $2 million $CNY fee, excluding Israeli and American vessels.....View more pic.twitter.com/eX3vPKOdSX
होर्मुज से निकलकर ओफोंसो की सेना सीधे गोवा पहंुची और यहां से शुरुआत हुई भारत के उस हिस्से में पुर्तगाली शासन की।ओफोंसो डी अल्बरेक को 2009 में भारत के पुर्तगाली शासित हिस्सों का वाइसराय बना दिया गया। 2015 में अपनी मौत तक वह इस पद पर रहा।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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