देस-परदेस : बांग्लादेश पर चीनी प्रभाव और भारत से रिश्ते

Story by  प्रमोद जोशी | Published by  [email protected] | Date 04-08-2026
Country-Pardes: Chinese influence on Bangladesh and relations with India
Country-Pardes: Chinese influence on Bangladesh and relations with India

 

प्रमोद जोशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा के दौरान कुछ पर्यवेक्षकों ने टिप्पणी की कि, अपनी एक्ट-ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत सुदूर-पूर्व के देशों के साथ रिश्ते बनाने के पहले अपने निकटतम पड़ोसी बांग्लादेश के साथ संबंध सुधारने का काम क्यों नहीं करता? अब समय आ रहा है, जब इस सवाल का जवाब मिल सकता है.

भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को नई दिल्ली में 12-13सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है. हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने इस निमंत्रण पर अभी कोई निर्णय नहीं किया है, पर इससे कुछ संकेत मिलेंगे.

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नया फौजी-गठबंधन

इस विषय पर आगे बात करने के पहले एक नई खबर पर भी ग़ौर करना चाहिए. सऊदी अरब ने एक समुद्री-सुरक्षा गठबंधन की घोषणा की है, जिसमें पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश समेत 13देश शामिल हैं.

देश के रक्षा मंत्रालय द्वारा 30जुलाई को जारी बयान के अनुसार, इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य, लाल सागर और अदन की खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

अलजज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस गठबंधन के शेष 13सदस्य हैं तुर्की, कुवैत, बहरीन, क़तर, जॉर्डन, मिस्र, पाकिस्तान, जिबूती, सोमालिया, बांग्लादेश, यमन, सूडान और कोमोरोस. संयुक्त अरब अमीरात और ओमान, जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं, इस गठबंधन में शामिल नहीं हैं.

यह गठबंधन ईरान के नेतृत्व वाले ‘प्रतिरोध की धुरी’ के विरुद्ध भी है, पर इसके पीछे के अंतर्विरोध भी स्पष्ट हैं. बांग्लादेश और सऊदी सैन्य-सहयोग का इतिहास नया नहीं है. बांग्लादेश ने नब्बे के दशक में खाड़ी युद्ध के दौरान सऊदी-सुरक्षा के लिए सैनिक भी भेजे थे, पर इस गठबंधन में पाकिस्तान और तुर्की के शामिल होने के कारण भारत-बांग्लादेश रिश्तों से जुड़े कुछ सवाल ज़रूर खड़े होंगे.

भारत-बांग्ला सहयोग

बहरहाल इस समय बड़ा मसला भारत-बांग्ला सहयोग का है. क्या दोनों देश आपसी संबंधों पर बात करेंगे? एक संकेत गंगा जलसंधि के नवीनीकरण और उसकी समीक्षा से भी मिलेगा, जो इस साल होनी है.

1996में हुई गंगा जलसंधि की 30वर्षीय अवधि समाप्त होने के साथ, इसके भविष्य को लेकर चर्चाएँ तेज़ हैं. 1996जैसी परिस्थितियाँ अब नहीं हैं. निश्चित रूप से अगली संधि की वार्ता का दायरा बढ़ेगा.

भारत ने तारिक रहमान को ब्रिक्स सम्मेलन का निमंत्रण इसलिए दिया है, क्योंकि बांग्लादेश इस समय बिम्सटेक का अध्यक्ष है. इससे द्विपक्षीय-वार्ता की संभावना व्यक्त नहीं हो रही है. यानी कि भारत अपनी तरफ से बहुत उत्साह व्यक्त करना नहीं चाहता है.

Bangladesh Hands Over Teesta Project to China; India Investment Rejected

शेख हसीना

अगस्त 2024में शेख हसीना के पराभव के पहले दोनों देशों के रिश्ते बेहतर थे भी. पर करीब डेढ़ साल तक डॉ यूनुस के नेतृत्व में चली अस्थायी सरकार के दौरान ये रिश्ते बिगड़े. इस क्षेत्र में राजनीतिक-अस्थिरता के कारण क्षेत्रीय-सहयोग की स्थितियाँ बन नहीं पा रही हैं.

राजनीतिक-दृष्टि से सबसे बड़ा संकेत शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी की संभावना से मिलेगा. उन्होंने कहा है कि मैं इस साल के अंत में देश वापस जा सकती हूँ. खबर यह भी है कि वे 5अगस्त को पहली बार दिल्ली में विदेशी पत्रकारों के एक कार्यक्रम में उपस्थित होंगी.

बांग्लादेश से पलायन के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक-उपस्थिति होगी. क्या इसे किसी प्रकार का डिप्लोमेटिक-संदेश मानें? हाल में उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि, मैं दिसंबर में अपनी पार्टी के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हूँ, जो देश छोड़कर बाहर चले गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मैं आत्मसमर्पण करने पर विचार कर रही हूँ.

जुलाई विद्रोह से संबंधित शेख हसीना के खिलाफ देशभर में 663मामले दर्ज हैं. इनमें से 453हत्या के मामले हैं. रॉयटर्स को दिए साक्षात्कार में शेख हसीना ने देश में अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों के बारे में कहा, ‘मुझे लगता है कि एक बार मुकदमा शुरू हो जाए तो लोगों को यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह अदालत कितनी हास्यास्पद है. मैं इसे साबित करना चाहती हूँ.’

बंगाल की खाड़ी

बंगाल की खाड़ी क्षेत्र बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक दुनिया के सबसे एकीकृत क्षेत्रों में से एक था, लेकिन 1940के दशक के बाद, जब इस क्षेत्र के सदस्य स्वतंत्र हो गए और उन्होंने अलग-अलग लक्ष्य और गठबंधन प्रणालियाँ अपनाईं, तो इस क्षेत्र की सामुदायिक-सहयोग भावना लगभग कमज़ोर होती चली गई.

अपने गठन के बाद पहली बार, संगठन ने अगले पाँच साल की प्राथमिकताओं और लक्ष्यों को रेखांकित करने वाला एक ‘बैंकॉक विज़न 2030’ स्टेटमेंट अपनाया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र को समृद्ध और लचीला बनाना है. बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौता बातचीत के चरण में है.

यह सहयोग आगे बढ़ता उसके पहले ही भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तल्खी आने लगी. हालाँकि यह तल्खी उस किस्म की नहीं है, जैसी पाकिस्तान के साथ है, पर कमोबेश यह आर्थिक-सहयोग को प्रभावित कर रही है.

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चीन-यात्रा

हाल में जब बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान जब अपनी पहली विदेश-यात्रा पर निकले, तो उन्होंने मलेशिया होते हुए चीन जाना पसंद किया, जिससे उनकी प्राथमिकता का पता लगता है. उन्होंने मोंगला बंदरगाह परियोजना से भारत को हटाकर चीन को भागीदार बनाने का फैसला भी किया है.

चीन चाहता है कि म्यांमार के रास्ते एक आर्थिक कॉरिडोर बनाया जाए, जो चीन-पाकिस्तान सी-पैक जैसा हो. इससे चीन का प्रभाव इस इलाके पर बढ़ेगा.संकेत मिल रहे हैं बांग्लादेश सरकार तीस्ता मास्टर प्लान में भी चीन की मदद लेना चाहती है.

प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता महदी अमीन ने हाल में कहा है कि तीस्ता नदी प्रबंधन के मास्टर प्लान की शुरुआत से ही चीन जरूरत पड़ने पर तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर रहा है. यानी, सर्वेक्षण, परियोजना डिजाइन से लेकर कार्यान्वयन तक हर चरण में शामिल होने में चीन रुचि रखता है.

तीस्ता-समझौता

अवामी लीग के शासनकाल में चीन ने कुछ सर्वेक्षण कार्य भी किया था, लेकिन भारत की आपत्तियों के कारण सरकार ने हाथ रोक दिया. विश्लेषकों का कहना है कि तीस्ता प्रबंधन परियोजना को लागू करने के लिए भारत के साथ जल-बँटवारे का समझौता भी एक आवश्यक घटक है. अब बीएनपी सरकार का चुनावी वादा तीस्ता परियोजना को लागू करना है.

पिछले दिनों ढाका में चीनी राजदूत याओ वेन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ढाका के अनुरोध पर चीन ने तीस्ता मेगा-प्रोजेक्ट की पहल की है, जो उत्तरी क्षेत्र के लोगों के जीवन और आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है.

भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने वाली 54नदियों में से एक, तीस्ता भारत में स्थित सोलोमन झील से निकलती है, सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए रंगपुर जिले के रास्ते बांग्लादेश में प्रवेश करती है. बाद में यह कुरीग्राम जिले के चिलमारी के पास ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है.

तारिक रहमान की चीन-यात्रा के दौरान विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों में आर्थिक गलियारा और तीस्ता परियोजना संवेदनशील मुद्दे थे. इन दोनों को लेकर भारत के अलावा अमेरिका की आपत्तियाँ भी हैं. इन संभावित परियोजनाओं का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि बांग्लादेश इस बहुआयामी प्रतिद्वंद्विता को सहयोग में कितनी कुशलता से परिवर्तित कर पाएगा.

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मोंगला बंदरगाह

बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट इकोनॉमिक ज़ोन के विकास के लिए चाइना सिविल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन के साथ औपचारिक रूप से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह परियोजना मूल रूप से 2015की द्विपक्षीय पहल के तहत भारत के लिए आरक्षित थी, लेकिन देरी और निर्माण कार्य शुरू न हो पाने के कारण ढाका ने 2025में भारतीय योजना को सूची से हटा दिया.

बंगाल की खाड़ी भारत-चीन प्रतिद्वंद्विता में एक विवादित क्षेत्र बनता जा रहा है. भारत की सीमा से मोंगला की निकटता और क्षेत्रीय व्यापार गलियारों में उसकी भूमिका इसे दक्षिण एशिया की समुद्री भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है.

चटोग्राम के बाद मोंगला बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है. यह कोलकाता से 200किलोमीटर से भी कम और भारतीय सीमा से लगभग 80किलोमीटर की दूरी पर सुंदरबन डेल्टा के निकट स्थित है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि यह बंगाल की खाड़ी तक पहुँच प्रदान करता है और भारत के भू-आबद्ध उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए एक संभावित प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है.

2018से भारत को माल ढुलाई के लिए मोंगला और चटोग्राम बंदरगाहों का उपयोग करने की अनुमति दी गई है, जिससे सँकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता कम हुई है. चीन के प्रवेश से अब यह संतुलन बिगड़ने का खतरा है.

चीनी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में गठबंधन और बंदरगाहों तक अपनी पहुँच से जुड़े समझौते करके अपनी रणनीति में निवेश कर रहा है. बिम्सटेक, सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र और बांग्लादेश के साथ बोंगोसागर जैसे द्विपक्षीय अभ्यासों के माध्यम से की गई पहल बंगाल की खाड़ी में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाती हैं.

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बांग्ला अंतर्विरोध

चीन ने पहली बार बांग्लादेश, चीन, भारत और म्यांमार के बीच एक आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव 2013में रखा था, लेकिन भारत की आपत्तियों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई. बाद में, चीन ने भारत को छोड़कर म्यांमार के साथ एक आर्थिक गलियारा बनाने की योजना बनाई, और इसमें बांग्लादेश को शामिल करने का मुद्दा उठा.

चीन ने अब म्यांमार होते हुए कुनमिंग, चीन से बांग्लादेश तक एक आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव रखा है. इसका प्रस्ताव चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की ओर से आया है. उन्होंने गत 22जून को तारिक रहमान के साथ हुई बैठक के दौरान आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव रखा था.

बांग्लादेश सरकार मानती है कि यदि यह कॉरिडोर बना, तो बांग्लादेश के आर्थिक क्षेत्रों में चीनी निवेश बढ़ेगा. बांग्लादेशी सामान चीन सहित दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में अधिक आसानी से प्रवेश कर सकेगा. माल परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों में काफी कमी आएगी.

अमेरिका के बांग्लादेश के साथ हुए एक समझौते की एक शर्त जिस पर काफी चर्चा और बहस हुई है, वह यह है कि बांग्लादेश किसी भी तीसरे देश के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ हो. यह शर्त चीन और रूस को निशाना बनाने के लिए जोड़ी गई थी.

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