कश्मीर के ‘रबर बॉय’ सायम हैदर: संघर्ष को मात देकर दुनिया में नाम कमाने का सपना

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 28-10-2026
Kashmir’s ‘Rubber Boy’ Sayam Haider: Dreaming of making a mark on the world by overcoming poverty, injury, and struggle
Kashmir’s ‘Rubber Boy’ Sayam Haider: Dreaming of making a mark on the world by overcoming poverty, injury, and struggle

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली

जम्मू-कश्मीर के उत्तरी कश्मीर से आने वाले सायम हैदर की कहानी जुनून, संघर्ष, पारिवारिक भावनाओं और आत्मविश्वास की मिसाल है। सीमित संसाधनों, आर्थिक परेशानियों और चोटों के बावजूद अपनी असाधारण शारीरिक लचक के दम पर पहचान बनाने वाले सायम आज ‘रबर बॉय ऑफ कश्मीर’ के नाम से जाने जाते हैं। उनकी कला ऐसी है कि दर्शक हैरान रह जाते हैं। गर्दन को लगभग 180 डिग्री तक घुमाना, हाथ-पैरों को असाधारण तरीके से मोड़ना और बिना तारों वाले टेनिस रैकेट के फ्रेम से पूरा शरीर निकालना उनके चर्चित करतबों में शामिल हैं। लेकिन इस पहचान के पीछे वर्षों का अभ्यास, परिवार की चिंता, एक दिवंगत अंकल का विश्वास और बड़े मंचों तक पहुंचने का अधूरा सपना छिपा है।

Kashmir’s ‘Rubber Boy’: Sayam Haider can rotate his neck 180 degrees and pass right through a tennis racket.
 
13 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर

सायम ने महज 13 साल की उम्र में डांस और शरीर की असामान्य गतिविधियों में दिलचस्पी लेना शुरू किया। वर्ष 2010 के आसपास इंटरनेट पर वीडियो देखकर वह अलग-अलग मूवमेंट्स सीखने और उन्हें दोहराने की कोशिश करते थे। धीरे-धीरे उनका झुकाव पॉपिंग, एनीमेशन डांस, योग और कॉन्टॉर्शन की ओर बढ़ा। कॉन्टॉर्शन ऐसी कला है, जिसमें कलाकार शरीर को असाधारण तरीके से मोड़ने और संतुलित करने का प्रदर्शन करता है। सायम के पास न कोई बड़ा प्रशिक्षण केंद्र था और न ही आधुनिक उपकरण। उन्होंने यूट्यूब और सोशल मीडिया वीडियो को सीखने का माध्यम बनाया और घर पर ही अभ्यास शुरू कर दिया। वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने अपनी कला को बेहतर बनाया। इस दौरान हाजिन के मार्शल आर्ट्स शिक्षक अफाक सादी ने भी उन्हें स्ट्रेचिंग और लचीलापन बढ़ाने की तकनीकों को समझने में मदद की।
 
डांस वीडियो से नहीं मिली पहचान, कॉन्टॉर्शन ने बदली किस्मत

शुरुआत में सायम सोशल मीडिया पर डांस वीडियो साझा करते थे, लेकिन उन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिली। इसके बाद कॉन्टॉर्शन और आर्म कंटॉर्शन से जुड़ा एक वीडियो देखकर उन्होंने इस कला को सीखने का फैसला किया। जब उन्होंने अपने अनोखे करतबों के वीडियो साझा किए, तो लोगों की प्रतिक्रिया बढ़ने लगी और उनका एक वीडियो वायरल हो गया। इस सफलता ने उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने का आत्मविश्वास दिया। धीरे-धीरे उनकी असाधारण लचक और अनोखे प्रदर्शन चर्चा में आने लगे। लोग उनके शरीर की तुलना रबर से करने लगे और इसी तरह उन्हें ‘रबर बॉय ऑफ कश्मीर’ नाम मिला। उनके लिए यह नाम वर्षों के अभ्यास और लगातार कोशिशों का प्रतीक बन गया।
 
टेनिस रैकेट से शरीर निकालने का रिकॉर्ड

सायम के सबसे चर्चित करतबों में बिना तारों वाले टेनिस रैकेट के फ्रेम से पूरा शरीर निकालना शामिल है। उन्होंने बताया कि एक अमेरिकी कलाकार का वीडियो देखकर उन्हें इस करतब को सीखने की प्रेरणा मिली थी। उस कलाकार को एक मिनट में दो बार यह प्रदर्शन करते देखकर सायम ने इसे बेहतर तरीके से करने की चुनौती स्वीकार की। लगातार अभ्यास के बाद सायम के मुताबिक, उन्होंने एक मिनट में पांच बार रैकेट के फ्रेम से अपना पूरा शरीर निकाला। जुलाई 2025 में इस उपलब्धि को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मान्यता मिलने की बात उन्होंने बताई। वह भारत बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़े सम्मानों का भी उल्लेख करते हैं। उनके अनुसार, उनके नाम चार अंतरराष्ट्रीय बुक रिकॉर्ड और अन्य रिकॉर्ड भी दर्ज हैं।
 
उनकी दूसरी चर्चित विशेषता गर्दन को लगभग 180 डिग्री तक घुमाने का प्रदर्शन है। ‘आवाज द वॉइस’ के साथ बातचीत में भी उन्होंने यह करतब दिखाया। हालांकि, ऐसी गतिविधियों में गंभीर चोट का खतरा होता है। इसलिए इन्हें प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख और उचित सुरक्षा के बिना दोहराना खतरनाक हो सकता है।
 
फ्रैक्चर, चोट और सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष

सायम की यात्रा हमेशा आसान नहीं रही। आर्म कंटॉर्शन का अभ्यास करते समय उनका बायां हाथ फ्रैक्चर हो गया था। उन्होंने बताया कि चोट के बाद हाथ हिलाना भी मुश्किल हो गया था। जिस शरीर को वह अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते थे, उसी की चोट ने उन्हें कुछ समय के लिए रोक दिया। हालांकि, चोट से उबरने के बाद उन्होंने अपनी कला पर दोबारा काम शुरू किया। टेनिस रैकेट वाले करतब का अभ्यास करते समय भी उन्हें चोटें लगीं। सुरक्षित प्रशिक्षण केंद्र और जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने अपने घर को ही अभ्यास का ठिकाना बनाया। उन्होंने शीट और आईने लगाए तथा उपलब्ध संसाधनों से अपनी तकनीक सुधारने की कोशिश की।
 
आर्थिक तंगी भी उनके संघर्ष का बड़ा हिस्सा रही। सायम के मुताबिक, एक समय उनके पास जूते और कपड़े खरीदने तक के पैसे नहीं थे। अपने जरूरी खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम किए, लेकिन अभ्यास जारी रखा। बाद में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और दर्शकों की संख्या बढ़ने से उन्हें कमाई के अवसर मिलने लगे। इस आय ने उन्हें अपने अभ्यास और उपकरणों पर खर्च करने में मदद की।
 
How does he DO that?! - Kashmir's 'Rubber Boy' twists head 180 degrees and  squeezes entire body through tennis racket | Video Viory
 
मां की चिंता और अंकल का विश्वास

सायम की कहानी में परिवार की भावनाएं भी गहराई से जुड़ी हैं। जब उन्होंने घर पर कठिन करतब करने शुरू किए, तो उनकी मां चिंतित रहती थीं। उन्हें डर था कि कहीं उनका बेटा गंभीर रूप से घायल न हो जाए। शुरुआती दिनों में सायम को घर में छिपकर अभ्यास करना पड़ता था। लेकिन जब उनके वीडियो लोकप्रिय होने लगे, तो परिवार का नजरिया धीरे-धीरे बदलने लगा। उनकी जिंदगी का सबसे भावुक पहलू उनके अंकल से जुड़ा है। सायम बताते हैं कि जब दूसरे लोग उनकी कला और भविष्य को लेकर संदेह करते थे, तब उनके अंकल उनका हौसला बढ़ाते थे। वह कहते थे कि एक दिन सायम अपना नाम कमाएंगे और अपनी मेहनत से पैसे कमाने में सफल होंगे। आज उनके अंकल इस दुनिया में नहीं हैं। सायम के लिए उनकी कही बातें अब भी प्रेरणा का स्रोत हैं। जब वह अपनी उपलब्धियों और लोगों से मिल रही पहचान को देखते हैं, तो उन्हें अंकल का विश्वास याद आता है। उनकी सफलता केवल खुद को साबित करने का माध्यम नहीं, बल्कि उस इंसान की उम्मीदों को याद रखने का तरीका भी है, जिसने कठिन समय में उन पर भरोसा किया था।
 
 
पांच लाख से अधिक यूट्यूब सब्सक्राइबर, देशभर में प्रदर्शन

सायम ने बताया कि उनके यूट्यूब चैनल ‘रबर बॉय ऑफ कश्मीर’ पर पांच लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। इंस्टाग्राम पर भी उनके हजारों फॉलोअर्स हैं। सोशल मीडिया ने उनकी कला को कश्मीर से बाहर व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह चंडीगढ़, अमृतसर, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर सहित विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन कर चुके हैं। उनके मुताबिक, उन्हें पुलिस और सेना से जुड़े कार्यक्रमों में भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। इसके अलावा, वह जम्मू की एक अकादमी में लगभग एक-दो साल तक बच्चों को डांस और योग सिखा चुके हैं। उनका प्रदर्शन केवल करतबों तक सीमित नहीं है। वह कार्यक्रम से एक-दो दिन पहले घर पर अभ्यास करके प्रस्तुति की योजना बनाते हैं और तय करते हैं कि मंच पर कौन-सा करतब किस क्रम में करना है।
 
‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ से ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ तक पहुंचने की इच्छा

सायम का सपना अपनी मौजूदा पहचान से आगे बढ़कर ‘रबर बॉय ऑफ इंडिया’ बनने का है। उन्होंने बताया कि ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ के लिए उनका चयन हुआ था, लेकिन इसी दौरान उनके अंकल का निधन हो गया। इस दुखद घटना के कारण वह आगे की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके। यह उनके लिए एक भावनात्मक झटका था, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोड़ने का फैसला नहीं किया। अब उनकी नजर ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर है। वह अपनी कला के जरिए भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। हालांकि, पर्याप्त स्पॉन्सरशिप और आर्थिक सहयोग की कमी उनके लिए बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने के लिए जरूरी प्रशिक्षण, उपकरणों और यात्रा की व्यवस्था करना उनके लिए आसान नहीं है।
 
 
अनुशासित दिनचर्या और युवाओं के लिए संदेश

सायम अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए नियमित अभ्यास करते हैं। वह सुबह लगभग एक घंटे तक कॉन्टॉर्शन का अभ्यास करने, टहलने और डांस करने की बात बताते हैं। शाम को जिम जाना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनके खानपान में सलाद, सब्जियां, दाल और चावल जैसी चीजें शामिल हैं। वह युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, मेहनत करने और नशे से दूर रहने की सलाह देते हैं। साथ ही, वह प्रशिक्षित कोच की मदद लेने पर जोर देते हैं। उनका अपना अनुभव बताता है कि इंटरनेट से शुरुआती जानकारी मिल सकती है, लेकिन कठिन शारीरिक करतबों के लिए सही तकनीक, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और सुरक्षित प्रशिक्षण बेहद जरूरी हैं। सायम फिलहाल दूसरे युवाओं को प्रशिक्षण देने के बजाय अपनी कला को और बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहते हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में उन्हें बेहतर उपकरण, सुरक्षित प्रशिक्षण की सुविधा और आर्थिक सहयोग मिले, ताकि वह बड़े मंचों पर प्रदर्शन की तैयारी कर सकें।
 
 
रिकॉर्ड से बड़ा है संघर्ष

सायम हैदर की कहानी केवल असाधारण शारीरिक लचक या सोशल मीडिया की लोकप्रियता की कहानी नहीं है। यह उस किशोर की यात्रा है, जिसने इंटरनेट वीडियो देखकर सीखना शुरू किया, डांस से पहचान बनाने में कठिनाइयां झेलीं, फ्रैक्चर और चोटों का सामना किया तथा आर्थिक परेशानियों के बावजूद अभ्यास जारी रखा। उनकी मां की चिंता, अंकल का विश्वास और सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखने की कोशिश इस कहानी को भावनात्मक बनाती है। आज वह ‘रबर बॉय ऑफ कश्मीर’ के नाम से पहचाने जाते हैं, लेकिन उनकी नजर अभी भी आगे की मंजिल पर है।
 
सायम चाहते हैं कि एक दिन वह ‘रबर बॉय ऑफ इंडिया’ बनें और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कला दिखाएं। उनका सफर अभी जारी है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि प्रतिभा को पहचान दिलाने के लिए जुनून और मेहनत के साथ सही मार्गदर्शन, सुरक्षित प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और अवसर भी जरूरी हैं। कश्मीर के इस युवा कलाकार ने अभावों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और अब वह अपने सपनों को दुनिया के सामने साकार होते देखना चाहते हैं।
 
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