बेसहारा रुकैया बीबी को मिला सहारा, जिंदगीभर भोजन देगा ‘Asahayer Bandhu’

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 28-10-2026
Destitute Rukaiya wife gets support, 'Asahayer Bandhu' will provide food for the rest of her life.
Destitute Rukaiya wife gets support, 'Asahayer Bandhu' will provide food for the rest of her life.

 

तरुण नंदी /कोलकाता

इंसानियत और भलाई का असली चेहरा यही है। एक बुजुर्ग महिला, जो लंबे समय से बिल्कुल अकेली थीं और दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर थीं, आखिरकार उनकी जिंदगी में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। जब एक स्थानीय पत्रकार ने रुकैया बीबी की इस लाचारी और दर्दनाक हालत को अपने कैमरे में कैद किया, तो सामाजिक संस्था ‘असहायएर बंधु’ (असहायों का दोस्त/Asahayer Bandhu) मदद के लिए आगे आई।

संस्था के सदस्यों को जैसे ही उनकी इस हालत का पता चला, वे तुरंत भोजन लेकर उनके पास पहुँच गए। लेकिन यह मदद सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी। संस्था के सदस्यों ने रुकैया बीबी के पूरे जीवन के भोजन की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया है। लंबे समय तक भूख, तंगी और अनिश्चितता का दंश झेलने के बाद, अब रुकैया बीबी को एक नया भरोसा मिला है कि वे अपनी बाकी जिंदगी सुकून और शांति के साथ बिता सकेंगी।

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रुकैया बीबी उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर स्थित सारापुल गाँव की रहने वाली हैं। अब तक वे खराब स्वास्थ्य, लाचारी और अकेलेपन से जूझ रही थीं। हर दिन दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना और उसके साथ जुड़ी अन्य शारीरिक परेशानियां उनकी जिंदगी को बहुत मुश्किल बना चुकी थीं।

पेट भरने के लिए खाना मिलेगा या नहीं, इस अनिश्चितता ने उनके जीवन को लील रखा था। इस कड़वी सच्चाई को एक मीडियाकर्मी ने अपने कैमरे में उतारा। जैसे ही रुकैया बीबी की बेबसी की तस्वीरें सामने आईं, ‘असहायएर बंधु’ के सदस्यों ने एक पल की भी देरी नहीं की।

खबर मिलते ही संस्था के सदस्य तुरंत रुकैया बीबी के घर पहुँचे। उन्होंने उन्हें भोजन तो दिया ही, साथ ही एक बहुत बड़ा भरोसा भी दिया। संस्था के सदस्यों ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी ली कि रुकैया बीबी को अब अपने बाकी जीवन में भोजन के लिए कभी चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

किसी बेबस और संकटग्रस्त इंसान की तरफ मदद का हाथ बढ़ाने की यह पहल वाकई दिल को छू लेने वाली मिसाल है। उनकी ढाल बनकर खड़ी हुई इस संस्था का नाम ‘असहायएर बंधु’ है। भले ही इस संस्था की शुरुआत हुए अभी महज पाँच साल ही हुए हैं, लेकिन स्वरूपनगर और आसपास के इलाकों में गरीब और बेसहारा लोगों की मदद के लिए इसके प्रयास इंसानियत की एक बेहतरीन मिसाल बन चुके हैं।

हालाँकि, ‘असहायएर बंधु’ का यह सफर इतना आसान नहीं रहा है। इस संस्था को कदम-कदम पर कई तरह की रुकावटों, आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। भीषण तूफान, मूसलाधार बारिश और प्राकृतिक आपदाएँ भी इसके सदस्यों को उनके कर्तव्यों से डिगा नहीं पाई हैं।

इस संस्था के हर एक सदस्य के लिए समाज सेवा किसी खास मौके पर किया जाने वाला काम नहीं है, बल्कि यह उनका रोज का संकल्प है। उनका मकसद सड़क किनारे रहने वाले असहाय, भूखे और लाचार लोगों तक साल के पूरे 365 दिन पका हुआ भोजन पहुँचाना है। उनका मानना है कि जरूरतमंदों के साथ खड़े होने के लिए किसी बहुत बड़े तामझाम की जरूरत नहीं होती; बस मदद का हाथ बढ़ाने की एक सच्ची इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

समय के साथ ‘असहायएर बंधु’ के काम का दायरा और बढ़ता गया है। आज जब भी इस संस्था को स्वरूपनगर या आसपास के इलाकों में किसी बेघर या मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के बदहाली में होने की खबर मिलती है, तो इसके सदस्य पूरे दिल से उनकी मदद करने पहुँच जाते हैं।

इसके अलावा, गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई-लिखाई में सहूलियत देने के लिए संस्था पठन-पाठन की सामग्री भी वितरित करती है। आपातकालीन सामाजिक जरूरतों से लेकर आम लोगों के इलाज और चिकित्सीय सहायता तक, वे अपनी पूरी क्षमता से योगदान देते हैं।

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जानकारी के मुताबिक, संस्था के इस निरंतर अभियान को कई दानदाताओं, शुभचिंतकों और दरियादिल लोगों का समर्थन मिलता है। लोगों का यही विश्वास और स्नेह इस संस्था की सबसे बड़ी ताकत है। इसी जनसमर्थन के दम पर इसके सदस्य आगे चलकर और भी ज्यादा बेसहारा लोगों तक पहुँचने का सपना देख रहे हैं।

आज के इस दौर में, जब पूरी दुनिया में पहचान, धर्म और जाति के नाम पर मतभेद और विभाजन की बातें होती रहती हैं, ऐसे में ‘असहायएर बंधु’ की यह पहल इस बात की सबसे बड़ी गवाह है कि भूख का कोई धर्म नहीं होता, लाचारी की कोई जाति नहीं होती और इंसानियत किसी सीमा में नहीं बंधती।