केरल के सादिक अहमद ने कंदूरा पहनकर लंदन मैराथन में बनाया गिनीज रिकॉर्ड

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 01-05-2026
Sadiq Ahmed from Kerala Sets Guinness Record at London Marathon While Wearing a Kandura.
Sadiq Ahmed from Kerala Sets Guinness Record at London Marathon While Wearing a Kandura.

 

मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली

यह कहानी है केरल के एक साधारण से दिखने वाले असाधारण युवक की, जिसने लंदन की सड़कों पर इतिहास रच दिया। जब दुनिया के सबसे तेज़ धावक लंदन मैराथन में अपनी रफ्तार का लोहा मनवा रहे थे, तब एक शख्स ऐसा भी था जो अपनी जड़ों और अपनी पहचान को सीने से लगाए दौड़ रहा था। 36 साल के सादिक अहमद ने जब अरबों की पारंपरिक पोशाक 'कंदूरा' पहनकर और हाथ में यूएई का झंडा लेकर दौड़ना शुरू किया, तो देखने वाले बस देखते रह गए।

सादिक ने न केवल यह मुश्किल दौड़ पूरी की, बल्कि 3घंटे 19 मिनट और 20 सेकंड में 42.2 किलोमीटर का सफर तय कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं थी। कंदूरा पहनकर इतनी लंबी दूरी तय करना और वह भी विश्व रिकॉर्ड की गति से, यह सादिक के पक्के इरादे को दर्शाता है।

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केरल से अबू धाबी और फिर लंदन का सफर

सादिक अहमद मूल रूप से दक्षिण भारतीय राज्य केरल के कन्नूर के रहने वाले हैं। वह साल 2012 से यूएई में रह रहे हैं और वहां तेल एवं गैस उद्योग में फायर सेफ्टी प्रोफेशनल के तौर पर कार्यरत हैं। उनके पिता पिछले 42सालों से यूएई में हैं। सादिक के लिए यूएई सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि उनका घर है।

मैराथन पूरी करने के बाद जब उन्हें सर्टिफिकेट दिया गया, तो उनकी आंखों में जीत की चमक और दिल में यूएई के प्रति सम्मान साफ झलक रहा था। उन्होंने अपनी इस जीत को यूएई को समर्पित किया। सादिक का कहना है कि एक निवासी के तौर पर इस देश ने उन्हें वह सब कुछ दिया है जो वह आज हैं। मुश्किल वक्त में भी इस देश ने उन्हें सुरक्षित महसूस कराया और रोजी-रोटी दी। यह दौड़ उनके लिए आभार प्रकट करने का एक जरिया थी।

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कंदूरा में दौड़ना: एक बड़ी चुनौती

आमतौर पर धावक हल्के और हवादार कपड़े पहनकर दौड़ते हैं ताकि हवा का प्रतिरोध कम हो और शरीर को आराम मिले। लेकिन सादिक ने कंदूरा चुना। उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने तीन महीने तक विशेष ट्रेनिंग ली। वह हर हफ्ते कंदूरा पहनकर ही अभ्यास करते थे ताकि उन्हें इसकी आदत हो जाए।

सादिक बताते हैं कि दौड़ने वाले ट्राउजर के मुकाबले कंदूरा में दौड़ना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। पैरों के चलने-फिरने में बाधा आती है और पसीना भी ज्यादा निकलता है। लेकिन उनका लक्ष्य साफ था। उन्होंने पहले भी फायर ऑफिसर की वर्दी और कॉर्पोरेट सूट पहनकर मैराथन पूरी की है। उनका मानना है कि अगर आप कुछ करना चाहते हैं, तो कपड़े या वक्त की कमी कभी बहाना नहीं बन सकते।

मैदान पर गूंजा 'हबीबी'

27 अप्रैल को जबसादिक हाथ में झंडा लिए फिनिश लाइन की ओर बढ़ रहे थे, तो वहां मौजूद भीड़ का उत्साह देखने लायक था। लोग चिल्ला रहे थे-'ओह अमीराती, हबीबी!' सादिक कहते हैं,”वह पल उनके लिए बेहद गर्व का था। लाखों लोगों के सामने अपनी पहचान के साथ खड़े होना और देश का मान बढ़ाना उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है।“

उनकी इस उपलब्धि ने सोशल मीडिया पर भी धूम मचा दी है। यूएई के स्थानीय लोग और वहां रहने वाले अन्य प्रवासी सादिक को बधाइयां दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने अमीराती संस्कृति को एक वैश्विक मंच पर बहुत ही खूबसूरती और सम्मान के साथ पेश किया है।

अनुशासन और सादगी ही सफलता का मंत्र

सादिक की सफलता के पीछे एक कड़ा अनुशासन छिपा है। वह हर हफ्ते लगभग 90 से 100 किलोमीटर दौड़ते हैं। उनका मानना है कि चाहे आप काम से कितने भी थके हों या जिंदगी में कितनी भी उथल-पुथल हो, अनुशासन कभी नहीं टूटना चाहिए।

सिर्फ दौड़ना ही नहीं, उनका खान-पान भी बहुत सख्त है। सादिक चीनी और तैलीय खाने से पूरी तरह परहेज करते हैं। उनके भोजन में प्रोटीन, शकरकंद और सीमित मात्रा में अच्छे कार्बोहाइड्रेट शामिल होते हैं। 173 सेंटीमीटर लंबे सादिक का वजन आज भी 68किलो है, जो उनकी फिटनेस के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

सादिक अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपनी पत्नी को देते हैं। वह उन्हें अपना सबसे बड़ा सहारा मानते हैं। उनके दो छोटे बच्चे भी अपनी पिता की इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे हैं।

लंदन मैराथन: रिकॉर्ड्स का मेला

इस साल की लंदन मैराथन कई मायनों में ऐतिहासिक रही। केन्याई धावक सबस्टियन सावे ने दो घंटे की बाधा को तोड़ते हुए 1घंटा 59मिनट 30सेकंड में दौड़ पूरी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। वहीं महिलाओं की श्रेणी में इथियोपिया की टिगिस्ट असेफा ने रिकॉर्ड कायम किया।

लेकिन इन एलीट एथलीट्स के बीच सादिक अहमद जैसे लोगों ने यह साबित कर दिया कि मैराथन सिर्फ रफ्तार की नहीं, बल्कि भावनाओं और संदेशों की भी दौड़ है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इस बार 71 में से 36 नए रिकॉर्ड कन्फर्म हुए। किसी ने सुपरविलेन बनकर दौड़ लगाई, तो कोई आंखों पर पट्टी बांधकर दौड़ा। किसी ने दौड़ते-दौड़ते स्कार्फ बुना, तो किसी ने पारंपरिक भारतीय और नेपाली पोशाक में अपनी संस्कृति को पेश किया।

सादिक अहमद का यह रिकॉर्ड अमीराती संस्कृति का एक शानदार प्रतिनिधित्व है। उन्होंने दिखा दिया कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी आसमान छुआ जा सकता है। उनके लिए यह सिर्फ एक मेडल या सर्टिफिकेट नहीं है, बल्कि उस देश के लिए एक छोटा सा तोहफा है जिसने उन्हें पहचान दी। सादिक का सफर यहीं नहीं रुकने वाला, वह आगे भी इसी तरह अपनी पहचान के साथ दुनिया के मैदानों पर दौड़ते नजर आएंगे।