कुछ लोग तुरंत सो जाते हैं, तो कुछ रातभर करवटें क्यों बदलते हैं?

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 03-11-2026
Why do some people fall asleep immediately, while others toss and turn all night long?
Why do some people fall asleep immediately, while others toss and turn all night long?

 

नई दिल्ली।

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग बिस्तर पर सिर रखते ही सो जाते हैं। वहीं कुछ लोगों को नींद आने में काफी वक्त लगता है। वे देर तक करवटें बदलते रहते हैं और बार-बार घड़ी देखते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या जल्दी सो जाना अच्छी सेहत की निशानी है और देर से नींद आना किसी बीमारी का संकेत?

दरअसल, नींद आने का संबंध शरीर की थकान, मस्तिष्क की सक्रियता, मानसिक तनाव और हमारी जैविक घड़ी से होता है। इसके अलावा नींद की पिछली कमी, उम्र, दिनचर्या और आसपास का वातावरण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि बिस्तर पर लेटते ही सो जाना हमेशा अच्छी नींद का संकेत नहीं होता। कई बार यह शरीर में नींद की कमी या दिन में अत्यधिक नींद आने का संकेत भी हो सकता है।

आखिर कितनी देर में नींद आना सामान्य है?

स्वस्थ वयस्कों को आमतौर पर बिस्तर पर जाने के बाद लगभग 10 से 20 मिनट में नींद आ सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए यह समय अलग हो सकता है।

नींद आने में लगने वाले समय को चिकित्सा विज्ञान में ‘स्लीप लेटेंसी’ कहा जाता है। यह वह अवधि है, जो बिस्तर पर सोने की कोशिश शुरू करने से वास्तविक नींद आने तक लगती है।

कुछ अध्ययनों में औसतन लगभग 12 मिनट का समय सामने आया है। वर्ष 2023 में स्लीप मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक मेटा विश्लेषण में स्वस्थ वयस्कों में झपकी से जुड़े परीक्षणों का अध्ययन किया गया था। इसमें भी नींद आने में लगने वाले समय और दिन में नींद की प्रवृत्ति के बीच संबंध पर ध्यान दिया गया।

आमतौर पर पांच मिनट से भी कम समय में सो जाना, खासकर अगर ऐसा नियमित रूप से हो, नींद की कमी या दिन में अत्यधिक नींद आने का संकेत हो सकता है। वहीं, नियमित रूप से 30 मिनट से अधिक समय तक नींद न आना भी ध्यान देने योग्य है। हालांकि, केवल समय के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

कुछ लोग चंद मिनटों में कैसे सो जाते हैं?

1. शरीर में नींद का दबाव बढ़ना

हम जितनी देर जागते रहते हैं, मस्तिष्क में एडेनोसिन नामक रसायन का प्रभाव बढ़ता जाता है। इससे नींद आने की इच्छा तेज होती है। लंबे समय तक जागने या पर्याप्त नींद नहीं लेने पर यह दबाव और बढ़ सकता है।

2. नींद की कमी

अगर कोई व्यक्ति लगातार कम सो रहा है, तो उसका शरीर जल्दी नींद की मांग कर सकता है। ऐसे में बिस्तर पर पहुंचते ही सो जाना किसी अच्छी आदत के बजाय नींद पूरी नहीं होने का संकेत भी हो सकता है।

3. शारीरिक थकान

दिनभर मेहनत करने, व्यायाम करने या अधिक सक्रिय रहने से नींद आने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, केवल शारीरिक थकान ही अच्छी नींद की गारंटी नहीं है।

4. तनाव से मुक्ति और शांत मन

जब मन शांत होता है और व्यक्ति मानसिक दबाव से मुक्त महसूस करता है, तो उसे नींद आने में आसानी हो सकती है। इसके उलट चिंता और बेचैनी नींद में बाधा डाल सकती है।

5. नियमित दिनचर्या

प्रतिदिन लगभग एक ही समय पर सोने और जागने से शरीर की आंतरिक घड़ी व्यवस्थित रहने में मदद मिलती है। इससे सोने का समय आने पर नींद आसानी से आ सकती है।

6. उम्र और आनुवंशिक अंतर

हर व्यक्ति की नींद की प्रकृति एक जैसी नहीं होती। उम्र, आनुवंशिक विशेषताओं और स्वाभाविक जैविक लय के कारण भी लोगों के सोने के तरीके अलग हो सकते हैं। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि सभी बच्चे और युवा बुजुर्गों की तुलना में जल्दी सोते हैं।

कुछ लोगों को रात में देर तक नींद क्यों नहीं आती?

नींद न आने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और देर शाम तक मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल शामिल है।

तनाव और जरूरत से ज्यादा सोचना: जब व्यक्ति किसी समस्या, चिंता या आने वाले दिन की जिम्मेदारियों के बारे में लगातार सोचता रहता है, तो उसका मस्तिष्क सतर्क बना रह सकता है। तनाव से जुड़ी शारीरिक प्रतिक्रियाएं भी नींद में रुकावट पैदा कर सकती हैं। कई बार अच्छी या रोमांचक बातें सोचते रहने से भी नींद देर से आती है।

जैविक घड़ी में बदलाव: कुछ लोगों की प्राकृतिक नींद का समय देर रात का होता है। यदि उन्हें अपनी जरूरत से पहले सोने के लिए मजबूर होना पड़े, तो नींद आने में समय लग सकता है। शिफ्ट में काम करना या रोजाना अलग-अलग समय पर सोना भी इस समस्या को बढ़ा सकता है।

चाय और कॉफी का सेवन: चाय, कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त पेय पदार्थ नींद को प्रभावित कर सकते हैं। कैफीन एडेनोसिन के प्रभाव को रोकता है। इसका असर कई घंटों तक बना रह सकता है।

दिन में लंबी झपकी: दोपहर या शाम में देर तक सोने से रात में नींद का दबाव कम हो सकता है। इससे सोने में परेशानी हो सकती है।

भारी भोजन और शराब: सोने से ठीक पहले भारी भोजन करने से कुछ लोगों को एसिड रिफ्लक्स या बेचैनी हो सकती है। शराब शुरू में नींद जैसा अहसास करा सकती है, लेकिन बाद में नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकती है।

कमरे का वातावरण: तेज रोशनी, शोर, अधिक गर्मी या असुविधाजनक बिस्तर भी नींद आने में बाधा बन सकते हैं।

क्या बीमारियों के कारण भी नींद प्रभावित होती है?

हां। कुछ शारीरिक और मानसिक समस्याएं नींद की गुणवत्ता और अवधि को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें प्रमुख हैं।

  • चिंता, अवसाद और लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव।

  • स्लीप एपनिया, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकने या कम होने की समस्या होती है।

  • रेस्टलेस लेग सिंड्रोम, जिसमें पैरों में बेचैनी के कारण उन्हें लगातार हिलाने की इच्छा होती है।

  • लंबे समय तक रहने वाला दर्द, एसिड रिफ्लक्स और सांस संबंधी समस्याएं।

  • थायरॉइड का जरूरत से ज्यादा सक्रिय होना।

  • गर्भावस्था, हार्मोनल बदलाव और कुछ अन्य शारीरिक स्थितियां।

  • कुछ दवाएं, जैसे कुछ एंटीडिप्रेसेंट, स्टेरॉयड और नाक खोलने वाली कुछ दवाएं।

यदि नींद की समस्या लगातार बनी रहती है, दिन में बहुत सुस्ती रहती है या खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

रात में जल्दी नींद लाने के लिए क्या करें?

नींद की आदतों में छोटे बदलाव भी कई लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

  1. हर दिन, सप्ताहांत में भी, लगभग एक ही समय पर उठें।

  2. सुबह प्राकृतिक रोशनी में कुछ समय बिताएं और दिन में शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।

  3. सोने से कम से कम छह से आठ घंटे पहले कैफीन लेना बंद करने की कोशिश करें। संवेदनशील लोगों को इससे भी पहले कैफीन छोड़ना पड़ सकता है।

  4. सोने से 30 से 60 मिनट पहले रोशनी कम करें और मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी का इस्तेमाल सीमित करें।

  5. बेडरूम को शांत, अंधेरा और आरामदायक तापमान वाला रखें।

  6. सोने से पहले किताब पढ़ना, हल्की स्ट्रेचिंग या धीमी सांस लेने जैसी आरामदायक गतिविधियां अपनाएं।

  7. शाम को अगले दिन के काम और अपनी चिंताओं को लिख लें, ताकि बिस्तर पर लेटकर बार-बार उनके बारे में सोचने से बच सकें।

  8. सोने से ठीक पहले भारी भोजन और शराब से परहेज करें।

  9. बिस्तर पर तभी जाएं जब नींद महसूस होने लगे। बिस्तर को काम या मोबाइल चलाने की जगह न बनाएं।

  10. यदि नींद नहीं आ रही और बेचैनी बढ़ रही है, तो कुछ देर बिस्तर से उठकर हल्की रोशनी में शांत गतिविधि करें। नींद आने लगे तो वापस बिस्तर पर जाएं। बार-बार घड़ी देखने से बचें।

अच्छी नींद का मतलब केवल जल्दी सो जाना नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी नींद का आकलन केवल इस बात से नहीं किया जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति कितनी जल्दी सो जाता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि उसे पर्याप्त नींद मिल रही है या नहीं, रात में नींद बार-बार टूटती तो नहीं और सुबह उठने के बाद वह कितना तरोताजा महसूस करता है।

अधिकांश वयस्कों को नियमित रूप से सात से नौ घंटे की नींद की जरूरत होती है। इसलिए जल्दी सोने के साथ पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना भी जरूरी है। यदि रात में नींद आने में परेशानी लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।