ब्यूरो।
शराब नहीं पीते हैं, फिर भी लिवर की बीमारी का खतरा हो सकता है। देर रात खाना खाना, पैकेटबंद फलों का जूस पीना या घंटों कुर्सी पर बैठे रहना सामान्य आदतें लग सकती हैं। लेकिन जब ये रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन जाती हैं, तो शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। इससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करने, इंसुलिन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया और वसा के इस्तेमाल की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
लिवर की ऐसी ही एक समस्या फैटी लिवर है। इसमें लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है। यह बीमारी शराब नहीं पीने वाले लोगों में भी हो सकती है। शुरुआती चरण में अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। कुछ मामलों में समय के साथ लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस यानी ऊतकों पर निशान और गंभीर स्थिति में सिरोसिस जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ आदतों पर ध्यान देकर लिवर की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
देर रात खाना खाना अपने आप में लिवर की बीमारी का कारण नहीं है। लेकिन सोने से ठीक पहले नियमित रूप से भारी भोजन करना, बार-बार स्नैक्स खाना और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
अगर भोजन में अधिक चीनी, मिठाइयां और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट शामिल हैं, तो शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा जमा होने की आशंका बढ़ सकती है। इससे लिवर में वसा जमा होने का जोखिम बढ़ सकता है।
रात का भोजन संतुलित रखना और सोने से पहले कुछ समय का अंतराल रखना अच्छी आदत है। साथ ही, भोजन की मात्रा और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना भी जरूरी है।
फल सेहत के लिए फायदेमंद हैं। लेकिन साबुत फल और फलों के जूस के पोषण में अंतर होता है। साबुत फल में फाइबर मौजूद रहता है, जबकि जूस बनाने के दौरान इसका काफी हिस्सा कम हो सकता है।
पैकेटबंद जूस के कुछ उत्पादों में अतिरिक्त चीनी भी मिलाई जाती है। मीठे पेय पदार्थों का बार-बार सेवन करने से कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसे पेय पेट भी उतना नहीं भरते, जितना साबुत फल या ठोस भोजन।
अधिक मात्रा में मीठे पेय और अतिरिक्त कैलोरी का सेवन लिवर में वसा जमा होने के जोखिम से जुड़ा है। इसलिए रोजाना के आहार में साबुत फल को प्राथमिकता देना बेहतर है। प्यास बुझाने के लिए सादा पानी अच्छा विकल्प है।
सुबह टहलना या जिम में व्यायाम करना सेहत के लिए फायदेमंद है। लेकिन इसके बाद पूरे दिन लगातार बैठे रहना शारीरिक निष्क्रियता की समस्या पैदा कर सकता है।
लंबे समय तक बैठे रहने और कम शारीरिक गतिविधि का संबंध इंसुलिन प्रतिरोध तथा मेटाबॉलिक समस्याओं से हो सकता है। इंसुलिन प्रतिरोध होने पर शरीर के लिए रक्त शर्करा को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। यह स्थिति फैटी लिवर के जोखिम से भी जुड़ी है।
काम के दौरान बीच-बीच में उठना, थोड़ी देर चलना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचना उपयोगी है। नियमित व्यायाम के साथ दिनभर सक्रिय रहना भी जरूरी है।
नियमित रूप से कम नींद लेने से भूख को नियंत्रित करने वाले तंत्र, रक्त शर्करा के संतुलन और शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है।
नींद की कमी के कारण वजन को नियंत्रित रखना भी मुश्किल हो सकता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहने पर मेटाबॉलिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। नींद संबंधी समस्याओं का संबंध फैटी लिवर सहित कुछ चयापचय संबंधी विकारों से भी देखा गया है।
एक रात कम सोने से लिवर खराब नहीं हो जाता। लेकिन लगातार नींद की कमी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। अधिकांश वयस्कों के लिए रात में सात से नौ घंटे की नींद एक अच्छा लक्ष्य है।
दुबला-पतला शरीर या सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) होने का मतलब यह नहीं कि लिवर में अतिरिक्त वसा जमा नहीं हो सकती।
दक्षिण एशियाई लोगों में भी सामान्य बीएमआई के बावजूद पेट के आसपास या आंतरिक अंगों के पास अतिरिक्त वसा जमा होने की समस्या हो सकती है। ऐसी वसा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है और इंसुलिन प्रतिरोध का खतरा बढ़ा सकती है।
इसलिए केवल वजन को स्वास्थ्य का पैमाना नहीं मानना चाहिए। कमर का आकार, रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे संकेतकों पर भी ध्यान देना चाहिए।
यह भी जरूरी है कि फैटी लिवर का पता केवल शरीर की बनावट या लक्षणों से नहीं लगाया जा सकता। कुछ लोगों को कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती, फिर भी लिवर में वसा जमा हो सकती है।
लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए जीवनशैली में छोटे लेकिन नियमित बदलाव मददगार हो सकते हैं।
संतुलित भोजन करें और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचें।
मीठे पेय पदार्थों और अतिरिक्त चीनी का सेवन कम करें।
साबुत फल, सब्जियां, दालें और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
नियमित शारीरिक गतिविधि करें और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।
पर्याप्त नींद लें और सोने-जागने का समय नियमित रखें।
वजन, कमर के आकार, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान दें।
जिन लोगों को मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, पेट की अधिक चर्बी या अन्य मेटाबॉलिक जोखिम हैं, उन्हें डॉक्टर से लिवर की जांच की जरूरत के बारे में सलाह लेनी चाहिए। हर व्यक्ति को एक जैसे टेस्ट या नियमित स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं होती।
ध्यान रखें: शराब नहीं पीना और सामान्य वजन होना अच्छी बातें हैं, लेकिन ये फैटी लिवर से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं हैं। समय पर चिकित्सकीय सलाह और स्वस्थ जीवनशैली लिवर की देखभाल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।