नई दिल्ली।
आज के डिजिटल दौर में टॉयलेट में बैठकर मोबाइल स्क्रॉल करना आम आदत बन चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे खतरनाक मानते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह छोटी सी लगने वाली आदत शरीर, खासकर श्रोणि (पेल्विक) स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि टॉयलेट पर लंबे समय तक बैठना शरीर की प्राकृतिक संरचना के खिलाफ है। जब कोई व्यक्ति 10 मिनट या उससे अधिक समय तक बैठा रहता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण गुदा और मलाशय की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे बवासीर (हेमोराइड्स) जैसी समस्या पैदा हो सकती है, जिसमें सूजन, दर्द और कभी-कभी रक्तस्राव भी होता है।
मोबाइल इस्तेमाल करने से एक और बड़ी समस्या यह होती है कि व्यक्ति अपने शरीर के प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज करने लगता है। शरीर की पाचन प्रणाली एक खास लय में काम करती है, लेकिन स्क्रीन में उलझने से यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है। नतीजतन कब्ज, गुदा विदर और अन्य पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, फोन देखने के लिए आगे झुककर बैठने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे मल त्याग की प्रक्रिया और कठिन हो जाती है। लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से पेल्विक मांसपेशियों पर भी तनाव बढ़ता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टॉयलेट में पांच मिनट से अधिक समय न बिताएं। यदि इस दौरान मल त्याग नहीं होता है, तो उठकर थोड़ी देर बाद दोबारा प्रयास करना बेहतर होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मोबाइल फोन को टॉयलेट से दूर रखा जाए, ताकि ध्यान भंग न हो।
इसके अलावा, स्वस्थ पाचन के लिए पर्याप्त पानी पीना, फाइबर युक्त भोजन करना और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है। ये सरल आदतें न केवल पाचन तंत्र को बेहतर बनाती हैं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि टॉयलेट में मोबाइल चलाना भले ही समय बिताने का आसान तरीका लगे, लेकिन यह शरीर पर लगातार दबाव डालता है। इसलिए इस आदत को समय रहते बदलना जरूरी है, ताकि भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके।