नई दिल्ली।
बच्चों में अचानक बुखार आना माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह हमेशा खतरनाक नहीं होता। दरअसल, बुखार शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। ऐसे में घबराने के बजाय सही जानकारी और देखभाल बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों का कहना है कि बुखार के दौरान बच्चे में कुछ सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे चिड़चिड़ापन, शरीर का गर्म महसूस होना, चेहरे का लाल होना, पसीना आना और असहजता। इन संकेतों को पहचानकर समय पर कदम उठाना जरूरी होता है, ताकि बच्चे को ज्यादा परेशानी न हो।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि बच्चा तीन महीने से कम उम्र का है और उसका तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं बड़े बच्चों के मामले में, अगर बुखार के साथ उल्टी, दस्त, दाने या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो मेडिकल सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
बुखार के दौरान बच्चों की देखभाल में सबसे अहम है शरीर को हाइड्रेट रखना। उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी या तरल पदार्थ देना चाहिए, ताकि निर्जलीकरण से बचाव हो सके। डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल या आइबुप्रोफेन दी जा सकती है, लेकिन बच्चों को एस्पिरिन देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे रेये सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थिति हो सकती है।
इसके अलावा, बच्चे को हल्के कपड़े पहनाना और आराम देना बेहद जरूरी है। ठंडे पानी से नहलाने या रबिंग अल्कोहल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। अगर बच्चा खाने से मना करता है, तो उसे जबरदस्ती न खिलाएं, बल्कि उसकी इच्छा के अनुसार हल्का आहार दें।
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर बुखार लगातार पांच दिनों तक बना रहता है या बच्चा सुस्त, कम सक्रिय और निर्जलित दिखता है, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। खासतौर पर उन बच्चों के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है, जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी हो।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बुखार को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, क्योंकि यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, सही देखभाल और समय पर इलाज से बच्चे को जल्दी राहत मिल सकती है।
अंततः, सबसे जरूरी है कि माता-पिता घबराने के बजाय जागरूक रहें और बच्चे को आराम, तरल पदार्थ और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह के साथ सही उपचार दें। यही सतर्कता बच्चे के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की कुंजी है।