नई दिल्ली।
भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते तनाव के बीच अच्छी नींद आज सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। नींद विशेषज्ञों के अनुसार, सोने से पहले नहाने की आदत—खासकर हल्की रोशनी या अंधेरे में—अनिद्रा से राहत पाने का एक प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका साबित हो सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारे शरीर की जैविक घड़ी, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है, रोशनी के अनुसार काम करती है। जैसे ही शाम के समय रोशनी कम होती है, मस्तिष्क मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव बढ़ा देता है, जो नींद को प्रोत्साहित करता है। लेकिन रात में तेज रोशनी या मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन इस प्रक्रिया को बाधित करती हैं, जिससे नींद आने में देरी होती है।
ऐसे में हल्की रोशनी या अंधेरे में स्नान करना शरीर को यह संकेत देता है कि अब आराम का समय है। जब आप सोने से एक या दो घंटे पहले गुनगुने पानी से नहाते हैं, तो शरीर का तापमान पहले बढ़ता है और फिर धीरे-धीरे गिरता है। यह बदलाव मस्तिष्क को नींद के लिए तैयार करता है और गहरी नींद में मदद करता है।
इसके अलावा, पानी की धीमी आवाज और शांत वातावरण मानसिक तनाव को कम करते हैं। यह अनुभव ध्यान (मेडिटेशन) की तरह काम करता है, जिससे तंत्रिका तंत्र शांत होता है और अनिद्रा की समस्या में राहत मिलती है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि अंधेरे में नहाना कोई जादुई इलाज नहीं है, बल्कि यह एक सहायक जीवनशैली आदत है। जिन लोगों को लंबे समय से नींद की समस्या है, उन्हें डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
बेहतर नींद के लिए कुछ सरल आदतें अपनाई जा सकती हैं—जैसे सोने से पहले तेज रोशनी कम करना, स्क्रीन टाइम घटाना, नियमित समय पर सोना और उठना, और स्नान के बाद तुरंत मोबाइल या टीवी से दूरी बनाना।
सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। पूरी तरह अंधेरे में नहाने के बजाय हल्की रोशनी का इस्तेमाल करना बेहतर होता है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके, खासकर बुजुर्गों के लिए।
कुल मिलाकर, अंधेरे या हल्की रोशनी में नहाने की यह आदत न केवल शरीर को आराम देती है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है। यदि इसे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए, तो यह अनिद्रा जैसी समस्या से निपटने में काफी मददगार साबित हो सकती है।