सेराज अनवर / पटना
निकाह को आसान बनाने के लिए हिंदुस्तानी मुसलमानों की शरई संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शनिवार से दस दिवसीय देशव्यापी अभियान का आगाज किया है. इस मुहिम के तहत ऑनलाइन संगोष्ठियां और जलसे आयोजित किए जाएंगे. मस्जिदों से निकाह में फिजूलखर्ची बंद करने की तकरीरें होंगी. शादियों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए बुद्धिजीवियंों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी सहयोग लिया जाएगा.
मुस्लिम समाज में शादियों में फिजूल खर्ची व दहेज को लेकर होने वाली मांग पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने गम्भीर चिंता जताई है. कुछ दिन पहले दहेज उत्पीड़न का शिकार आयशा की मौत ने पर्सनल लॉ बोर्ड सहित देश के तमाम मुस्लिम अदारों को झकझोर कर रख दिया है. कोई और आयशा की तरह दहेज उत्पीड़न का शिकार न बने, इसको लेकर बोर्ड ने शनिवार यानी 27 मार्च से 5 अप्रैल तक अभियान की शुरुआत की है.
इसके प्रचार सामग्री ’इकरारनामा’ स्वीकृति पत्र में 11 बिंदू शामिल हैं, जिसमें निम्न बातें कही गई हैं...
निकाह को आसान बनाएंगे,बेजा रस्म व रिवाज खास कर दहेज की मांग, मंगनी,हल्दी, रतजगा से परहेज करेंगे.
बरात की जगह मस्जिद में सादगी के साथ निकाह का तरीका अपनाएंगे.
निकाह की दावत का आयोजन सिर्फ दूसरे शहर के अतिथि और घर के सदस्यों के लिए करेंगे.
निकाह में शिरकत करेंगे मगर निकाह की तकरीब वाली दावत से परहेज करेंगे.
दावत ए वलीमा सादगी के साथ दौलत की नुमाईश के बेगैर गरीब-यतीम का ख्याल रखते हुए करेंगे.
जिस महफिल ए निकाह,दावत ए वलीमा में सुन्नत और शरीयत का ख्याल रखा जाएगा उसका समर्थन और प्रशंसा करेंगे. इसके खिलाफ होने वाला शादी समारोह पर नापसंदगी का भरपूर इजहार करेंगे.
महफिल ए निकाह,दावत ए वलीमा में आतिशबाजी,गाना-बजाना,विडियोग्राफी,खेल-तमाशा से बचते हुए निकाह के लिए बहुमूल्य स्टेज का इस्तेमाल नहीं करेंगे.
नौजवान अपने निकाह को सादगी से कम खर्च में अंजाम देंगे. बाहरी दबाव हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे.
निकाह के लिए तय वक्त का सख्ती से पालन करेंगे.
निकाह के बाद सुन्नत और शरीयत के मुताबिक, खुशगवार वैवाहिक जीवन गुजारेंगे.
औलाद की नेमत मैयस्सर आने पर उसकी बेहतर तालीम व तर्बियत का एहतेमाम करेंगे.
इस इकरारनामा पर देश के सभी मसलक, संगठन के नामचीन उलेमा का दस्तखत है. जिसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद राबे हसनी नदवी, इमारत ए शरिया बिहार के अमीर ए शरीयत और बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी, जमीयतु उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी,कछौछाशरीफ के गद्दीनशीं मौलाना फखरुद्दीन अशरफ जिलानी, जमीयत अहले हदीस के अमीर मौलाना असगर अली इमाम मेहंदी सलफी,जमात ए इस्लामी के अमीर सआदतुल्लाह हुसैनी,मजलिस उलेमा ए हिंद व इमाम जुमा लखनउ के महासचिव क्लब ए जव्वाद नकवी, बोर्ड के सदस्य मौलाना ओबैदुल्लाह खान आजमी, कुल हिंद मजलिस शिया उलेमा व जाकरीन के अध्यक्ष नेसार हुसैन आगा का नाम शामिल है.
पहली बार हर तबका के उलेमा ने निकाह को आसान बनाने और दहेज पर मुकम्मल काबू पाने के लिए एकमत से अपील जारी की है. इसमें कहा गया कि उक्त बातों का इकरार करें और उन पर अमल करें.यह अभियान बोर्ड के अध्यक्ष सय्यद राबे हसनी नदवी व महासचिव मौलाना वली रहमानी के नेतृत्व में देश भर में चलेगा. इसमें इंटरनेट मीडिया का सहारा लिया जाएगा.
लोगों को समझाया जाएगा कि निकाह को मुश्किल न बनाएं. शादियों में गैर जरूरी रस्म से परहेज करें.दहेज की मांग करने वालों की निंदा करते हुए उनका विरोध करें. इसके अलावा जिन नौजवानों की शादी होने जा रही है या हाल में हुई है, खुशहाल जिंदगी के लिए उनकी काउंसिलिंग की जाएगी.निश्चित तौर पर इस अभियान का मुस्लिम समाज पर सकारात्मक असर पड़ेगा.