नई दिल्ली
क्या आपका बच्चा छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता है? क्या वह पढ़ाई या खेल में ध्यान नहीं लगा पाता? कई माता-पिता इन समस्याओं को केवल जिद या आदत मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे पोषण की कमी भी एक बड़ा कारण हो सकती है।
आजकल बाल विकास और पोषण पर हो रहे शोध यह बताते हैं कि बच्चे का खानपान सीधे उसके व्यवहार, मूड और मानसिक विकास को प्रभावित करता है। शरीर और मस्तिष्क एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि बच्चे को सही पोषण नहीं मिलता, तो उसका असर उसके स्वभाव और सीखने की क्षमता पर दिखाई देने लगता है। अच्छी बात यह है कि खाने-पीने की आदतों में थोड़ा बदलाव करके इन समस्याओं में काफी सुधार लाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के आहार में सबसे जरूरी चीज प्रोटीन है। प्रोटीन मस्तिष्क के विकास और मानसिक संतुलन के लिए बेहद अहम माना जाता है। यदि बच्चे के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नहीं है, तो वह जल्दी थक सकता है, चिड़चिड़ा हो सकता है और पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी महसूस कर सकता है।
समय के साथ यह स्थिति उसकी याददाश्त और भावनात्मक नियंत्रण को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए बच्चों के भोजन में दूध, अंडे, दाल, मांस, पनीर, मेवे और बीज जैसी चीजों को शामिल करना जरूरी माना जाता है। इससे बच्चे दिनभर ऊर्जावान रहते हैं और उनका ध्यान भी बेहतर होता है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि बच्चों का आंतों का स्वास्थ्य उनके व्यवहार पर गहरा असर डालता है। आधुनिक रिसर्च के अनुसार, स्वस्थ पाचन तंत्र मानसिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। यदि बच्चे की पाचन प्रणाली ठीक नहीं है, तो वह बेचैन और चिड़चिड़ा हो सकता है।
आंतों को स्वस्थ रखने के लिए बच्चों को दही, डोसा, घी जैसे किण्वित खाद्य पदार्थ देने चाहिए। इसके साथ ही फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज जैसे फाइबर से भरपूर भोजन भी जरूरी हैं। पर्याप्त पानी पीना भी पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
पानी की कमी भी बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मस्तिष्क को सही ढंग से काम करने के लिए शरीर में पर्याप्त पानी होना जरूरी है। कई बार बच्चे खुद प्यास को पहचान नहीं पाते। ऐसे में माता-पिता को इस पर ध्यान देना चाहिए।
सूखे होंठ, बार-बार थकान, चिड़चिड़ापन या मीठे पेय की बार-बार इच्छा पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। साथ ही तरबूज, संतरा, खीरा और सूप जैसी पानी से भरपूर चीजें भी उनके भोजन में शामिल करनी चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भोजन का समय तय होना बेहद जरूरी है। यदि बच्चे समय पर खाना नहीं खाते या भोजन छोड़ देते हैं, तो उनके शरीर में शुगर का स्तर गिर सकता है। इसका असर उनके मूड और ध्यान पर पड़ता है।
नियमित समय पर भोजन करने से बच्चों की ऊर्जा बनी रहती है, उनका पाचन बेहतर होता है और पढ़ाई में ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए माता-पिता को बच्चों के खाने का एक निश्चित समय तय करना चाहिए।
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के व्यवहार को केवल अनुशासन या स्वभाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कई बार शरीर में पोषण की कमी भी इसके पीछे की वजह होती है। सही खानपान, पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।