नई दिल्ली
भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अक्सर लोग पानी पीने को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटी-सी लापरवाही बार-बार होने वाले सिरदर्द की बड़ी वजह बन सकती है। हालिया स्वास्थ्य रिपोर्ट्स और डॉक्टरों की राय के मुताबिक, शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन सीधे तौर पर सिरदर्द से जुड़ी हुई है, जिसे बहुत से लोग सामान्य थकान समझकर टाल देते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि मानव शरीर का तरल संतुलन बिगड़ते ही सबसे पहले असर मस्तिष्क पर पड़ता है। मस्तिष्क लगभग 75 प्रतिशत पानी से बना होता है और इसके सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी बेहद ज़रूरी है। जब शरीर को ज़रूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलता, तो मस्तिष्क के ऊतक अस्थायी रूप से सिकुड़ सकते हैं। यह हल्की-सी सिकुड़न नसों और आसपास के हिस्सों पर दबाव डालती है, जिससे बेचैनी और सिरदर्द की समस्या पैदा होती है।
रक्त संचार और ऑक्सीजन की अहम भूमिका
डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त पानी पीने से शरीर में रक्त संचार बेहतर रहता है और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू होती है। इसके उलट, पानी की कमी से रक्त गाढ़ा होने लगता है, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह धीमा पड़ सकता है। इसका नतीजा सिरदर्द, चक्कर, थकान और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई के रूप में सामने आता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो मानसिक और शारीरिक कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी है कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि पानी शरीर में सोडियम और पोटेशियम जैसे ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। ये तत्व तंत्रिका संकेतों और मांसपेशियों के सही कामकाज के लिए आवश्यक हैं। डिहाइड्रेशन की स्थिति में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है, जिससे सिरदर्द, कमजोरी और याददाश्त पर असर पड़ सकता है। यह समस्या खास तौर पर उन लोगों में ज़्यादा देखी जाती है, जो बहुत पसीना बहाते हैं, कसरत के बाद पानी नहीं पीते या अत्यधिक कैफीन का सेवन करते हैं।
विषाक्त पदार्थों की सफाई में भी मददगार
पर्याप्त पानी पीना शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया के लिए भी ज़रूरी है। दिनभर के चयापचय से शरीर में अपशिष्ट और विषैले पदार्थ बनते हैं, जिन्हें बाहर निकालना आवश्यक होता है। पानी की पर्याप्त मात्रा से गुर्दे बेहतर ढंग से काम करते हैं और पेशाब के ज़रिये विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। जब पानी कम होता है, तो यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे शरीर में भारीपन, थकान और अंततः सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।
निष्कर्ष: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पर्याप्त पानी पीने की आदत न केवल सिरदर्द से बचाव करती है, बल्कि समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है। इसलिए अगर बार-बार सिरदर्द की समस्या हो रही है, तो सबसे पहले अपनी पानी पीने की आदतों पर ध्यान देना ज़रूरी है—क्योंकि कई बार समाधान बेहद सरल होता है।




