With the end of Naxalism in Chhattisgarh, a 'highly vulnerable' village yearning for development gets water.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ में नक्सली खतरे के अंत होने और राज्य के नारायणपुर जिले के एक दूरस्थ गांव नेलांगुर को ‘‘अति संवेदनशील’’ क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद आखिरकार वहां के लोगों को उनकी सबसे चिंता वाली जल आपूर्ति की कमी की समस्या से राहत मिली है।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पहली बार गांव के हर घर में नल से पानी का कनेक्शन पहुंच गया है, जो अब चालू भी हो गया है। इस पहल से जीवन के लिए अनमोल पानी की कमी की समस्या के समाप्त होने के साथ ही लंबे समय से इसके लिए जारी संघर्ष का भी अंत हो गया है।
यह पहल ऐसे समय में की गई है जब छत्तीसगढ़ को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद कुछ ही दिन बीते है।
छत्तीसगढ़ और खासकर बस्तर क्षेत्र चार दशकों से अधिक समय से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जूझ रहा था। नारायणपुर, बस्तर क्षेत्र के सात जिलों में से एक है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सीमा के समीप स्थित दुर्गम ओरछा ब्लॉक में बसा नेलांगुर कभी एक अति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत था। कठिन भूभाग और पहले की सुरक्षा चिंताओं के कारण राज्य प्रशासन के लिए यहां बुनियादी सेवाओं की आपूर्ति एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई थी।’’
नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने एक विज्ञप्ति में कहा कि नल के पानी की उपलब्धता राज्य के सबसे दूरस्थ कोनों को विकास की मुख्यधारा में लाने के मकसद से किए जा रहे निरंतर प्रशासनिक प्रयासों को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन के तहत जल आपूर्ति प्रणाली स्थापित की गई। सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले पंपों का उपयोग करके जलस्रोत से पानी प्राप्त किया जा रहा है और पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम करते हुए पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।”
उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय से 52 किलोमीटर दूर स्थित नेलांगुर के निवासियों के लिए यह परियोजना जीवन को बदल देने वाली साबित हुई है।
पानी लाने को पहले लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर रहने वाली महिलाओं ने कहा घर पर जलापूर्ति होने से उनकी दिनचर्या आसान हो गई और स्वच्छता के स्तर में सुधार हुआ है।